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मेरा यही जुर्म है कि मैं की आदिवासियों के हक की बात करती हूं : वर्षा डोंगरे

Fri, 26 May 2017 04:42 PM IST
amarujala.com-Presented by- आनंद
amarujala.com-Presented by- आनंद Updated Fri, 26 May 2017 04:42 PM IST
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This is my crime that I speak of the rights of tribals: Varsha Dongre
छत्तीसगढ़ की सेंट्रल जेल से निलंबित की गई डिप्टी जेलर वर्षा डोंगरे  ने कहा कि मेरी बस इतनी गलती है कि मैं आदिवासियों की हक की बात करती हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते हमारी जिम्मेदारी केवल जनता की सेवा करना ही नहीं अपने संवैधानिक अधिकारों के रक्षा करना भी है।
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अंग्रेजी अखबार इंडिया एक्सप्रेस को दिये इंटरव्यू में डोंगरे ने कहा कि हमे संविधान द्वारा दिये गये मूल अधिकरों की रक्षा करनी चाहिए। बीते दिनों फेसबुक पर डोंगरे ने बस्तर में सरकार की नीतियों की आलोचना की और इस बात दावा किया कि उनके पास एक आदिवासी लड़की को थर्ड डिग्री यातना दिये जाने के भी सबूत है।
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सुकमा हमले के बाद डोंगरे ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिये सरकार की आलोचना की थी जिकसके कारण उन्हें निलंबित किया जा चुका है। अखबार को ई-मेल के जरिये दिये अपने इंटरव्यू में डोंगरे ने बताया कि उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट पर जो भी पोस्ट किया था वह सब उनकी जानकारी में था। 
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'हमारा संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है'

This is my crime that I speak of the rights of tribals: Varsha Dongre
उन्होंने संवैधानिक मौलिक अधिकारों को हवाल देते हुए कहा कि हमारा संविधान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है। उन्होंने कहा कि मै हर नागरिक सेवा के दिशानिर्देशों के पासल करती हूं। मैं कभी विभाग या फिर किसी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सोशल मीडिया पर नहीं डालती हूं। मगर नागरिक सेवा अधिकारी होने के नाते हमे जनता के साथ अपने संविधान की भी रक्षा करनी चाहिए। सोशल मीडिया पर किये पोस्ट को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा इरादा खुद को प्रसिद्ध करना नहीं है।

उन्होंने कहा कि इसका दावा किया जा रहा है छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से सामान्य प्रशासन विभाग सोशल मीडिया की गाइटलाइन के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। आदिवासी महिला को यातना देवे वाली बात पर डोंगरे ने कहा कि जब वह जगदलपुर सेंट्रल जेल में थी तो उन्होंने एक आदिवासी जवान लड़की को पुलिस द्वारा थर्ड डिग्री देते हुए देथा।

उन्होंने बताया कि जेल में उस लड़की की कलाई और सीने में बिजली के झटके दिये गये। डोंगरे बहुत बार आदिवासियों के समर्थन में दिखी है और देश में मौलिक अधिकारों की हमेशा से पैरवी करती हैं। अपने ऊपर लगे आरोपो पर उन्होंने कहा कि मेरी बस इतनी गलती है कि मैं आदिवासियों की हक की बात करती हूं।
 
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