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बेहतर विकास के लिए देशभर के 100 जिलों में सरकार ने किया ये काम
भाषा, नई दिल्ली
Updated Thu, 30 Aug 2018 04:57 PM IST
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सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) योजना के तहत चलाई जाने वाली विभिन्न परियोजनाओं में दोहराव रोकने के उद्देश्य से सरकार ने करीब 100 जिलों में कामकाज को भौगोलिक सूचना प्रणाली से जोड़ दिया है। कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्री डी.वी. सदानंद गोडा ने आज यह जानकारी दी। इसके साथ ही सांसद भी अब अपने क्षेत्र की विकास परियोजनाओं के लिये इस भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) का इस्तेमाल करते हुये आनलाइन दे सकेंगे।
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कार्यक्रम क्रियान्यन मंत्री ने योजनाओं की समीक्षा करने के बाद संवाददाताओं के साथ बैठक में कहा, ‘‘सांसद क्षेत्र विकास निधि के तहत 100 जिलों में कामकाज को भोगौलिक स्थिति के साथ जोड़ दिया गया है। उन्नत किये गये पोर्टल में विभिन्न क्षेत्रों में होने वाले कार्यों को जियो-टैग किया जा सकता है। इस सुविधा से राज्यों, केन्द्र शासित प्रदेशों को योजना के तहत होने वाले बेहतर कार्यों और अनुभवों को साझा किया जा सकेगा।’’ सदानंद ने कहा कि इस पोर्टल से जुड़ने के बाद योजना के तहत कार्यों के दोहराव से बचा जा सकेगा। कई बार ऐसा होता है कि एक ही स्थान के लिये एक से अधिक बार धन की मांग की जाती है।
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योजना के तहत जिन 100 जिलों को भौगोलिक सूचना प्रणाली से जोड़ा गया है ये सांसदनिधि क्षेत्र 90 अलग अलग लोकसभा सीटों में पड़ते हैं। मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि जिला प्रशासन उनके क्षेत्र में चलने वाले सभी कार्यों के बारे में पूरी जानकारी उपलब्ध करायें। उन्होंने यह भी कहा कि सांसद क्षेत्र विकास निधि के तहत आवंटित धन में से जुलाई तक 75 प्रतिशत से अधिक धन का इस्तेमाल कर लिया गया है।
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सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 31 जुलाई 2018 तक सांसद क्षेत्र विकास निधि के तहत 7,097 करोड़ रुपये के जारी किये गये कोष में से 2,932 करोड़ रुपये की किस्त ही बाकी रह गई थी। इसमें कहा गया है कि 17 राज्यों में जारी किये गये कुल धन में से 10 प्रतिशत ही बिना खर्च का बचा है।