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टिक टॉक ऐप: मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुई याचिका
Mon, 08 Apr 2019 02:07 PM IST
अल्पना शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अल्पना शर्मा
Updated Mon, 08 Apr 2019 02:07 PM IST
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टिक टॉक ऐप का लोगो
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को टिक टॉक ऐप डाउनलोड करने पर प्रतिबंध लगाने के मद्रास उच्च न्यायालय के हाल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। मद्रास उच्च न्यायालय ने ऐप पर उपलब्ध अश्लील सामग्री को लेकर उसके डाउनलोड पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था।
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प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा कि सही समय पर याचिका की सुनवाई की जाएगी। मद्रास उच्च न्यायालय ने तीन अप्रैल को इस ऐप के जरिए अश्लील और अनुचित सामग्री परोसे कराए जाने का हवाला देते हुए केंद्र को ‘टिक टॉक’ ऐप पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था।
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अदालत ने उस जनहित याचिका के आधार पर अंतरिम आदेश जारी किया था, जिसमें इस आधार पर टिक टॉक पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी कि इसमें कथित रूप से ऐसी सामग्री है जो 'संस्कृति का अपमान तथा अश्लील सामग्री को बढ़ावा’ देती है।
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इसके अलावा अदालत का कहना है कि सरकार टिक टॉक के वीडियो को फेसबुक जैसे अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर होने से भी रोके। टिक टॉक के वीडियोज में अश्लील सामग्री को लेकर हमेशा से लोगों की शिकायत रही है। अदालत ने सरकार से पूछा था कि क्या वह ऐसा कोई कानून लाएगी जिससे बच्चों को साइबर क्राइम बचाया जा सके और उन्हें इससे दूर रखा जा सके।
क्या है टिक टॉक ऐप
टिक टॉक' एक सोशल मीडिया ऐप्लिकेशन है जिसके जरिए स्मार्टफोन यूजर छोटे-छोटे वीडियो (15 सेकेंड तक के) बना और शेयर कर सकते हैं। 'बाइट डान्स' इसके स्वामित्व वाली कंपनी है जिसने चीन में सितंबर, 2016 में 'टिक टॉक' लांच किया था। साल 2018 में 'टिक-टॉक' की लोकप्रियता बहुत तेजी से बढ़ी और अक्टूबर 2018 में ये अमेरिका में सबसे ज्यादा डाउनलोड किया जाने वाला ऐप बन गया।अमेरिका में टिक टॉक पर 40 करोड़ का जुर्माना भी लग चुका है। गूगल प्ले स्टोर पर टिक टॉक का परिचय 'Short videos for you' (आपके लिए छोटे वीडियो) कहकर दिया गया है। प्लेस्टोर पर टिक टॉक को परिभाषित कहते हुए लिखा गया है- टिक-टॉक मोबाइल से छोटे-छोटे वीडियो बनाने का कोई साधारण जरिया नहीं है। इसमें कोई बनावटीपन नहीं है, ये रियल है और इसकी कोई सीमाएं नहीं हैं।
An appeal has been filed in the Supreme Court against Madras High Court order banning TikTok app. Supreme Court says, "it will look into it." pic.twitter.com/a8qdwJF1gx
— ANI (@ANI) April 8, 2019