मगर पकड़ने से झाड़ू लगाने तक, मोदी को लेकर उड़ चुकी हैं ये अफवाहें
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसी शख्सियत हो और उस शख्सियत पर कोई अफवाहें न उड़ें, ऐसा कैसे हो सकता है। एक 'चाय बेचने वाले' से भारत के प्रधानमंत्री तक का सफर तय करने वाले मोदी के जिंदगी के हर दौर से जुड़ी अफवाहें उड़ीं। चाहें नन्हे नरेंद्र हों, या फिर किशोर नरेंद्र अफवाहों से उनता हमेशा नाता रहा।
बात उस समय की है जब मोदी छोटे थे। गुजरात में शर्मिष्ठा झील है कहा जाता है यहां अक्सर नरेन्द्र मोदी बचपन में खेलने के लिए जाया करते थे। उस झील में ढेर सारे मगरमच्छ रहते थे। एक दिन वह झील में घुस गए और वहां से एक मगरमच्छा का बच्चा पकड़कर घर ले आए। जब मोदी की मां को इसका पता चला तो उन्होंने नन्हे मोदी से उसे वापस तालाब में छेड़ने के लिए कहा।
जब मोदी नहां माने तो मां ने समझाया कि जैसे तुम्हें मुझसे कोई अलग करता है तो मुझे दुख होता है वैसे ही इस मगर की मां को भी दुख हो रहा होगा। मां की बात मानकर उन्होंने मगरमच्छ के बच्चे को झील में वापस छोड़ दिया। हालांकि इस घटना में कितनी सच्चाई है इस बात की पुष्टि तो हम भी नहीं कर सकते।
आपको बता दें 'नरेंद्र मोदी : द गेम चेंजर' नाम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित एक किताब पत्रकार सुदेश के. वर्मा ने लिखी है। इस किताब में भी उनके जीवन से जुड़े कई अनजाने पहलुओं को बताया गया है। इस जीवनी के मुताबिक एक बार तालाब में तैरते वक्त एक मगरमच्छ ने उन पर हमला कर दिया था, जिसके कारण उनके पैर में नौ टांके लगाने पड़े थे।
आखिर क्या है मोदी के संन्यासी बनने की सच्चाई?
मोदी की ड्रेसिंग सेंस के साथ-साथ उनका दाढ़ी के ग्रूमिंग का स्टाइल भी खूब चर्चाओं में है। लेकिन एक बात गौर करने वाली है कि उन्होंने अपने दाढ़ी से स्टाइल में कभी बदलाव नहीं किया। इसके पीछे भी एक घटना है। जीवनी के मुताबिक राजकोट के रामकृष्ण मिशन के एक स्वामी ने उन्हें इस तरह से दाढ़ी रखने की सलाह दी थी। मोदी ने ये सलाह मानी और आज तक दाढ़ी के स्टाइल में बदलाव नहीं किया।
किताब में ये भी जिक्र है कि जब मोदी 14 साल के थे तो एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी करते हुए उनके बेहतरीन काम करने की बात कही थी। मोदी के मित्र महेंद्रभाई के मुताबिक, ज्योतिषी ने कहा था, "यह लड़का या तो को बड़ा संत बनेगा या फिर कोई बड़ा नेता। पूरी दुनिया उसे पहचानेगी।
युवावस्था में मोदी एक दिन एक संन्यासी से मिले। 18 साल की उम्र में संन्यासी जीवन से प्रभावित होकर मोदी संन्यास लेने के लिए हिमालय चले गये थे। मोदी ने सार्वजानिक मंचो पर यह बात कई बार स्वीकार की है। हिमालय में कई महीनों तक साधुओं के साथ रहे के लगभग दो साल बाद जब वह हिमालय से वापस लौटे तब उन्होंने संन्यासी जीवन त्यागने का फैसला किया।
लेकिन इस घटना से जुड़ी अफवाह भी खूब उड़ी। सोशल मीडिया पर ये अफवाह खूब वायरल हुआ कि मोदी ने संन्यासी जीवन अपनाने के लिए घर नहीं छोड़ा था बल्कि चोरी करने की वजह से उन्हें घर से निकाल दिया गया था। हालांकि ये कोरा अफवाह ही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाई प्रहलाद मोदी ने पुष्टि की है कि इस बात में बिलकुल भी सच्चाई नहीं है।
नरेंद्र मोदी के जीवन से जड़ी ये अफवाह भी खूब उड़ी कि वह दूसरों से घरों में झाड़ू पोंछा करने का काम करते थे। लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं था। नरेन्द्र मोदी जब अहमदाबाद आरएसएस संघ मुख्यालय में रहते तो वहां सारे काम जैसे साफ-सफाई, चाय बनाना, और बुर्जुग नेताओं के कपड़े धोने जैसे काम करते थे।