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West Bengal: टीएमसी MP ने 'शांति कक्ष' खोलने के फैसले की आलोचना की, राज्यपाल बोले- मैं अपना कर्तव्य निभाऊंगा

Mon, 19 Jun 2023 03:44 PM IST
देव कश्यप एएनआई, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)।
एएनआई, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 19 Jun 2023 03:44 PM IST
सार

सांसद शांतनु सेन ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 341 प्रखंडों में बमुश्किल 3-4 प्रखंड ऐसे हैं जहां हिंसा की घटनाएं हुईं... चुनाव की घोषणा के बाद कानून व्यवस्था चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाती है; न तो राज्यपाल और न ही कोई और कानून से ऊपर है। ऐसे में अब राज्यपाल ऐसा कर पाएंगे या नहीं यह बड़ा सवाल है। 

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TMC MP Santanu Sen slams WB Governor CV Ananda Bose decision to open Peace Room in West Bengal
टीएमसी सांसद शांतनु सेन और पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस। - फोटो : ANI

विस्तार

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद शांतनु सेन ने रविवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस के पंचायत चुनाव से पहले बंगाल में 'शांति कक्ष' खोलने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि चुनाव की घोषणा के बाद कानून व्यवस्था की स्थिति चुनाव आयोग के अधीन आती है। साथ ही उन्होंने "शांति कक्ष" खोलने के फैसेल को लेकर राज्यपाल के अधिकार पर सवाल उठाया। शांतनु सेन की टिप्पणी का जवाब देते हुए राज्यपाल बोस ने कहा कि राजनीतिक दलों द्वारा बाहर जो बात की जाती है, वह उनका अधिकार है। मैं अपना कर्तव्य निभाऊंगा, जिस तरह से मुझे लगता है कि यह सही है। यह कानून के शासन के ढांचे के भीतर और बंगाल के लोगों के हितों को बनाए रखने के लिए भारत के संविधान के भीतर होगा।

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सांसद शांतनु सेन ने कहा कि पश्चिम बंगाल के 341 प्रखंडों में बमुश्किल 3-4 प्रखंड ऐसे हैं जहां हिंसा की घटनाएं हुईं... चुनाव की घोषणा के बाद कानून व्यवस्था चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाती है; न तो राज्यपाल और न ही कोई और कानून से ऊपर है। ऐसे में अब राज्यपाल ऐसा कर पाएंगे या नहीं यह बड़ा सवाल है। पश्चिम बंगाल में इस 'शांति कक्ष' की आवश्यकता नहीं है। वह चुनाव के समय ऐसा नहीं कर सकते। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि राज्यपाल ने भाजपा के प्रवक्ता और प्रतिनिधि के रूप में काम करना शुरू कर दिया है।
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उन्होंने आगे आरोप लगाया कि राज्यपाल ने भाजपा के प्रवक्ता और प्रतिनिधि के रूप में काम करना शुरू कर दिया है। टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने कहा, ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे इस राज्यपाल ने भी अपने पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ का अनुसरण करना शुरू कर दिया है और भाजपा के प्रवक्ता और प्रतिनिधि के रूप में कार्य करना शुरू कर दिया है।
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इससे पहले टीएमसी के महासचिव कुणाल घोष ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह भाजपा कैडर की तरह व्यवहार कर रहे हैं। कुणाल घोष ने शनिवार को राज्यपाल के विभिन्न स्थानों के दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा, हम उनके पद का सम्मान करते हैं। लेकिन वह भाजपा कैडर की तरह व्यवहार कर रहे हैं। इस गर्मी में वह काले रंग का हाई नेक कोट पहनकर घूम रहे हैं और अपनी तस्वीरें खिंचवा रहे हैं।

राज्यपाल ने क्या कहा
राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि तथ्य यह है कि डराने-धमकाने, हिंसा और धमकियों की घटनाएं कुछ इलाकों में हुई हैं। कुछ गुमराह व्यक्तियों द्वारा, कुछ गुमराह समूहों द्वारा। मैं फील्ड में गया था क्योंकि मैं पिछले 45 वर्षों से लोक प्रशासन में अपने विनम्र अनुभव से जानता हूं, किसी भी पदाधिकारी द्वारा दी गई कोई भी रिपोर्ट पूरी नहीं होगी। यह फिल्टर और पक्षपाती होगा। इसलिए मैं ग्राउंड जीरो पर जाकर लोगों से मिलना चाहता था, उनसे बात करना चाहता था, उनकी भावनाओं को समझना चाहता था और अपना आकलन खुद करना चाहता था। पंचायत चुनाव से पहले राजभवन द्वारा खोले गए 'शांति कक्ष' पर राज्यपाल बोस ने कहा कि हमें हिंसा, हत्या, डराने-धमकाने की कई शिकायतें मिली थीं। हम इसे सुलझा लेंगे और इसे त्वरित और तेज कार्रवाई के लिए उपयुक्त अधिकारियों के पास ले जाएंगे।

जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि नामांकन प्रक्रिया शांतिपूर्ण थी और अचनाक हिंसा भड़क उठी। इस पर राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि मुख्यमंत्री लोगों का निर्वाचित नेता होता है। मुख्यमंत्री की धारणा राज्यपाल से अलग हो सकती है। क्योंकि राजनीति का व्याकरण और शासन का व्याकरण अलग है। इसलिए, दोनों की राय अलग होना तय है। मैं संवैधानिक सहयोगी द्वारा किए गए आकलन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।

सत्तारूढ़ टीएमसी द्वारा राज्य में उनके मूवमेंट की आलोचना करने पर आनंद बोस ने कहा कि मुझे किसी से मेरे मूवमेंट पर प्रतिबंध की जानकारी नहीं मिली है। राजनीतिक दलों द्वारा बाहर जो बात की जाती है, वह उनका अधिकार है। मैं अपना कर्तव्य निभाऊंगा, जिस तरह से मुझे लगता है कि 'शांति कक्ष' खोलने का फैसला सही है। यह कानून के शासन के ढांचे के भीतर और बंगाल के लोगों के हितों को बनाए रखने के लिए भारत के संविधान के भीतर होगा।


टीएमसी सरकार के यह कहने पर कि वह राज्य में केंद्रीय बलों की तैनाती को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी, पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बोस ने कहा कि कोई भी पीड़ित पक्ष हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाता है, यह भारतीय व्यवस्था में स्वाभाविक है। सर्वोच्च न्यायालय किसी भी मुद्दे पर अंतिम निर्णय देता है। आइए हम धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें और देखें...।

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