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सरकार की सलाह: वैक्सीन की शीशी खोलने से पहले लिखना होगा समय और दिन
Sat, 12 Jun 2021 06:11 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 12 Jun 2021 06:11 AM IST
सार
एक फीसदी या उससे कम वैक्सीन बर्बाद होने की धारणा गलत, केंद्र ने राज्यों को दी सलाह
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कोरोना वैक्सीन
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
वैक्सीन की बर्बादी को लेकर कुछ राज्यों का मानना है कि एक फीसदी या उससे कम खुराक बर्बाद हो सकती हैं। यह धारणा बिलकुल गलत है क्योंकि भारत के कुछ राज्य ऐसे भी हैं जहां एक भी खुराक बर्बाद नहीं हो रही है।
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शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से कहा है कि वैक्सीन की शीशी खोलने से पहले समय और दिन लिखना होगा। एक शीशी का इस्तेमाल चार घंटे के अंदर हो जाना चाहिए। केंद्र पर 100 लोगों का इंतजार किया जा सकता है। साथ ही दुर्लभ या ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण पर मौजूद कर्मचारी इसे हिसाब से खर्च कर सकते हैं।
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हर एक खुराक पर एक व्यक्ति का अधिकार है।
मंत्रालय ने कहा है कि वैक्सीन की जितनी भी शीशी खोली जा रही हैं, उसका इस्तेमाल चार घंटे के अंदर करें या फिर उसे अलग कर दिया जाए। एक फीसदी या उससे कम वैक्सीन की बर्बादी की उम्मीद रखना बिल्कुल गलत है।
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सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई है कि प्रत्येक टीकाकरण सत्र में कम से कम 100 लाभार्थियों को शामिल किया जाए। दूरस्थ और कम आबादी वाले क्षेत्रों के मामले में राज्य यह सुनिश्चित करते हुए कम संख्या में लाभार्थियों के लिए एक सत्र आयोजित कर सकता है। कोई भी खुराक बेकार नहीं जा सकती। हर एक खुराक पर एक व्यक्ति का अधिकार है।
एक सत्र की योजना तभी बनाई जा सकती है जब पर्याप्त लाभार्थी उपलब्ध हों। इसके अतिरिक्त सभी स्तरों पर टीकाकरण अभियान की नियमित समीक्षा की जा रही है जिसमें वैक्सीन की बर्बादी के विश्लेषण को शामिल करने के लिए उन क्षेत्रों की पहचान करने पर ध्यान केंद्रित किया जाए। जहां इस तरह की बर्बादी अधिक है वहां त्वरित सुधारात्मक उपाय किए जाएं।
संबंधित अधिकारियों और टीकाकरण केंद्र प्रबंधकों को भी निर्देश हैं कि वे टीकाकरण सत्रों की कुशलतापूर्वक योजना बनाएं ताकि वैक्सीन की बर्बादी दर को कम से कम रखा जा सके।
मंत्रालय ने कहा कि कई राज्यों ने इस तरह से टीकाकरण का आयोजन किया है जिसके चलते एक भी खुराक बेकार नहीं हुई। बल्कि वे शीशी से अधिक खुराक निकालने में सक्षम हुए और इस प्रकार एक नकारात्मक अपव्यय देखने को मिला है।