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अमित शाह बोले, एनपीआर की वजह से किसी की भी नागरिकता नहीं जाएगी

Tue, 24 Dec 2019 09:08 PM IST
अमित मंडल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Tue, 24 Dec 2019 09:08 PM IST
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There is no link between NRC and National Population Register NPR says Amit Shah
अमित शाह - फोटो : ANI

केंद्रीय मंत्रिमंडल से राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को अनुमति मिलने के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि इसका एनआरसी से संबंध नहीं है। साथ ही स्पष्ट किया कि देश में एनआरसी पर कोई बात नहीं हो रही है। इस पर बहस की जरूरत नहीं है। उन्हाेंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एनआरसी पर बयान को सही बताया और कहा कि एनआरसी पर कैबिनेट और संसद में कोई चर्चा नहीं हुई है। समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मंगलवार को अमित शाह ने कहा कि अगर एनपीआर में किसी नागरिक का नाम नहीं दर्ज हो पाता है, तो इससे उसकी नागरिकता खत्म नहीं होगी।

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अमित शाह ने कहा कि भाजपा के घोषणापत्र में एनआरसी की बात होना और संसद में इस पर चर्चा होना अलग अलग बातें हैं। विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही अफवाहों से अल्पसंख्यकों को डरने की जरूरत नहीं है, वह एनपीआर, एनआरसी और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पर राजनीति खेल रहा है। उन्हाेंने कहा कि ‘पॉलिटिक्स और कम्युनिकेशन’ में अंतर होता है। केंद्र के नोटिफेकेशन के बाद राज्यों ने भी नोटिफिकेशन निकाले, यह कम्युनिकेशन है। लेकिन पॉलिटिक्स यह है कि सीएए के कारण बवाल खड़ा हुआ। अब चूंकि यह बवाल थम रहा है और लोग इसे समझ रहे हैं, तो एनपीआर का बवाल खड़ा करो। सीएए पर प्रदर्शन भी वहीं ज्यादा हुए, जहां सबसे ज्यादा घुसपैठिए रहते हैं।

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डिटेंशन सेंटर हमारे समय का नहीं
डिटेंशन सेंटरों पर शाह ने कहा कि अगर कोई दूसरे देश से गैर-कानूनी ढंग से देश में आ जाता है, तो उसे जेल में नहीं रखा जाता है। उनके लिए डिटेंशन सेंटर बनाए जाते हैं। इन डिटेंशन सेंटरों का एनआरसी से लेना-देना नहीं है। साथ ही बताया कि असम में केवल एक डिटेंशन सेंटर चल रहा है। जो सेंटर चल रहा है उसे मौजूदा भाजपा सरकार में तो बनाया भी नहीं गया।

अपने राज्यों की गरीब जनता को सरकारी योजनाओं से दूर न रखें
गैर-भाजपा सरकार वाले राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा एनआरसी और सीएए लागू करने से किए इनकार पर शाह ने कहा कि मुख्यमंत्रियों को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे लोगों को दिक्कतें हों। उन्हाेंने कहा कि वे उन्हें समझाने का पूरा प्रयास करेंगे कि वे अपने राज्यों की गरीब आबादी को सरकारी योजनाओं से दूर नहीं रखें।

एनपीआर कांग्रेस की पहल थी
शाह ने यह भी कहा कि एनपीआर की प्रक्रिया कांग्रेस ने 2010 में शुरू की थी। 2004 में इसका कानून बनाया था। भाजपा ने इसे जनगणना के साथ जारी रखने का निर्णय लिया है, यह पार्टी के घोषणापत्र में नहीं था। वहीं उन्हाेंने साफ किया कि इसमें किसी का नाम शामिल नहीं होता है तो उसकी नागरिकता की वैधता पर प्रश्न नहीं उठेंगे, यह एनआरसी से अलग है।

एनपीआर-एनसीआर अलग-अलग 
शाह ने कहा कि एनपीआर जनसंख्या का रजिस्टर है। इसके आधार पर अलग-अलग योजनाओं के आकार तय होते हैं। एनआरसी में हर व्यक्ति से साक्ष्य मांगा जाता है कि आप किस आधार पर भारतीय नागरिक हैं? दोनों प्रक्रियाओं का एक-दूसरे से कोई लेनादेना नहीं है और न ही दोनों एकदूसरे के सर्वे को अपने काम में ले सकते हैं। दोनों के लिए कानूनी आधार भी अलग अलग हैं।


एनपीआर की जरूरत इसलिए
उन्हाेंने कहा कि एनपीआर की जरूरत इसलिए है कि हर 10 साल में अंतरराज्यीय स्तर पर जनगणना में काफी बदलाव आ जाते हैं। नागरिक एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर बस जाते हैं। इन बदलावों के मुताबिक योजनाएं बनाने के लिए एनपीआर आधार होता है।

एप के जरिए जानकारी, साक्ष्य नहीं देना होगा
उन्हाेंने कहा कि एनपीआर के तहत भारत में रहने वाला हर कोई भी व्यक्ति एक एप में अपनी जानकारियां देगा। उसे इन जानकारियों के साक्ष्य के रूप में कोई दस्तावेज नहीं देना होगा। अगर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है, तो उस जानकारी के स्थान को खाली छोड़ सकते हैं। इसमें यह नहीं पूछा जाएगा कि क्या आप भारत के नागरिक हैं? बल्कि घर के आकार, पशुधन, आदि जैसी जानकारियां ली जाएंगी। 

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