फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   tibet government in exile holding talks with china appeal to india

China: चीन के साथ पर्दे के पीछे बात कर रही तिब्बत की निर्वासित सरकार, मुद्दे पर भारत से की मुखर होने की मांग

Thu, 25 Apr 2024 12:10 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: नितिन गौतम Updated Thu, 25 Apr 2024 12:10 PM IST
सार

भारत के धर्मशाला में चल रही तिब्बत की निर्वासित सरकार सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) के प्रधानमंत्री पेंपा शेरिंग ने चीन के साथ अनौपचारिक बातचीत चलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उनके वार्ताकार चीन के लोगों से बात कर रहे हैं, लेकिन अभी इस बातचीत से कोई नतीजा निकलने की उम्मीद करना गलत है।

विज्ञापन
tibet government in exile holding talks with china appeal to india
दलाई लामा - फोटो : पीटीआई

विस्तार

तिब्बत की निर्वासित सरकार पर्दे के पीछे चीन की सरकार से बात कर रही है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि दोनों ही पक्ष लंबे समय से अटकी पड़ी द्विपक्षीय बातचीत को फिर से शुरू करने के इच्छुक हैं। तिब्बत के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा और चीन की सरकार के बीच पहले भी बातचीत हो चुकी है, लेकिन तिब्बत में चीन विरोधी प्रदर्शनों और चीन की तिब्बत के प्रति कट्टर सोच के चलते वह बातचीत बेनतीजा समाप्त हो गई थी। उसके बाद से दोनों पक्षों में कोई बातचीत नहीं हुई थी। 
विज्ञापन


पर्दे के पीछे चल रही दोनों पक्षों की बातचीत
भारत के धर्मशाला में चल रही तिब्बत की निर्वासित सरकार सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (सीटीए) के प्रधानमंत्री पेंपा शेरिंग ने चीन के साथ अनौपचारिक बातचीत चलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि उनके वार्ताकार चीन के लोगों से बात कर रहे हैं, लेकिन अभी इस बातचीत से कोई नतीजा निकलने की उम्मीद करना गलत है। शेरिंग ने बताया कि 'हम बीते साल से पर्दे के पीछे बातचीत कर रहे हैं, लेकिन अभी इससे उम्मीद करना बेमानी है। यह एक लंबी प्रक्रिया है। मेरे वार्ताकार चीन के लोगों से बात कर रहे हैं।'
विज्ञापन


भारत से की अपील
सीटीए के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने बताया कि चीन के साथ बातचीत ही तिब्बत मुद्दे का समाधान कर सकती है। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच सीमा पर जो तनाव चल रहा है, उससे तिब्बत का मुद्दा भारत में फिर से चर्चा में आ गया है। तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री शेरिंग ने कहा कि 'भारत की विदेश नीति अब काफी प्रभावी हो गई है। दुनियाभर में भारत का प्रभाव भी बढ़ा है। ऐसे में हम चाहते हैं कि भारत, तिब्बत के मुद्दे को लेकर ज्यादा मुखर होकर बात करे।'
विज्ञापन
विज्ञापन


दलाई लामा और चीन सरकार के भी हो चुकी है बातचीत
गौरतलब है कि साल 2002-2010 के बीच भी तिब्बत के सर्वोच्च धर्मगुरु दलाई लामा के प्रतिनिधियों और चीन की सरकार के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई थी। यह बातचीत नौ दौर तक चली थी, लेकिन इसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका। उसके बाद से दोनों पक्षों में बातचीत पूरी तरह से बंद थी। तिब्बत में साल 1959 में चीन के खिलाफ हुए विद्रोह के बाद 14वें दलाई लामा भागकर भारत आ गए थे, जहां धर्मशाला में उन्होंने तिब्बत की निर्वासित सरकार का गठन किया। दलाई लामा का आरोप है कि तिब्बत में चीन की सेना प्रताड़ना कर रही है। वहीं चीन का आरोप है कि दलाई लामा अलगाववादी गतिविधियों में लिप्त हैं। हालांकि अब दलाई लामा ही साफ कर चुके हैं कि वह चीन से पूरी तरह से आजादी नहीं मांग रहे हैं और सिर्फ चाहते हैं कि उनकी सरकार को तिब्बत में स्वायतत्ता मिले। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed