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ममता बनर्जी की पार्टी में सब ठीक?: टीएमसी में बढ़ी टूट की अटकलें, विरोध प्रदर्शन में पहुंचे सिर्फ 35 विधायक
Thu, 21 May 2026 04:40 AM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शिवम गर्ग
Updated Thu, 21 May 2026 04:40 AM IST
सार
बंगाल में चुनावी हार के बाद क्या टीएमसी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? विरोध प्रदर्शन में आधे से ज्यादा विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ संयोग है या संगठन के भीतर बढ़ते मतभेदों का बड़ा संकेत?
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TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह!
- फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में आधे से अधिक विधायकों के नहीं पहुंचने पर पार्टी में टूट की चर्चा तेज हो गई है। घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब एक दिन पहले ही पार्टी के अंदरूनी बैठकों में यह बात उठी थी कि तृणमूल को फिर से सड़क राजनीति की ओर लौटना चाहिए।
विरोध प्रदर्शन में कम मौजूदगी से बढ़ी चिंता
बुधवार को विधानसभा परिसर में अंबेडकर प्रतिमा के पास टीएमसी के कुछ विधायकों ने पोस्ट-पोल हिंसा और हॉकर्स हटाने के अभियानों के खिलाफ धरना दिया। यह हार के बाद विपक्ष में आने के बाद पार्टी का पहला बड़ा संगठित विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। इस प्रदर्शन में कुल 80 विधायकों में से करीब 35 ही कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
वरिष्ठ टीएमसी विधायक शोभनदेव ने अंदरूनी कलह की बातों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कई विधायक पोस्ट-पोल हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य में व्यस्त हैं, जबकि कुछ को कम समय में सूचना दी गई, जिससे वे शामिल नहीं हो सके।
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यह भी पढ़ें: बंगाल: 'अगर एक महिला सांसद सुरक्षित नहीं, तो यह कितना गंभीर मामला', BJP नेता की कथित धमकी पर बोलीं सायोनी घोष
सड़क राजनीति की वापसी की उठी मांग
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कालीघाट में हुई बैठक में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी मौजूद थे। इसमें कुछ विधायकों ने यह चिंता जताई कि पार्टी केवल रणनीतिक बैठकों से वापसी नहीं कर सकती और उसे फिर से जनता के बीच सक्रिय आंदोलन की जरूरत है। कई विधायकों ने यह भी कहा कि बंद कमरों में बैठकों से पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन वापस नहीं पा सकेगी। इस पृष्ठभूमि में बुधवार का विरोध प्रदर्शन केवल पोस्ट-पोल हिंसा या अतिक्रमण हटाने के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके राजनीतिक संकेत भी गहरे माने जा रहे हैं।
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विरोध प्रदर्शन में कम मौजूदगी से बढ़ी चिंता
बुधवार को विधानसभा परिसर में अंबेडकर प्रतिमा के पास टीएमसी के कुछ विधायकों ने पोस्ट-पोल हिंसा और हॉकर्स हटाने के अभियानों के खिलाफ धरना दिया। यह हार के बाद विपक्ष में आने के बाद पार्टी का पहला बड़ा संगठित विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। इस प्रदर्शन में कुल 80 विधायकों में से करीब 35 ही कार्यक्रम में पहुंचे, जिससे संगठन के भीतर संभावित मतभेदों को लेकर अटकलें तेज हो गईं।
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वरिष्ठ टीएमसी विधायक शोभनदेव ने अंदरूनी कलह की बातों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि कई विधायक पोस्ट-पोल हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य में व्यस्त हैं, जबकि कुछ को कम समय में सूचना दी गई, जिससे वे शामिल नहीं हो सके।
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सड़क राजनीति की वापसी की उठी मांग
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को कालीघाट में हुई बैठक में पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी मौजूद थे। इसमें कुछ विधायकों ने यह चिंता जताई कि पार्टी केवल रणनीतिक बैठकों से वापसी नहीं कर सकती और उसे फिर से जनता के बीच सक्रिय आंदोलन की जरूरत है। कई विधायकों ने यह भी कहा कि बंद कमरों में बैठकों से पार्टी अपनी राजनीतिक जमीन वापस नहीं पा सकेगी। इस पृष्ठभूमि में बुधवार का विरोध प्रदर्शन केवल पोस्ट-पोल हिंसा या अतिक्रमण हटाने के मुद्दे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके राजनीतिक संकेत भी गहरे माने जा रहे हैं।