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'बाज' से रखी जाएगी चीनी सैनिकों पर नजर, इसी तंत्र पर काम करेंगी आईटीबीपी और इंटेलिजेंस एजेंसियां

Fri, 31 Jul 2020 06:37 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 31 Jul 2020 06:37 PM IST
सार

लद्दाख सेक्टर में भी कई जगहों पर नई बीओपी खड़ी कर उनके बीच की दूरी घटाई जा रही है। आईटीबीपी की कई बीओपी के बीच 20 किलोमीटर से लेकर डेढ़ सौ किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी रहती है, ऐसे में बॉर्डर सुरक्षा थोड़ी मुश्किल हो जाती है...

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To counter china on border, ITBP and intelligence agencies will work on special mechanism
आईटीबीपी के जवान - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चीनी सैनिकों के दुस्साहस पर नजर रखने के लिए अब आईटीबीपी और इंटेलिजेंस एजेंसियां बाज तंत्र पर काम करेंगी। गश्त के दौरान आईटीबीपी कर्मियों को इस तरह के उपकरण मुहैया कराए जाएंगे, जिससे वे घाटी में बहुत नीचे तक की गतिविधियां साफ देख सकें। केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने उपकरणों का खुलासा न करने की शर्त पर बताया कि ये 'बाज' की तरह काम करेंगे।

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चाहे कैसा भी मौसम हो, इनका काम जारी रहेगा। इन्हें ऊंचाई वाले इलाके में लगाया जाएगा। इसके अलावा गश्त में लगे जवानों को कुछ खास किस्म के उपकरण मुहैया कराए जा रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश के साथ लगती सीमा पर 47 अतिरिक्त बीओपी तैयार करने का काम शुरू हो गया है।
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बीओपी और गश्त को लेकर नए मापदंड बनाए गए हैं। इसके अलावा आईटीबीपी को दो हेलीकॉप्टर दिए जाने की फाइल अब आगे सरक रही है।

सूत्रों के अनुसार, इंटेलिजेंस एजेंसियों और सुरक्षा बलों के बीच तालमेल को और ज्यादा बेहतर करने की दिशा में काम शुरू हो गया है। अभी तक ये एजेंसियां अपने स्तर पर जानकारी जुटाना और उसके बाद तय नियमों के तहत उसे आपस में साझा करना जैसे पैटर्न पर काम करती थीं। इनके लिए अब एक नया पैटर्न तैयार किया गया है।

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नए पैटर्न में पहली सूचना दो जगहों पर एक साथ जाएगी। सूचना के आदान-प्रदान में एजेंसी के साथ दूसरा पक्ष बॉर्डर गार्ड फोर्स को बनाया गया है। खासतौर पर, अरुणाचल प्रदेश में स्थित बीओपी का फासला कम कर दिया गया है। वहां पर अतिरिक्त जवानों की तैनाती की जा रही है।

लद्दाख सेक्टर में भी कई जगहों पर नई बीओपी खड़ी कर उनके बीच की दूरी घटाई जा रही है। आईटीबीपी की कई बीओपी के बीच 20 किलोमीटर से लेकर डेढ़ सौ किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी रहती है, ऐसे में बॉर्डर सुरक्षा थोड़ी मुश्किल हो जाती है।

इसके मद्देनजर अब इनके बीच की दूरी घटाई गई है। सर्दियों के लिए आईटीबीपी को विशेष तरह के स्लीपिंग बैग और ड्यूटी के दौरान सर्दी और तेज हवा से बचाने वाली ड्रेस मुहैया कराई गई है। आईटीबीपी में नौ हजार से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सभी जवानों को अब उक्त ड्रेस देने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

लद्दाख सेक्टर में भारतीय जवानों को लंबे समय के लिए तैयार करने का आदेश दिया गया है। वहां के मौसम में बेहतर मेडिकल रिपोर्ट वाले जवानों को विशेष गश्त का हिस्सा बनाया जाएगा। इस गश्त टीम में शामिल जवानों के पास कई तरह के उपकरण रहेंगे। अपग्रेड वाहन खरीदने की प्रक्रिया जो कि पहले से जारी है, उसे तेज कर दिया गया है।

हेलीकॉप्टर के लिए पांच साल से फाइल इधर-उधर हो रही है, लेकिन वह मुकाम तक नहीं पहुंच सकी। किराये पर लेने की बात भी सिरे नहीं चढ़ी। अब कुछ उम्मीद नजर आ रही है।


आईटीबीपी के पूर्व डीआईजी जेवीएस चौधरी का कहना है कि सर्दियों में हमारे जवान चीन के मुकाबले ज्यादा स्वस्थ रहते हैं। चीनी सैनिक लद्दाख में अधिक ऊंचाई वाले इलाकों की कड़कड़ाती ठंड सहने के आदी नहीं हैं।

चूंकि अब लद्दाख में तैनात जवानों को एक्सट्रीम कोल्ड वेदर पोर्टेबल केबिन मुहैया कराए जा रहे हैं, इससे उन्हें अपनी ड्यूटी में सहुलियत होगी। लद्दाख में चीन की तरफ वाला ज्यादातर हिस्सा समतल है और वहां बर्फबारी की समस्या भी नहीं है।



इसके बावजूद आईटीबीपी फ्रंट फुट पर रहते हुए अपनी ड्यूटी देती है।आईटीबीपी को मिल रही फॉर बाई फॉर गाड़ियां एवं एटीवी जवानों के लिए मल्टी प्लायर फोर्स का काम करेंगे।

 

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