फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   TMC Faces Fresh Turmoil After Poll Defeat, Questions Rise Over Unity in Parliamentary Wing

सुनामी में बदला तृणमूल का संकट: अब संसदीय दल में टूट तय, ममता की बैठक से सांसद-विधायकों की दूरी; उठे कई सवाल

Sat, 06 Jun 2026 05:13 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Sat, 06 Jun 2026 05:13 AM IST
सार

चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी संकट गहराता दिख रहा है। ममता बनर्जी की बैठक में सांसदों और विधायकों की कम उपस्थिति ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विज्ञापन
TMC Faces Fresh Turmoil After Poll Defeat, Questions Rise Over Unity in Parliamentary Wing
ममता बनर्जी के आवास पर बैठक में कई तृणमूल कांग्रेस नेता नहीं पहुंचे - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

चुनावी हार के बाद विधायक दल में टूट के बाद अब तृणमूल के संसदीय दल में टूट तय है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी चौतरफा संकट में हैं। शुक्रवार को उनकी ओर से बुलाई गई सांसदों-विधायकों की बैठक में तृणमूल के अस्तित्व को लेकर यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया। बैठक में पार्टी के 41 सांसदों में से महज छह पहुंचे। इतना ही नहीं, हालिया घटनाक्रम में विधायकों के विरोधी गुट से दूर रहने वाले 21 में से महज 8 विधायकों की हाजिरी लगी।

विज्ञापन


अहम तथ्य यह है कि बैठक में पहुंचने वाले मुस्लिम विधायकों में फिरहाद हकीम के रूप में इकलौते विधायक और संसदीय दल में सभी छह मुस्लिम सांसदों की अनुपस्थिति संकट का इशारा है। गौरतलब है कि ऋतब्रता बनर्जी के अगुवाई में जब विधायक दल में फूट पड़ी तो इसमें टीएमसी के जीते 31 मुस्लिम विधायकों में 17 विधायक शामिल थे। शुक्रवार की बैठक में बाकी बचे 14 मुस्लिम विधायकों में उपस्थित इकलौते फिरहाद हकीम बृहस्पतिवार को ही कोलकाता मेयर पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
विज्ञापन


भावी भविष्य तलाश रहे तृणमूल के नेता
चुनावी हार के बाद तृणमूल में जारी उथल पुथल दरअसल पार्टी नेताओं में भविष्य के लिए उपजा हुआ भय है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि तृणमूल से दूरी बनाने वाले सभी नेताओं की इच्छा पार्टी में शामिल होने की है। यह भविष्य के संकट के साथ भविष्य में जांच का सामना करने की बन रही स्थिति से उपजा भय है। इनमें से ज्यादातर नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े मामले हैं। इसलिए पार्टी नेतृत्व तत्काल निर्णय करने से बच रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


महुआ और सायानी भी बैठक से दूर रहीं
विधानसभा चुनाव प्रचार में पार्टी का चेहरा बनी सायानी घोष, मोहुआ मोइत्रा ने भी बैठक से दूरी बनाई। संकेत साफ हैं कि संसदीय दल का बड़ा हिस्सा भी विधायक दल की तरह विरोधी गुट से हाथ मिला लेगा। बैठक में सांसदों में अभिषेक बनर्जी, कल्याण बनर्जी, माला रॉय, सुदीप बंदोपाध्याय, डेरेक ओ ब्रायन, डोला सेना ही शामिल हुए।

शुभेंदु ने की भावी रणनीति पर चर्चा
टीएमसी में मची उथल पुथल और मंत्रियों के विभागों में बंटवारे के बाद राज्य के सीएम शुभेंदु अधिकारी शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर उन्होंने भावी रणनीति पर चर्चा की। दरअसल टीएमसी में टूट को ले कर भाजपा असमंजस में है। रणनीति यह है कि विरोधी गुट एनसीपी, शिवसेना की तरह पार्टी पर अधिकार जमाए। दरअसल पार्टी के एक धड़े को लगता है कि भाजपा में विलय या टीएमसी के अस्तित्व खत्म होने पर राज्य में वाम मोर्चा का उभार होगा जो भविष्य में पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।


अभिषेक पर ममता का भरोसा कायम, चंद्रिमा बने प्रदेश अध्यक्ष
ममता ने अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद पर बरकरार रखा है। पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए हैं। डोला सेन और डेरेक ओब्रायन को राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव बनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed