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Hindi News ›   India News ›   UPSC CSE 2025: Supreme Court to Set Up Special Bench Over OBC Creamy Layer Criteria for 958 Candidates

सुप्रीम कोर्ट: ओबीसी क्रीमी लेयर पर अदालत बनाएगी स्पेशल बेंच, 958 अभ्यर्थियों का सर्विस आवंटन क्यों अटका?

Tue, 25 Aug 2026 04:51 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Tue, 25 Aug 2026 04:51 PM IST
सार

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों के सर्विस आवंटन से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र ने अदालत से ओबीसी क्रीमी लेयर पर 11 मार्च के फैसले को सीएसई-2025 में लागू करने को लेकर स्थिति साफ करने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट विशेष पीठ बनाने पर सहमत हुआ है। पुराने नियम से आवंटन की अनुमति क्यों मांग रही सरकार? उम्मीदवारों पर क्या असर पड़ सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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UPSC CSE 2025: Supreme Court to Set Up Special Bench Over OBC Creamy Layer Criteria for 958 Candidates
958 उम्मीदवारों के सर्विस आवंटन पर क्यों फंसा मामला? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में सफल 958 उम्मीदवारों के IAS, IPS, IFS और दूसरी केंद्रीय सेवाओं में आवंटन को लेकर अहम मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने अदालत से मांग की है कि OBC क्रीमी लेयर पर 11 मार्च 2026 को आए फैसले को CSE-2025 में लागू करने की स्थिति स्पष्ट की जाए। केंद्र चाहता है कि इन उम्मीदवारों का सर्विस आवंटन उस व्यवस्था के आधार पर पूरा करने दिया जाए, जो सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के फैसले से पहले लागू थी।

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विशेष पीठ बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?

मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के सामने केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामला रखा। उन्होंने बताया कि विभाग ने पहले निपटाए जा चुके मामले में तत्काल निर्देश के लिए आवेदन दिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय हेगड़े ने कहा कि 11 मार्च का आदेश न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने दिया था। दोनों न्यायाधीश अब अलग-अलग संयोजन वाली पीठों में बैठते हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि विशेष पीठ बनानी होगी और वह न्यायाधीशों से बात करेंगे।

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11 मार्च के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

यह विवाद ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में 11 मार्च को दिए गए फैसले से पैदा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 14 अक्तूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र, OBC क्रीमी लेयर की पहचान से जुड़े 8 सितंबर 1993 के कार्यालय ज्ञापन पर हावी नहीं हो सकता। अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या निजी क्षेत्र में काम करने वाले माता-पिता की केवल आय या वेतन को क्रीमी लेयर तय करने का अकेला आधार नहीं बनाया जा सकता। माता-पिता के पद की स्थिति और श्रेणी के साथ तय आय और संपत्ति के मानकों पर भी विचार करना होगा।

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सरकार पुराने नियम से सर्विस आवंटन क्यों चाहती है?

केंद्र का कहना है कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बंधा है, लेकिन इसे CSE-2025 पर सीधे लागू करने से एक जैसी स्थिति वाले उम्मीदवारों के बीच असमानता पैदा हो सकती है। सरकार ने इसके पीछे प्रमुख तथ्य बताए हैं।

  • CSE-2025 की अधिसूचना 22 जनवरी 2025 को जारी हुई थी।
  • प्रारंभिक परीक्षा 25 मई 2025 को हुई थी।
  • मुख्य परीक्षा 22 से 31 अगस्त के बीच आयोजित हुई।
  • UPSC ने 6 मार्च 2026 को अंतिम परिणाम घोषित किया।
  • कुल 958 उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई।
  • सुप्रीम कोर्ट का संबंधित फैसला इसके पांच दिन बाद 11 मार्च को आया।

 

OBC उम्मीदवारों के बीच असमानता का सवाल कैसे उठा?

सरकार के अनुसार, परीक्षा के समय लागू व्यवस्था के कारण PSU या निजी क्षेत्र में कार्यरत ऐसे माता-पिता के कुछ बच्चों ने खुद को OBC गैर-क्रीमी लेयर लाभ के लिए अयोग्य माना होगा, जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक थी। इनमें कुछ उम्मीदवार सामान्य वर्ग से परीक्षा में शामिल हुए होंगे और कुछ ने OBC श्रेणी में आवेदन ही नहीं किया होगा। ऐसे उम्मीदवारों ने तीन साल की ऊपरी आयु सीमा में छूट और अतिरिक्त प्रयास जैसे लाभ भी नहीं लिए होंगे। दूसरी तरफ OBC श्रेणी में आवेदन करने वाले कुछ उम्मीदवारों को 11 मार्च के फैसले के आधार पर दोबारा आकलन होने पर लाभ मिल सकता है। केंद्र का कहना है कि इससे समान परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों के साथ अलग व्यवहार होने की स्थिति बन सकती है।

958 उम्मीदवारों के सर्विस आवंटन में देरी से क्या होगा?

केंद्र ने कहा है कि क्रीमी लेयर की स्थिति दोबारा तय करने पर कुछ उम्मीदवारों के माता-पिता के रोजगार और पद की नए सिरे से जांच करनी होगी। जिन्होंने OBC श्रेणी में आवेदन ही नहीं किया, उन्हें इसी प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश हुई तो परीक्षा प्रक्रिया को दोबारा खोलने जैसी स्थिति बन सकती है। सरकार ने लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, मसूरी में CSE-2025 बैच के प्रस्तावित फाउंडेशन कोर्स का भी हवाला दिया है। सर्विस आवंटन में देरी होने पर प्रशिक्षण, IAS और IPS कैडर आवंटन, वरिष्ठता, वेतन निर्धारण और दूसरी सेवाओं के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रभावित हो सकते हैं।

अब केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से क्या राहत मांगी है?

केंद्र ने प्रॉस्पेक्टिव ओवररूलिंग के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा है कि CSE-2025 की चयन प्रक्रिया 11 मार्च के फैसले से पहले पूरी हो चुकी थी और उम्मीदवारों ने उस समय लागू कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार फैसले लिए थे। सरकार ने साफ किया है कि उसकी मांग सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कमजोर करने या उससे बचने के लिए नहीं है। केंद्र केवल CSE-2025 के मामले में इसे लागू करने का तरीका स्पष्ट चाहता है। उसने अदालत से 11 मार्च से पहले लागू OBC क्रीमी लेयर व्यवस्था के आधार पर 958 चयनित उम्मीदवारों का सर्विस आवंटन पूरा करने की अनुमति मांगी है।

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