टीएमसी नाम-चिह्न विवाद: कुणाल घोष ने चुनाव आयोग के फैसले पर उठाए सवाल, बोले- ये वोटरों को भ्रमित करने का खेल
तृणमूल कांग्रेस के नाम और पारंपरिक फूल और घास चुनाव चिह्न पर चुनाव आयोग की अंतरिम रोक के बाद पार्टी नेता कुणाल घोष ने इसे ममता बनर्जी की पार्टी को परेशान करने और वोटरों को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने भी आयोग के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उपचुनाव से पहले नाम और चिह्न को लेकर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ?
विस्तार
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद के बीच पार्टी नेता कुणाल घोष ने सोमवार को चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर रोक लगाने की कार्रवाई का मकसद ममता बनर्जी की टीएमसी को परेशान करना और मतदाताओं को भ्रमित करना है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होने हैं।
कुणाल घोष ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विधानसभा चुनाव के बाद से ही चुनाव आयोग चुनाव चिह्नों को लेकर अपने तरीके से काम कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी की तृणमूल को परेशान करने और वोटरों को भ्रमित करने का यह खेल चल रहा है। वहीं, ममता बनर्जी ने भी चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने आयोग के फैसले को मनमाना बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
चुनाव आयोग ने टीएमसी के नाम और चिह्न को लेकर क्या फैसला लिया?
चुनाव आयोग ने टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच संगठनात्मक विवाद के बीच दोनों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पारंपरिक ‘फूल और घास’ यानी ‘जोड़ा फूल’ चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोक दिया है। आयोग का यह अंतरिम इंतजाम आगामी उपचुनावों तक लागू रहेगा। इसके बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं, अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चुनाव चिह्न दिया गया है।
ये भी पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट: गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए तो दोबारा अरेस्ट करना मुश्किल, मजिस्ट्रेट की मंजूरी क्यों जरूरी?
कुणाल घोष ने चुनाव आयोग के फैसले पर क्या कहा?
कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग विधानसभा चुनाव के बाद से ही चुनाव चिह्नों को लेकर लगातार अपनी तरह से फैसले ले रहा है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई ममता बनर्जी की तृणमूल को परेशान करने और मतदाताओं को भ्रमित करने के उद्देश्य से की जा रही है। घोष ने इस फैसले को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया। हालांकि, ये आरोप कुणाल घोष की ओर से लगाए गए हैं। आयोग के फैसले के अनुसार दोनों गुटों के बीच संगठनात्मक विवाद का अंतिम समाधान होने तक अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में क्या मांग की है?
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अपनी याचिका में उन्होंने आयोग के फैसले को मनमाना बताया और तत्काल रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि नाम और चुनाव चिह्न को लेकर लिया गया फैसला उपचुनाव की तैयारियों को प्रभावित करता है। मामला टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। आयोग ने अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न की व्यवस्था की है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले विवाद क्यों अहम?
टीएमसी का नाम और चुनाव चिह्न विवाद नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से ठीक पहले सामने आया है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना की जाएगी। नंदीग्राम सीट मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के भबानीपुर सीट बरकरार रखने के बाद खाली हुई। उन्होंने 2026 के विधानसभा चुनाव में भबानीपुर सीट पर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी को हराया था और नंदीग्राम सीट छोड़ दी थी। वहीं, रेजीनगर सीट आम जनता उन्नयन पार्टी के संस्थापक हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई। कबीर ने नौदा सीट से भी जीत हासिल की थी।