बाप-बेटी ने बचाई हजारों लोगों की जान, वीरेंद्र सहवाग हुए कायल
त्रिपुरा के आदिवासी स्पप्न देबबर्मा और उनकी बेटी सोमती ने बीती 15 जून को अपनी सूझबूझ और बहादुरी से हजारों रेल यात्रियों की जान बचाई है। त्रिपुरा के धलाई में रहने वाले स्वपन देबबर्मा ने बताया कि उस दिन घर पर चावल नहीं थे और बारिश हो रही थी। हमने कटहल खाया और फिर मैं बेटी सोमती के साथ मछली की खोज में चल दिया। हम जब रेल पटरी के पास पहुंचे तो हमने देखा कि बड़े भूस्खलन से पटरी को नुकसान पहुंचा है। हमने सोचा कि अगर ट्रेन को नहीं रोका तो कई लोगों की जान चली जाएगी। हम दो घंटे तक वहीं बैठे रहे। जैसे ही ट्रेन आई मैंने अपनी शर्ट उतारकर लहराना शुरू कर दिया। ट्रेन नहीं रुकी तो मैं पटरी के बीच खड़ा हो गया और बेटी को भी खींच लिया। ड्राइवर ने बताया कि बाप-बेटी को रेलवे ट्रैक पर देखकर मैंने कुछ मीटर पहले ही गाड़ी रोक दी। हमने सोचा था कि दो लोगों की जान जाएगी लेकिन सैकड़ों की बच जाएगी।
इन दिनों सोशल मीडिया पर इस घटना से जुड़ा वीडियो भी वायरल हो गया है। वीडियो ने स्वप्न देबबर्मा और उनकी बेटी को लोकप्रिय बना दिया है। इस घटना के बाद से उनके लिए कई पुरस्कारों की घोषणा हुई है। स्वपन देबबर्मा का कहना है कि मेरे पास मनरेगा जॉब कार्ड नहीं है। बैंक खाता नहीं है हालांकि मैंने काफी कोशिश की, लेकिन जब मैंने ट्रेन को बचाया तो मुझे इनाम मिले। लोगों ने बैंक एकाउंट खोलने में मेरी मदद की। स्वपन देबबर्मा और उनकी बेटी की बहादुरी को लेकर खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग ने भी ट्वीट कर कहा है कि त्रिपुरा में लोग उन्हें सुपरमैन से लेकर भगवान का अवतार तक बता रहे हैं।
धलाई के स्थानीय निवासी रतन साहा ने बताया कि उस दिन स्वपन देबबर्मा भगवान के रूप में आए और कई लोगों की जिंदगी बचाई। वहीं त्रिपुरा के स्वास्थ्य मंत्री सुदीप रॉय बर्मन ने कहा कि मैंने विधानसभा में एक प्रस्ताव पास करा कर गृह मंत्रालय को भेजा है और उनके लिए बहादुरी के पुरस्कार की मांग की है।
Not all superheroes have a cape, some have a towel. Meet Swapan Debbarma who saved a train accident btwn
Ambassa & Agartala.He spotted a derailed track & jumped onto d track,waved his towel,stopped the Train from an accident & saved thousands of lives.Such heroes must be rewarded pic.twitter.com/Q6wFzFvZC3— Virender Sehwag (@virendersehwag) June 19, 2018