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मुकदमों पर नजर रखने को सरकार ने कसी कमर, सॉफ्टवेयर के जरिए होगी निगरानी 

पीयूष  पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 14 Oct 2018 04:00 AM IST
To keep an eye on the lawsuits the government has ready
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अदालतों में लंबित मुकदमों के पहाड़ को कम करने के मद्देनजर केंद्र ने अपने हरेक मुकदमे पर नजर रखने के लिए कमर कस ली है। अब विधि सूचना प्रबंधन एवं विवरण तंत्र (लिम्स सॉफ्टवेयर) में सभी मंत्रालय और विभाग निचली से लेकर ऊपरी अदालतों तक में दाखिल होने वाले मसलों का ब्यौरा तैयार करेंगे। इसमें ऊपरी अदालत में जाने की कारण, मुद्दा, दस्तावेज और निचली अदालत के दस्तावेज शामिल रहेंगे। विधि सचिव सुरेश चंद्र ने सभी मंत्रालयों और विभागों को लिम्स की अहमियत बताते हुए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। यह अधिकारी लिम्स सॉफ्टवेयर में सूचना डालने और ऊपरी अदालत जाने वाले मामलों के कारण बताने के लिए जिम्मेदार होगा। 
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नोडल अधिकारी सीधे सचिव को मंत्रालय या विभाग से जु़ड़े मामलों पर रिपोर्ट करेगा। खास बात ये है कि किसी भी मामले की अगली सुनवाई से संबंध में अलर्ट संदेश स्वत: लिम्स के ऑटोमेशन से उसके पास पहुंचेगा। उपभोक्ता, वाणिज्य और वित्त समेत अन्य मंत्रालयों ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। कानून मंत्रालय के मुताबिक सरकार देश की सभी अदालतों में लंबित तीन करोड़ से ज्यादा मामलों को निपटाने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रही है। इस दिशा में सरकार के मामलों की सक्रिय निगरानी के लिए लिम्स की एकीकृत व्यवस्था कायम की जा रही है। इसमें सभी मंत्रालय हिस्सेदार हैं और उन्हें बेतुके मामलों को आगे नहीं ले जाना है। इस व्यवस्था का यही लक्ष्य है जिसे तकनीक के जरिए हल मिलेगा।  

केंद्र लंबित मुकदमों में कमी लाने को लेकर राज्य सरकारों से भी विचार-विमर्श कर रहा है। ऐसे में लिम्स की व्यवस्था राज्य सरकारें भी भविष्य में लागू कर सकती हैं। कानून मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक लिम्स कारगर होगा, क्योंकि इसमें तकनीक का प्रयोग किया गया है और संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी भी तय होगी। इसको लेकर राज्यों से भी चर्चा हुई है। आने वाले समय में यह एकीकृत व्यवस्था सिर्फ केंद्र में ही नहीं, राज्यों में भी लागू होगा। उन्होंने बताया कि करीब निचली से लेकर ऊपरी अदालतों में 35-40 प्रतिशत मामले सरकारों के हैं। 

ऐसे में यह व्यवस्था सरकार द्वारा दाखिल छुटपुट मामलों का निपटारा अन्य तरीके से कराने में मदद करेगा। जबकि तमाम मामलों में आगे नहीं जाने में सहायक होगा। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गत जनवरी माह में जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक 2.81 करोड़ मामले देश की जिला अदालतों में लंबित हैं। गौरतलब है कि एक तरफ लंबित मुकदमों की बढ़ती फेरहिस्त है, जबकि दूसरी ओर न्यायिक अधिकारियों की भारी कमी है। रिपोर्ट में कहा गया कि इस चिंताजनक स्थिति से उबरने के लिए आगामी तीन वर्षों में 15000 से अधिक न्यायाधीशों की आवश्यकता होगी।

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