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जलवायु परिवर्तन: इतिहास का तीसरा सबसे गर्म अप्रैल, डेढ़ डिग्री सीमा के करीब पहुंची दुनिया
Sun, 10 May 2026 06:35 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 10 May 2026 06:35 AM IST
सार
यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 इतिहास का तीसरा सबसे गर्म अप्रैल रहा। वैश्विक औसत तापमान 14.89 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो औद्योगिक काल से पहले के मुकाबले 1.43 डिग्री अधिक है। दुनिया अब पेरिस समझौते की 1.5 डिग्री की सुरक्षित सीमा को पार करने के बेहद करीब है। समुद्रों का बढ़ता तापमान और अल नीनो के संकेतों ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने क्या चेतावनी दी है? खबर में जानिए...
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जलवायु परिवर्तन ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : AI
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विस्तार
दुनिया लगातार ऐसे जलवायु दौर में प्रवेश कर रही है जहां बढ़ती गर्मी, असामान्य बारिश, सूखा, समुद्री तापमान में उछाल और ध्रुवीय बर्फ का तेजी से पिघलना अब अलग-अलग घटनाएं नहीं रह गई हैं। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (सी3एस) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 इतिहास का संयुक्त रूप से तीसरा सबसे गर्म अप्रैल दर्ज किया गया। इस दौरान वैश्विक औसत तापमान 14.89 डिग्री सेल्सियस रहा, जो औद्योगिक काल से पहले के स्तर की तुलना में 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के करीब पहुंची दुनिया
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अब पेरिस समझौते में तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के बेहद करीब पहुंच चुकी है और यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी नहीं आई तो आने वाले वर्षों में चरम मौसमी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं। अप्रैल 2026 का तापमान 1991 से 2020 के औसत की तुलना में 0.52 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इससे पहले सबसे गर्म अप्रैल 2024 में दर्ज किया गया था, जब तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में 1.58 डिग्री सेल्सियस अधिक पहुंच गया था। इसके बाद 2025 दूसरा सबसे गर्म अप्रैल रहा।
वैज्ञानिकों ने दी गंभीर चेतावनी
सी3एस की उप निदेशक डॉ. सामंथा बर्गेस ने रिपोर्ट में कहा है कि अप्रैल 2026 यह स्पष्ट संकेत देता है कि दुनिया लगातार गर्म होती जा रही है। उनके अनुसार समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच चुका है, समुद्री हीटवेव बढ़ रही हैं और आर्कटिक की बर्फ तेजी से घट रही है। उन्होंने कहा कि यूरोप समेत कई क्षेत्रों में तापमान और बारिश के पैटर्न में बड़े अंतर दिखाई दे रहे हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि दुनिया की जलवायु लगातार अधिक चरम स्थितियों की ओर बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु संकट अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। बढ़ती गर्मी और अनिश्चित मौसम के कारण दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा, जल उपलब्धता और मानव जीवन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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यह भी पढ़ें: Indore: जलवायु परिवर्तन का असर आमों की मिठास पर, रंग और स्वाद हुआ फीका
समुद्र की सतह पर अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा तापमान
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में समुद्र की सतह का औसत वैश्विक तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो अप्रैल महीने के लिए अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। वैज्ञानिकों ने इसे चिंता का विषय बताया है क्योंकि गर्म होते समुद्र वैश्विक मौसम प्रणाली को अस्थिर बना रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो के संकेत दिखाई देने लगे हैं। अल नीनो ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है और कई क्षेत्रों में सूखा, कहीं अत्यधिक बारिश और कहीं भीषण गर्मी की स्थिति पैदा हो सकती है।
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1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के करीब पहुंची दुनिया
विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया अब पेरिस समझौते में तय 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के बेहद करीब पहुंच चुकी है और यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी नहीं आई तो आने वाले वर्षों में चरम मौसमी घटनाएं और गंभीर हो सकती हैं। अप्रैल 2026 का तापमान 1991 से 2020 के औसत की तुलना में 0.52 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। इससे पहले सबसे गर्म अप्रैल 2024 में दर्ज किया गया था, जब तापमान औद्योगिक काल से पहले की तुलना में 1.58 डिग्री सेल्सियस अधिक पहुंच गया था। इसके बाद 2025 दूसरा सबसे गर्म अप्रैल रहा।
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वैज्ञानिकों ने दी गंभीर चेतावनी
सी3एस की उप निदेशक डॉ. सामंथा बर्गेस ने रिपोर्ट में कहा है कि अप्रैल 2026 यह स्पष्ट संकेत देता है कि दुनिया लगातार गर्म होती जा रही है। उनके अनुसार समुद्र का तापमान रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच चुका है, समुद्री हीटवेव बढ़ रही हैं और आर्कटिक की बर्फ तेजी से घट रही है। उन्होंने कहा कि यूरोप समेत कई क्षेत्रों में तापमान और बारिश के पैटर्न में बड़े अंतर दिखाई दे रहे हैं, जो इस बात का संकेत हैं कि दुनिया की जलवायु लगातार अधिक चरम स्थितियों की ओर बढ़ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक जलवायु संकट अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुका है। बढ़ती गर्मी और अनिश्चित मौसम के कारण दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा, जल उपलब्धता और मानव जीवन पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
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समुद्र की सतह पर अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा तापमान
रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में समुद्र की सतह का औसत वैश्विक तापमान 21 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो अप्रैल महीने के लिए अब तक का दूसरा सबसे ऊंचा स्तर है। वैज्ञानिकों ने इसे चिंता का विषय बताया है क्योंकि गर्म होते समुद्र वैश्विक मौसम प्रणाली को अस्थिर बना रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रशांत महासागर में अल नीनो के संकेत दिखाई देने लगे हैं। अल नीनो ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका असर दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है और कई क्षेत्रों में सूखा, कहीं अत्यधिक बारिश और कहीं भीषण गर्मी की स्थिति पैदा हो सकती है।
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