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चुनाव के अंत तक ईवीएम वीवीपैट की सुरक्षा होगी केंद्रीय सुरक्षा बलों के जिम्मे: निर्वाचन आयोग
भाषा
Updated Sun, 02 Sep 2018 01:45 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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चुनाव आयोग ने विधानसभा और लोकसभा के चुनाव में निर्वाचन प्रक्रिया पूरी होने तक ईवीएम और वीवीपैट मशीनों के भंडारण केन्द्रों की सुरक्षा में केवल सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती सुनिश्चित करने को कहा है।
आयोग ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को जारी निर्देश में स्पष्ट किया है कि मशीनों के भंडारण केन्द्र की सुरक्षा में कहीं भी निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड, यहां तक कि सिविल डिफेंस, गैर पुलिस सेवा के सुरक्षा कर्मियों और वॉलेंटियर आदि की तैनाती बिल्कुल नहीं की जाये। उल्लेखनीय है कि आयोग ने चुनाव से पहले मशीनों की प्रारंभिक चरण की जांच (एफएलसी) और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को लेकर गत वर्ष 30 अगस्त को जारी विस्तृत दिशानिर्देशों में इस स्पष्टीकरण को शामिल करते हुये गत 29 अगस्त को यह आदेश जारी किया है।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पिछले आदेश में मशीनों के भंडारण केन्द्र (वेयर हाउस) और स्ट्रॉंग रूम (जिस कमरे में मशीनें रखी गयी हैं) में राज्य सशस्त्र पुलिस बल के जवानों की हर पल निगरानी सुनिश्चित करने की बात कही गयी थी। लेकिन ताजा आदेश में निजी सुरक्षा एजेंसियों के सुरक्षागार्ड अथवा सिविल डिफेंस आदि के गार्ड की तैनाती नहीं करने का स्पष्टीकरण जोड़ कर आयोग ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी परिस्थिति में सिर्फ सशस्त्र पुलिस बल के जवान ही तैनात होंगे।
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उन्होंने बताया कि इससे पहले भी ईवीएम वीवीपैट की सुरक्षा में सशस्त्र पुलिस बलों को ही तैनात किया जाता रहा है। इस बारे में किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश नहीं रहे, इसके लिये ताजा निर्देश में यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। हालांकि इस आदेश में आयोग ने यह छूट जरूर दी है कि नियमित पुलिस बल के जवानों की तैनाती नहीं हो सकने जैसी अपवाद की स्थिति में होमगार्ड के जवानों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव तथा अगले साल लोकसभा के संभावित चुनाव के मद्देनजर आयोग ने निर्वाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने की कवायद शुरु कर दी है।
आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भंडारगृहों में वीवीपैट युक्त ईवीएम की 24 घंटे पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित करते हुये एफएलसी से लेकर चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक हर पल सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्डिंग करते हुये निगरानी करने के स्पष्ट निर्देश दिये हैं। पूरी प्रक्रिया में सशस्त्र पुलिस बल की कम से कम एक टुकड़ी से लेकर एक प्लाटून तक जवानों की तैनाती की जानी चाहिये।
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आयोग ने सभी राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को जारी निर्देश में स्पष्ट किया है कि मशीनों के भंडारण केन्द्र की सुरक्षा में कहीं भी निजी सुरक्षा एजेंसियों के गार्ड, यहां तक कि सिविल डिफेंस, गैर पुलिस सेवा के सुरक्षा कर्मियों और वॉलेंटियर आदि की तैनाती बिल्कुल नहीं की जाये। उल्लेखनीय है कि आयोग ने चुनाव से पहले मशीनों की प्रारंभिक चरण की जांच (एफएलसी) और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को लेकर गत वर्ष 30 अगस्त को जारी विस्तृत दिशानिर्देशों में इस स्पष्टीकरण को शामिल करते हुये गत 29 अगस्त को यह आदेश जारी किया है।
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आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पिछले आदेश में मशीनों के भंडारण केन्द्र (वेयर हाउस) और स्ट्रॉंग रूम (जिस कमरे में मशीनें रखी गयी हैं) में राज्य सशस्त्र पुलिस बल के जवानों की हर पल निगरानी सुनिश्चित करने की बात कही गयी थी। लेकिन ताजा आदेश में निजी सुरक्षा एजेंसियों के सुरक्षागार्ड अथवा सिविल डिफेंस आदि के गार्ड की तैनाती नहीं करने का स्पष्टीकरण जोड़ कर आयोग ने साफ कर दिया है कि इस काम में किसी भी परिस्थिति में सिर्फ सशस्त्र पुलिस बल के जवान ही तैनात होंगे।
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उन्होंने बताया कि इससे पहले भी ईवीएम वीवीपैट की सुरक्षा में सशस्त्र पुलिस बलों को ही तैनात किया जाता रहा है। इस बारे में किसी भी प्रकार के भ्रम की गुंजाइश नहीं रहे, इसके लिये ताजा निर्देश में यह स्पष्टीकरण जारी किया गया है। हालांकि इस आदेश में आयोग ने यह छूट जरूर दी है कि नियमित पुलिस बल के जवानों की तैनाती नहीं हो सकने जैसी अपवाद की स्थिति में होमगार्ड के जवानों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
इस साल के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव तथा अगले साल लोकसभा के संभावित चुनाव के मद्देनजर आयोग ने निर्वाचन प्रक्रिया को दुरुस्त करने की कवायद शुरु कर दी है।
आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भंडारगृहों में वीवीपैट युक्त ईवीएम की 24 घंटे पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित करते हुये एफएलसी से लेकर चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक हर पल सीसीटीवी कैमरों से रिकॉर्डिंग करते हुये निगरानी करने के स्पष्ट निर्देश दिये हैं। पूरी प्रक्रिया में सशस्त्र पुलिस बल की कम से कम एक टुकड़ी से लेकर एक प्लाटून तक जवानों की तैनाती की जानी चाहिये।