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दुर्लभ संयोग: गुरु पूर्णिमा और चंद्र ग्रहण आज एक साथ, जानिए बारिश हुई तो क्या होगा दुष्प्रभाव

Fri, 27 Jul 2018 10:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 27 Jul 2018 10:01 AM IST
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This time guru purnima and lunar eclipse will be together
चंद्र ग्रहण
27 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर सदी का सबसे लंबा और चंद्र ग्रहण लगेगा। इस चंद्र ग्रहण की अवधि 3 घंटे 55 मिनट की होगी। ग्रहण रात 11 बजकर 54 मिनट से शुरू हो जाएगा जो 28 जुलाई की सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर समाप्त होगा। इससे पहले 26 जुलाई, 1953 को लंबी अवधि वाला चंद्र ग्रहण लगा था। यह चंद्र ग्रहण भारत समेत म्यांमार, चीन, ताईवान, अमेरिका आदि कई देशों में दिखाई देगा। इस दौरान चांद का रंग पूरी तरह से लाल होगा।  
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बता दें कि यह इस साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा। इससे पहले 31 जनवरी को भी माघी पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण लगा था। तब इसकी अवधि 3 घंटे 24 मिनट थी। इस ग्रहण का सूतक दोपहर 2 बजकर 54 मिनट पर शुरू हो जाएगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। अगले दिन मंदिरों शुद्धि के बाद ही पूजा-पाठ शुरू होगा। 
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चंद्र ग्रहण के दौरान क्या करें, क्या ना करें

सूतक लगने से ग्रहण के समाप्त होने तक घर के मंदिर का द्वार बंद रखें। भगवान की मूर्तियों को भी स्पर्श न करें। गर्भवती महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय घर से बाहर न निकलें और न ही सूतक से लेकर ग्रहण अवधि के बीच भोजन करें। सूतक लगने से पहले ही खाना बना लें, क्योंकि इस दौरान खाना बनाना अशुभ होता है। ग्रहण खत्म होने के बाद गंगाजल से पूरे घर और पूजा घर की शुद्धि करें और उसके बाद स्नान करके ही भोजन करें।
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बारिश के मौसम में भी पड़ेगा ग्रहण का प्रभाव? 

वैसे तो आमतौर पर माना जाता है कि ग्रहण के की दुष्प्रभाव होते हैं। लेकिन बारिश के मौसम को देखते हुए ज्योतिषियों का मानना है कि चंद्र ग्रहण के दौरान या कुछ देर के बाद अगर हल्की भी बारिश हो जाए तो ग्रहण का दुष्प्रभाव खत्म हो जाएगा। 

17 साल बाद ऐसा दुर्लभ संयोग

17 साल के बाद ऐसा दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा कि गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण हो। इससे पहले 9 जनवरी, 2001 को गुरु पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण लगा था। अतीत की अगर बात करें तो गुरु पूर्णिमा पर वर्ष 1953 से अब तक चार बार चंद्र ग्रहण लग चुका है और यह पांचवां चंद्र ग्रहण होगा। गुरु पूर्णिमा पर 26 जुलाई 1953 को चंद्र ग्रहण लगा था। उसके बाद 15 जुलाई 1954, 16 जुलाई 2000 और अंतिम बार 9 जनवरी 2001 को चंद्र ग्रहण लगा था। भविष्य की अगर बात करें तो अगले साल 16 जुलाई को भी ऐसा ही दुर्लभ संयोग देखने को मिलेगा। 

राशियों पर ग्रहण का क्या होगा असर 

राशियों पर भी इस चंद्र ग्रहण का प्रभाव और दुष्प्रभाव देखने को मिलेगा। वृष राशि वाले इस दौरान चिंता से ग्रस्त रहेंगे। कर्क राशि वालों को भी कष्ट होने की संभावना है। कन्या राशि वालों को भय होगा, मिथुन राशि वालों को क्षति हो सकती है, धनु राशि वाले तनाव से ग्रस्त रहेंगे, मकर राशि वालों को मानसिक कष्ट हो सकता है, जबकि कुंभ राशि वालों पर इसका मिश्रित प्रभाव देखने को मिलेगा। इसके अलावा मेष राशि, सिंह राशि और मीन राशि वालों को इसके कारण लाभ हो सकता है। वहीं, वृश्चिक राशि वालों को भी सुख की प्राप्ति होगी। 
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