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Bangladesh Tension: 'बांग्लादेश में भारतीय होने की वजह से मुझे पीटा गया', कोलकाता के युवक ने सुनाई आपबीती
Mon, 02 Dec 2024 08:12 AM IST
अभिषेक दीक्षित
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Mon, 02 Dec 2024 08:12 AM IST
सार
दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजधानी के उत्तरी छोर पर स्थित बेलघरिया क्षेत्र के रहने वाले 22 साल के सायन घोष 23 नवंबर को बांग्लादेश गए थे। वे वहां एक मित्र के यहां रुके थे। वहां परिवार ने उन्हें अपने बेटे की तरह रखा।
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Bangladesh Row
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमलों की खबरे राज आ रही हैं। इस बीच कोलकाता के एक शख्स ने दावा किया है कि ढाका में कुछ अनजान लोगों ने उसे सिर्फ इस वजह से जमकर पीटा, क्योंकि वह भारतीय है। शख्स ने अपने भारतीय हिंदू होने की वजह से ढाका में मिली प्रताड़ना की दर्दभरी कहानी जब साझा की, तो सुनने वालों की आंखों में आंसू आ गए। दरअसल, पश्चिम बंगाल की राजधानी के उत्तरी छोर पर स्थित बेलघरिया क्षेत्र के रहने वाले 22 साल के सायन घोष 23 नवंबर को बांग्लादेश गए थे। वे वहां एक मित्र के यहां रुके थे। वहां परिवार ने उन्हें अपने बेटे की तरह रखा।
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उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, '26 नवंबर की देर शाम जब मैं और मेरा दोस्त टहलने निकले तो चार-पांच युवकों के एक समूह ने हमें घेर लिया। यह वाकया मेरे दोस्त के घर से करीब 70 मीटर की दूरी पर ही हुआ। उन्होंने मुझसे मेरी पहचान पूछी। जब मैंने उन्हें बताया कि मैं भारत से हूं। हिंदू हूं तो उन्होंने मुझे लात-घूंसे मारने शुरू कर दिए। उन्होंने मेरे दोस्त को भी नहीं छोड़ा, उस पर भी हमला कर दिया। वह तो सिर्फ मुझे बचाने की कोशिश कर रहा था।'
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शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया
उन्होंने कहा कि उन्होंने चाकू की नोंक पर मेरा मोबाइल फोन और बटुआ भी छीन लिया। कोई भी राहगीर हमारी मदद के लिए आगे नहीं आया। आस-पास कोई पुलिसकर्मी भी नहीं थे। घटना के बाद हम श्यामपुर पुलिस थाने गए, लेकिन उन्होंने कोई शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया। वे बार-बार मुझसे पूछते रहे कि मैं बांग्लादेश क्यों आया। जब मैंने उन्हें अपना पासपोर्ट और वीजा दिखाया। अपने दोस्त और उसके परिवार के सदस्यों से बात करवाई तब जाकर उन्होंने मेरी बात सुनी और अस्पताल में मेरा इलाज कराया।
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इलाज करने से भी मना कर दिया गया
घोष ने दावा किया कि दो निजी अस्पतालों में उनका इलाज करने से भी मना कर दिया गया। थकहार कर अंत में उन्हें ढाका मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल जाना पड़ा। घटना के तीन घंटे बाद मुझे वहां उपचार मिला। मेरे माथे और सिर पर कई टांके लगे और मेरे मुंह पर भी चोट आई।