फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   TMC MP Santanu Sen compared Homeopathic governing board with Gandhari in Rajya Sabha

टीएमसी सांसद ने स्वास्थ्य प्रणाली पर उठाए सवाल, होमियोपैथिक संचालक मंडल को बताया 'गांधारी'

Fri, 18 Sep 2020 09:06 PM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 18 Sep 2020 09:06 PM IST
विज्ञापन
TMC MP Santanu Sen compared Homeopathic governing board with Gandhari in Rajya Sabha
टीएमसी सांसद शांतनु सेन - फोटो : facebook.com/santanu.sen.94801

राज्यसभा में शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक सदस्य ने होमियोपैथी परिषद के सात-सदस्यीय संचालक मंडल की तुलना महाकाव्य महाभारत की पात्र 'गांधारी' से कर डाली। टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार ने नामित लोगों के ढांचे के पक्ष में हर जगह निर्वाचित निकायों को भंग कर दिया है।

विज्ञापन


टीएमसी के शांतनु सेन ने सरकार पर नीम हकीमी को बढ़ावा देने और देश की स्वास्थ्य प्रणाली के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि 'सात गांधारी' 'धृतराष्ट्र' से निर्देश ले रहे हैं जो कहीं और बैठे हैं। शांतनु सेन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष हैं।
विज्ञापन



उन्होंने कहा, 'इतिहास में हमने देखा है कि केवल एक धृतराष्ट्र और एक गांधारी थे जो गुरुकुल जीतने के लिए पर्याप्त थे। लेकिन आजकल हम इस सरकार में हर जगह यह देख रहे हैं, जो अलोकतांत्रिक है और निजीकरण का सहारा लिया जा रहा है, स्वास्थ्य प्रणाली को बिगाड़ा जा रहा है।'
विज्ञापन
विज्ञापन


सेन ने कहा, 'वो हर जगह सात गांधारियों को तैनात कर रहे हैं। मुझे यह नहीं कहना चाहिए कि हमारे स्वास्थ्य मंत्री, कोई धृतराष्ट्र हैं, जो हमारे ही पेशे से जुड़े हुए हैं। लेकिन, मुझे यकीन है कि धृतराष्ट्र कहीं और बैठे हैं और देश के संपूर्ण स्वास्थ्य को बर्बाद करने का संकेत दे रहे हैं।’

टीएमसी सांसद होमियोपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 पर एक साथ हुई चर्चा में भाग ले रहे थे। सेन ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का गठन किया गया है लेकिन यह काम नहीं कर रहा है।

सेन ने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) में केवल एक अध्यक्ष है और सात 'गंधारियों' की नियुक्ति की गई है और ये लोग व्यावहारिक रूप से वे कुछ नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'एनएमसी को राजपत्र (गजट) में अधिसूचित किए जाने के बाद भी ठीक से लागू क्यों नहीं किया गया है।'

उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि इस संचालक मंडल को कोई विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए क्योंकि व्यावहारिक रूप से वे कुछ भी नहीं कर रहे हैं। कृपया राजनीति का मुकाबला करें, धार्मिक कार्ड खेलें, महामारी के दौरान बोलें, हमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन कृपया देश के स्वास्थ्य के साथ न खेलें।'

सेन ने आरोप लगाया कि यह सरकार दवाओं की सभी प्राचीन प्रणालियों को बर्बाद करने और नीम हकीमी को प्रोत्साहन देने के मूड में है। उन्होंने कहा कि यह नई शिक्षा नीति, 2020 से स्पष्ट है, जहां इस बात का स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि वर्ष 2030 के बाद किसी एक खास चिकित्सा प्रणाली का कोई अस्तित्व नहीं होगा।


उन्होंने कहा, ‘हर जगह यह सरकार निर्वाचित निकाय को भंग करने के मूड में है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय होमियोपैथिक प्रणाली पश्चिम बंगाल में बहुत लोकप्रिय है, लेकिन राज्य से कोई प्रतिनिधि नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि होमियोपैथी परिषद के संचालन मंडल में कोई चुनाव या पारदर्शिता नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed