Bengal SIR: बंगाल में बुजुर्ग मतदाताओं के लिए घर पर सुनवाई की मांग, टीएमसी नेताओं ने CEO से की मुलाकात
टीएमसी का कहना है कि मतदाता शिविरों में होने वाली सुनवाई के दौरान बुजुर्ग और बीमार मतदाताओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी को देखते हुए पार्टी के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से 'मानवीय और समावेशी प्रक्रिया' अपनाने का आग्रह किया है।
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सिर्फ 85 नहीं, 60 वर्ष के लोगों को भी मिले लाभ- टीएमसी
प्रतिनिधिमंडल ने सीईओ को दिए पत्र में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी की हालिया अधिसूचना का स्वागत किया, जिसमें 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं और बीमार लोगों को फोन के जरिए संपर्क करने और घर पर सत्यापन की अनुमति दी गई है। हालांकि टीएमसी ने कहा कि यह सुविधा सिर्फ 85 साल से ऊपर तक सीमित न रहकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को मिलनी चाहिए। पत्र में कहा गया कि 60 वर्ष की उम्र को केंद्र और राज्य सरकारें वरिष्ठ नागरिक मानने का आधार मानती हैं, ऐसे में इससे कम सहानुभूति दिखाने का कोई तर्क नहीं है, खासकर उन लोगों के लिए जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं।
'सुनवाई के लिए बुलाए जा रहे करीब 1.36 करोड़ मतदाता'
टीएमसी ने एक और मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के बीच निर्वाचन आयोग ने 'तार्किक विसंगति' नाम से एक नई श्रेणी जोड़ दी है, जिसके तहत करीब 1.36 करोड़ मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि आयोग ने न तो ऐसे मतदाताओं की सूची जारी की है और न ही यह स्पष्ट किया है कि किन कारणों से उन्हें चिन्हित किया गया है। इसके अलावा, टीएमसी ने कहा कि कई जगहों पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए-2) को सुनवाई में शामिल होने से रोका जा रहा है, जबकि ऐसा करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है। पार्टी ने तर्क दिया कि जब एजेंट मतदान के दौरान मौजूद रह सकते हैं, तो मतदाता सूची में संशोधन या नाम हटाने की प्रक्रिया के समय उन्हें बाहर रखने का कोई कारण नहीं है।
सत्ताधारी दल ने और क्या रखी मांग?
टीएमसी ने मांग की कि 'तार्किक विसंगति' में चिन्हित सभी मतदाताओं की पूरी सूची सार्वजनिक की जाए, 60 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों को घर पर सुनवाई की सुविधा दी जाए और सभी राजनीतिक दलों के बीएलए-2 को सुनवाई में शामिल होने का अधिकार स्पष्ट रूप से सुनिश्चित किया जाए। इस पत्र पर टीएमसी सांसद पार्थ भौमिक, मंत्री पुलक रॉय, शशि पांजा, बीरबहा हांसदा और सांसद बापी हालदार के हस्ताक्षर हैं। पार्टी ने समयबद्ध जवाब की भी उम्मीद जताई।
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मंत्री शशि पंजा ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस
इस मुलाकात के बाद राज्य की मंत्री शशि पंजा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि बैठक में उप मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश भारती भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि 85 वर्ष से ऊपर और बीमार मतदाताओं के लिए घर पर सत्यापन की सुविधा देने के फैसले के लिए आयोग की सराहना की गई है। साथ ही 1.36 करोड़ मतदाताओं के नामों की सूची मांगी गई है, जिस पर आयोग ने विचार करने का आश्वासन दिया है। पंजा ने यह भी मांग की कि जो लोग राज्य से बाहर काम करते हैं, उन्हें वर्चुअल सुनवाई की सुविधा दी जाए। इसके अलावा, जिन लोगों के पास लंबे समय से वोटर कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाते हैं, लेकिन अन्य दस्तावेज नहीं हैं, उनके लिए भौतिक सत्यापन कराकर उन्हें मतदान अधिकार से वंचित न किया जाए।
#WATCH | Kolkata | West Bengal Minister Shashi Panja says, "We met the CO of West Bengal this evening and this evening, the Dy ECI Gyanesh Bharti was also present in the office... We first appreciated and expressed our appreciation for accepting our request to notify the electors… pic.twitter.com/2e6F0wXdgT
— ANI (@ANI) December 30, 2025
DEO को उप चुनाव आयुक्त ने दिए अहम निर्देश
वहीं अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए उप चुनाव आयुक्त ज्ञानेश भारती ने अधिकारियों को अहम निर्देश दिए हैं। उन्होंने कई जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) से कहा है कि जिन ऊंची इमारतों और गेटेड हाउसिंग सोसाइटी में 300 से ज्यादा लोग रहते हैं, वहां मतदान केंद्र बनाने का प्रस्ताव जल्द भेजा जाए। कोलकाता के दौरे पर आए भारती ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा की और चल रही एसआईआर सुनवाइयों की स्थिति भी जानी। उन्होंने कोलकाता, उत्तर व दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली और पूर्व व पश्चिम बर्धमान के अधिकारियों के साथ बैठक की। इससे पहले दिन में उन्होंने कोलकाता के बागुईआटी इलाके में एक सुनवाई केंद्र का दौरा कर वहां की कार्यवाही का जायजा लिया।
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