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कोरोना वायरस से किराना दुकान भी नहीं है अछूता, इस तरह से फैल सकता है संक्रमण
Mon, 13 Apr 2020 04:10 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Tanuja Yadav
Updated Mon, 13 Apr 2020 04:10 PM IST
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किराना दुकान में सामान खरीदते लोग
- फोटो : PTI
कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए अगर अभी भी बंद, एयर कंडीशनर वाले किरान स्टोर से सामान खरीद रहे हैं तो सावधान हो जाइए। बंद किराने की दुकानों में कोरोना के फैलने का डर हो सकता है। एक नए शोध में ये बात सामने आई है।
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ऐरोसॉल के व्यवहार को समझने के लिए एक नया विकसित मॉडल तैयार किया गया है। फिनिश रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन के चार लोगों की टीम ने ये शोध तैयार किया है। इस शोध में किराने की दुकान जैसे वातावरण में ऐरोसॉल के व्यवहार को समझने की कोशिश की गई है।
शोध बताता है कि खांसने, छींकने और बात करने के दौरान निकले वायु के कण हवा में बहते हैं, कुछ मिनट तक हवा में रह सकते हैं और फैल सकते हैं। एक प्रयोग एयरकंडीशनर वाले किराने स्टोर में केंद्रीकृत वेंटिलेशन को ध्यान में रखकर किया गया, जो ऐरोसॉल के संक्रमण को एक कोने से दूसरे कोने तक जाने में पूरी तरह नहीं रोक सकता।
वैज्ञानिकों का मानना है कि इन कणों में सामान्य वायरस या कोरोना वायरस जैसे रोगाणु शामिल होते हैं। शोधकर्ताओं ने सुपर कंप्यूटर का इस्तेमाल कर 3D मानसिक चित्रण तैयार किया। इसमें शोधकर्ताओं ने दिखाया कि एक इंसान स्टोर के अंदर खड़ा होकर कहीं छींक या खांसता है। शोधकर्ताओं ने देखा कि छींक या खांसी से निकले वायु के कण अभी भी हवा में तैर रहे हैं।
शोधकर्ताओं ने पाया कि ये वायु कण 20 माइक्रोमीटर के आकार से भी छोटे हैं। 20 माइक्रोमीटर का आकार सूखी खांसी से निकले वायु कण से थोड़ा बड़ा होता है। इतने छोटे से आकार के बने वायु कण जमीन पर नहीं गिरते हैं और परिणाम ये होता है कि ये कण हवा में ही तैरते रहते हैं।
इसके अलावा अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल में भी एक शोध छपा है। ये शोध बताता है कि जब एक इंसान खांसता या छींकता है तो हवा में उसके छोटे कण गुच्छे के तौर पर इकट्ठे हो जाते हैं। ये हवा का गुच्छा सात से आठ मीटर यानि कि 23-27 फीट की दूरी तय कर सकता है।
ये दोनों शोध सुक्ष्म कणों के जैवभौतिकी पर ज्यादा आधारित है। इन दोनों शोध में जाने पहचाने सुक्ष्म कणों के व्यवहार का इस्तेमाल किया गया है जो कम जाने माने वायरस की पहुंच का विश्लेषण करते हैं।