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Hindi News ›   India News ›   Thiruvananthapuram: The idols of the goddess in Poornamikavu Devi temple will be named after 51 Malayalam letters of the alphabet

तिरुवनंतपुरम : पूर्णामिकावु देवी मंदिर में देवी की मूर्तियों का नाम वर्णमाला के 51 मलयालम अक्षरों के नाम पर रखा जाएगा

Sun, 21 Nov 2021 12:17 AM IST
Kuldeep Singh एएनआई, तिरुवनंतपुरम
एएनआई, तिरुवनंतपुरम Published by: Kuldeep Singh Updated Sun, 21 Nov 2021 12:17 AM IST
सार

मंदिर ट्रस्टी एम एस भुववन चंद्रन ने कहा कि यह दुनिया का पहला मंदिर है जहां 51 मूर्तियों पर 51 अक्षर उकेरे गए हैं। तिरुवनंतपुरम जिले के विझिन्जम के निकट पूर्णामिकावु मंदिर के लिए इन 51 देवियों की प्रतिमाएं तमिलनाडु के तंजावुर के निकट मइलाडी गांव में बनाया गया है जो मूर्तिकला के प्रसिद्ध दूसरा सबसे बड़ा स्थान माना जाता है। पूर्णामिकावु मंदिर केवल पूर्णिमा के दिन ही खुलता है।

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Thiruvananthapuram: The idols of the goddess in Poornamikavu Devi temple will be named after 51 Malayalam letters of the alphabet
पूर्णमिकावु देवी मंदिर - फोटो : twitter@ANI

विस्तार

केरल के तिरुवनंतपुरम में पूर्णामिकावु देवी मंदिर में देवी की मूर्तियों का नाम वर्णमाला के 51 मलयालम अक्षरों के नाम पर रखा जाएगा। मंदिर ट्रस्टी एम एस भुववन चंद्रन ने कहा कि यह दुनिया का पहला मंदिर है जहां 51 मूर्तियों पर 51 अक्षर उकेरे गए हैं।

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तिरुवनंतपुरम जिले के विझिन्जम के निकट पूर्णामिकावु मंदिर के लिए इन 51 देवियों की प्रतिमाएं तमिलनाडु के तंजावुर के निकट मइलाडी गांव में बनाया गया है जो मूर्तिकला के प्रसिद्ध दूसरा सबसे बड़ा स्थान माना जाता है। पूर्णामिकावु मंदिर केवल पूर्णिमा के दिन ही खुलता है।
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प्रमुख मंदिरों के मुख्य पुरोहितों द्वारा देवी प्रतिमाओं की स्थापना एवं प्राणप्रतिष्ठा की योजना निर्धारित की गई है जिनमें श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के पुरोहित पुष्पांजलि स्वामीयार, मित्रन नंबूदरी, मल्लियूर शंकरन नंबूदरी एवं जाने माने संगीतज्ञ कैथाप्राम दामोदरन नंबूदरी शामिल हैं।

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यह मलयालम वर्णमाला के 51 अक्षरों के नामों पर आधारित 51 देवियों का मंदिर है जिसे नवरात्र में प्राणप्रतिष्ठा के उपरांत जनता के दर्शन के लिए खोला जाएगा।

मंदिर के न्यासी एम. एस. भुवनचंद्रन ने बताया कि भाषा कोई भी हो, वेदों के अनुसार अक्षरों में विशेष शक्ति होती है। अक्षरों की इन्हीं शक्तियों को अनुभव करके ऋग्वेद, शिव संहिता, देवी भागवत, हरिनाम कीर्तनम् एवं आदिशंकर की रचनाओं में प्रत्येक मलयालम अक्षर की देवियों की पहचान की गई है।

देवियों की अंतिम पहचान निर्धारित करने से पहले दशक भर तक शोध एवं विचार मंथन किया गया। ऐसे प्रमाण मौजूद हैं जिनमें बताया गया है कि प्राचीन काल में वैज्ञानिक एवं ऋषियों ने अक्षरों एवं शब्दों की शक्ति को पहचाना था और भावी पीढ़ी के कल्याण के लिए उसे दर्ज भी किया था।

श्री भुवनचंद्रन ने कहा कि पहली चुनौती यह थी कि इस पूरे ज्ञान को वैज्ञानिक रीति से कूटबद्ध किया जाए और प्रतिमाओं के स्वरूप का निर्धारण किया जाए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के आधुनिक शिक्षा केंद्रों एवं सुविख्यात विश्वविद्यालयों में भी मंत्रों की शक्ति का अध्ययन एवं विश्लेषण किया गया है।

मूर्तिकारों एवं शोधकर्ताओं ने इन अध्ययनों का गहनता से समझा और वेदों में वर्णित सामग्री से उसकी तुलना की। अध्ययन के परिणाम बहुत ही दिलचस्प रहे। उन्हें पता चला कि सभी अक्षरों के देव नारी रूप यानी देवी स्वरूप में हैं।



उन्होंने 51 मलयालम अक्षरों के लिए 51 देवियों की पहचान की और फिर प्रतिमाओं के तीनों आयामों की तस्वीरें बनाई गई हैं। फिर उसे मइलाडी के कुशल मूर्तिकारों ने बारीकी से पत्थर पर उकेरा। प्रत्येक मूर्ति के नीचे के भाग में उस देवी को निरूपित करने वाला अक्षर भी आकर्षक ढंग से बनाया गया है।


 

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