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West Bengal: तृणमूल का अस्तित्व बना यक्ष प्रश्न, पार्टी की दुर्गति के खलनायक बने भावी युवराज अभिषेक बनर्जी

Sat, 13 Jun 2026 04:15 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Sat, 13 Jun 2026 04:15 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। पार्टी के भीतर नेतृत्व, उत्तराधिकार और संगठनात्मक दिशा को लेकर उठ रहे सवालों ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। वरिष्ठ नेताओं और असंतुष्ट गुटों की सक्रियता से आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।

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TMC s very survival become critical question heir apparent Abhishek Banerjee emerge as villain West Bengal
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस का भविष्य क्या होगा? पार्टी का ममता बनर्जी के हाथ से जाना तो तय है, मगर क्या अलग स्वरूप में पार्टी अपना अस्तित्व बचाए रख पाएगी? विधानसभा के बाद लोकसभा में पार्टी पर विरोधी गुट के दावे, अभिषेक बनर्जी के बहाने अब कभी ममता के खासमखास रहे वरिष्ठ नेताओं का नया मोर्चा और पार्टी के कांग्रेस में विलय की चर्चाओं के बीच सियासी गलियारे में पार्टी के अस्तित्व को ले कर एक साथ कई यक्ष प्रश्न खड़े हो गए हैं।
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सियासत में संघर्ष के कारण अलग और मुखर पहचान रखने वाली ममता की चुप्पी पार्टी के भविष्य को लेकर कयासों को मजबूत जमीनी आधार मुहैया करा रहा है। अभिषेक को लेकर ही ममता के करीबी नाराज हैं। अभिषेक के प्रति ममता के अंधा लगाव पर पहले सांसद, विधायक दबी जुबान चर्चा करते थे, अब यह सार्वजनिक हो गया है।
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अजीब सा विरोधाभाषी समीकरण
असली टीएमसी पर दावे के बीच एक अजीब सा विरोधाभाष भी बन रहा है जो भाजपा को असहज करेगा। मसलन विरोधी धड़ा राज्य में मुख्य विपक्षी दल होगा, जबकि केंद्र में इस धड़े ने मोदी सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है।
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विलय की चर्चाओं से बढ़ी हलचल
ममता के बेहद करीबी नेता ने कहा कि नतीजे आने के बाद सभी को उम्मीद थी कि वह पहले की तरह खुल कर मोर्चा संभालेंगी। इसकी जगह जब यह सूचना आई कि वह पार्टी का कांग्रेस में विलय के प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं तो बाकी बचे लोगों का भी आत्मविश्वास हिल गया। वह इसलिए कि पार्टी में बाकी बचे नेता कांग्रेस में विलय में अपना बेहतर भविष्य नहीं देख रहे। इन्हें लगता है कि विलय की स्थिति में सिर्फ ममता और अभिषेक का ही भविष्य बचेगा। फिर जिस प्रकार पहले 70 फीसदी मुस्लिम विधायकों के बाद पार्टी के चार में से तीन मुस्लिम सांसदों ने पार्टी से दूरी बनाई, उससे टीएमसी के मुस्लिम वोट बैंक के भी ढह जाने के संकेत गए।
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