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महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए खेल शुरू, सत्ता की एक चाबी एनसीपी के पास

Sat, 26 Oct 2019 12:21 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 26 Oct 2019 12:21 AM IST
सार

  • मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए शुरू हुआ खेल
  • भाजपा-शिवसेना में से एक को झुकना होगा
  • सत्ता की एक चाबी एनसीपी के पास भी

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there is a big fight for chief ministerial candidate in maharashtra, ncp is also key player
चुनाव, महाराष्ट्र (फाइल फोटो)

विस्तार

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी का खेल शुरू हो चुका है। शिवसेना की सीटें भले ही बिग ब्रदर भाजपा से कम हैं मगर उसमें तोल-मोल की ताकत अधिक है। वह आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री देखना चाहती है। भाजपा देवेंद्र फडणवीस को दूसरी पारी देने की बात चुनाव से पहले कहती आई है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अब सत्ता में भाजपा के साथ हर स्तर पर 50-50 की भागीदारी चाहते हैं। उनकी मांग यह भी है कि पहले ढाई साल में मुख्यमंत्री शिवसेना का होगा।

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भाजपा चुप है और फडणवीस ने दिवाली के बाद संभावनाओं को खंगालने की बात कही है। हालांकि, उनका दावा है कि 105 सीटें पाने वाली भाजपा के पास 15 निर्दलियों या भाजपा के बागियों का समर्थन है। यानी वह 120 सीटों पर पहुंच गई है, जो 2014 के 122 सीटें जीतने के मुकाबले दो ही कम हैं। ये आंकडे़ शिवसेना को इशारा कर रहे हैं कि भाजपा की स्थिति उतनी नहीं बदली, जितनी दिख रही है, जबकि शिवसेना 2014 की 63 सीटों से खिसक कर इस बार 56 पर आ गई है। यानी, इस बार उसकी सात सीट कम आई है। शिवसेना इसे अनदेखा कर मुख्यमंत्री पद के लिए कमर कसे बैठी है। तय है कि ऐसी हालत में दोनों में से किसी एक दल को झुकना होगा।

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ऐसे मानेगी शिवसेना

 संभव है कि भाजपा-शिवसेना में 50-50 पर सहमति बन जाए, जिसमें फडणवीस पहले ढाई साल मुख्यमंत्री रहें। उद्धव इस बात पर राजी हो सकते हैं कि आदित्य को फडणवीस अपने संरक्षण में उप-मुख्यमंत्री बनाकर उन्हें सत्ता चलाने के गुर सिखाएं। बाद के ढाई साल में आदित्य को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिले। मगर इस फॉर्मूले पर भी शिवसेना तब मानेगी जब उसे राज्य में महत्व के गृह और वित्त मंत्रालय भी मिलें। शिवसेना कुछ कम कुछ ज्यादा करके मानेगी, क्योंकि उसे भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का डर है।

शिवसेना को एनसीपी-कांग्रेस का साथ

एनसीपी (54) और कांग्रेस (44) ने अपने दरवाजे शिवसेना के लिए खुले रखे हैं। वह हर हाल में भाजपा को सत्ता से दूर रखना चाहती है। शिवसेना ने भी विकल्प खुला रखा है। कांग्रेस-एनसीपी की 98 सीटों के साथ शिवसेना की 56 सीटें सदन के जरूरी बहुमत 145 से अधिक है। एनसीपी के प्रमुख नेता छगन भुजबल ने शिवसेना को खुला प्रस्ताव दिया है कि भाजपा के साथ उप-मुख्यमंत्री या ढाई साल का मुख्यमंत्री पद पाने से अच्छा है कि हमारे साथ आएं और पांच साल के लिए मुख्यमंत्री रहें।

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तो केंद्र की सियासत में आ सकते हैं फडणवीस

अगर भाजपा-शिवसेना गठबंधन बना रहा और पहले या दूसरे ढाई साल में मुख्यमंत्री की कुर्सी आदित्य ठाकरे के पास गई तो ऐसी स्थिति में फडणवीस का क्या होगा? अगर कभी भाजपा को राज्य में विपक्ष में भी बैठना पड़ा तो फडणवीस की भूमिका क्या होगी? जानकारों के मुताबिक दोनों हालात में भाजपा फडणवीस को राज्य से हटा कर केंद्र की राजनीति में ला सकती है और उनके स्थान पर राज्य भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल को विधायकों के नेतृत्व की भूमिका दी जाएगी। सीटें कम आने पर फडणवीस के विरोधी सक्रिय हो गए हैं।

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