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US-China: किस हद तक कामयाब होगी अपनी शर्तों पर अमेरिका से बात करने की चीन की नीति?
Sun, 14 May 2023 10:12 PM IST
निर्मल कांत
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Sun, 14 May 2023 10:12 PM IST
सार
अभी चीन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है कि अगले महीने सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हो। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और चीन के रक्षा मंत्री ली शांफफू दोनों के इस डॉयलॉग को संबोधित करने के लिए सिंगापुर जाने की संभावना है।
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शी जिनपिंग, जो बाइडन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन की वियना में चीन के प्रमुख डिप्लोमैट वांग यी से हुई मुलाकात से दोनों देशों के बीच कई महीनों से चल रहा अनबोलापन टूटा है। अमेरिकी मीडिया में हाल में छपी रिपोर्टों के मुताबिक, फरवरी के बाद से चीन बातचीत के लिए अमेरिका की पहल लगातार ठुकरा रहा था। फरवरी में अमेरिकी वायु क्षेत्र में चीनी गुब्बारे देखे जाने के बाद अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने अपनी तय चीन यात्रा रद्द कर दी थी। उसके बाद से चीन हर स्तर पर बातचीत की पहल ठुकरा रहा था।
अभी चीन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है कि अगले महीने सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हो। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और चीन के रक्षा मंत्री ली शांफफू दोनों के इस डॉयलॉग को संबोधित करने के लिए सिंगापुर जाने की संभावना है। खबरों के मुताबिक चीन ने शर्त लगा दी है कि अमेरिका पहले ली पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाए।
ली पर अमेरिका के पूर्व ट्रंप प्रशासन ने 2018 में प्रतिबंध लगा दिए थे। उन पर यह प्रतिबंध रूस से लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम उपकरण खरीदने के आरोप में लगाए गए थे। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक खास खबर के मुताबिक चीन ने मांग रखी है कि अमेरिका दो जून को सिंगापुर में होने वाले डायलॉग के पहले ली पर से प्रतिबंध हटाए।
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जबकि जो बाइडन प्रशासन का कहना है कि ली पर प्रतिबंध कायम रहने की स्थिति में भी अमेरिकी रक्षा मंत्री उनसे मिलने को तैयार हैँ। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने निक्कईएशिया से कहा- ‘ली पर प्रतिबंध रहने के बावजूद अमेरिकी रक्षा मंत्री अपनी आधिकारिक भूमिका में चीनी रक्षा मंत्री से मिल सकने में सक्षम हैं।’
यहां विश्लेषकों को उम्मीद है कि गुरुवार को सुलिवन और वांग के बीच वियना में हुई वार्ता के बाद दोनों देशों में तनाव घटने की आशा है। इस स्थिति में संभव है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत की गुंजाइश भी निकल आए। ह्वाइट हाउस के एक अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि सुलिवन और वांग के बीच ‘स्पष्ट, ठोस और रचनात्मक’ बातचीत हुई। यह बातचीत वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध और ताइवान के बारे में हुई।
अधिकारी ने कहा- ‘दोनों पक्ष संवाद के महत्त्वपूर्ण रणनीतिक माध्यमों को बरकरार रखने पर सहमत हुए हैं, ताकि नवंबर 2022 में राष्ट्रपति बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इंडोनेशिया के बाली में हुई मुलाकात के दौरान जो उद्देश्य तय हुए थे, उनकी तरफ आगे बढ़ा जा सके।’
लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बातचीत के बारे में चीन के रुख पर निराशा जताई। उन्होंने कहा- ‘वरिष्ठ स्तरों पर संवाद के लिए किए गए अनुरोधों की अनदेखी करना, ठुकराना या बैठकों को रद्द करना चीन का फैसला रहा है। हमें उम्मीद है कि चीन संवाद के इन माध्यमों को खोलने के महत्व को समझेगा।’
थिंक टैंक एशिया सोसायटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में स्थित सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस में सीनियर फेलॉ लाइन मॉरिस ने निक्कईएशिया से कहा- ‘मैं निजी रूप से मानता हूं कि चीनी रक्षा मंत्री पर से प्रतिबंध हटा लिया जाना चाहिए। लेकिन प्रतिबंध हटाने की स्थिति में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) हस्तक्षेप कर सकती है, जिसका चीन के प्रति रुख बहुत आक्रामक है। इसलिए प्रतिबंध हटाना कठिन और राजनीतिक रूप से जोखिम भरा बना हुआ है।’
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अभी चीन ने अमेरिका के इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है कि अगले महीने सिंगापुर में होने वाले शांगरी-ला डायलॉग के दौरान दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय मुलाकात हो। अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन और चीन के रक्षा मंत्री ली शांफफू दोनों के इस डॉयलॉग को संबोधित करने के लिए सिंगापुर जाने की संभावना है। खबरों के मुताबिक चीन ने शर्त लगा दी है कि अमेरिका पहले ली पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाए।
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ली पर अमेरिका के पूर्व ट्रंप प्रशासन ने 2018 में प्रतिबंध लगा दिए थे। उन पर यह प्रतिबंध रूस से लड़ाकू विमान और मिसाइल सिस्टम उपकरण खरीदने के आरोप में लगाए गए थे। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक खास खबर के मुताबिक चीन ने मांग रखी है कि अमेरिका दो जून को सिंगापुर में होने वाले डायलॉग के पहले ली पर से प्रतिबंध हटाए।
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जबकि जो बाइडन प्रशासन का कहना है कि ली पर प्रतिबंध कायम रहने की स्थिति में भी अमेरिकी रक्षा मंत्री उनसे मिलने को तैयार हैँ। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने निक्कईएशिया से कहा- ‘ली पर प्रतिबंध रहने के बावजूद अमेरिकी रक्षा मंत्री अपनी आधिकारिक भूमिका में चीनी रक्षा मंत्री से मिल सकने में सक्षम हैं।’
यहां विश्लेषकों को उम्मीद है कि गुरुवार को सुलिवन और वांग के बीच वियना में हुई वार्ता के बाद दोनों देशों में तनाव घटने की आशा है। इस स्थिति में संभव है कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों के बीच बातचीत की गुंजाइश भी निकल आए। ह्वाइट हाउस के एक अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि सुलिवन और वांग के बीच ‘स्पष्ट, ठोस और रचनात्मक’ बातचीत हुई। यह बातचीत वैश्विक सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध और ताइवान के बारे में हुई।
अधिकारी ने कहा- ‘दोनों पक्ष संवाद के महत्त्वपूर्ण रणनीतिक माध्यमों को बरकरार रखने पर सहमत हुए हैं, ताकि नवंबर 2022 में राष्ट्रपति बाइडन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच इंडोनेशिया के बाली में हुई मुलाकात के दौरान जो उद्देश्य तय हुए थे, उनकी तरफ आगे बढ़ा जा सके।’
लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने बातचीत के बारे में चीन के रुख पर निराशा जताई। उन्होंने कहा- ‘वरिष्ठ स्तरों पर संवाद के लिए किए गए अनुरोधों की अनदेखी करना, ठुकराना या बैठकों को रद्द करना चीन का फैसला रहा है। हमें उम्मीद है कि चीन संवाद के इन माध्यमों को खोलने के महत्व को समझेगा।’
थिंक टैंक एशिया सोसायटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में स्थित सेंटर फॉर चाइना एनालिसिस में सीनियर फेलॉ लाइन मॉरिस ने निक्कईएशिया से कहा- ‘मैं निजी रूप से मानता हूं कि चीनी रक्षा मंत्री पर से प्रतिबंध हटा लिया जाना चाहिए। लेकिन प्रतिबंध हटाने की स्थिति में अमेरिकी कांग्रेस (संसद) हस्तक्षेप कर सकती है, जिसका चीन के प्रति रुख बहुत आक्रामक है। इसलिए प्रतिबंध हटाना कठिन और राजनीतिक रूप से जोखिम भरा बना हुआ है।’