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तैयारी पूरी, अब सामने आएंगे महाभारत काल के छुपे हुए राज

Fri, 29 Jul 2016 08:58 AM IST
राजीव शर्मा/अमर उजाला, बरेली
राजीव शर्मा/अमर उजाला, बरेली Updated Fri, 29 Jul 2016 08:58 AM IST
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the secrets of mahabharata will come out after the rain

टीहरखेड़ा किले की खुदाई से महाभारतकाल के राज सामने आने की उम्मीद है। इसकी खुदाई के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग को इजाजत दे दी है। हालांकि किले की खुदाई बारिश के बाद कराई जाएगी। इतिहासकारों का मानना है कि किले से महाभारतकाल के कई अवशेष मिल सकते हैं, जिनके जरिए कई राज सामने आएंगे।

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दिल्ली-लखनऊ राष्ट्रीय राजमार्ग पर फतेहगंज पश्चिमी कस्बा से छह किलोमीटर दूर बसे टीहरखेड़ा गांव में संबंधित किला दुजेरा नदी किनारे बसा है। इस टीले में मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े काफी समय से मिल रहे हैं। यहां काल भैरव की एक बेहद प्राचीन प्रतिमा भी मिल चुकी है। किले को महाभारतकाल से जोड़ते हुए इतिहासकार इसमें बहुत सारे अवशेष मिलने की संभावना जता रहे हैं।
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इतिहासकारों का मानना है कि यह किला पांच हजार से ज्यादा पुराना है। किले में भारत के प्राचीनतम मृदभांड से लेकर कुषाणकालीन मृदभांड भी मिल सकते हैं। चूंकि यह इलाका प्राचीन पांचाल नगर रहा है इसलिए टीले की खुदाई में मिले अवशेष महाभारतकाल के रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं। टीले की खुदाई को एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रदेश सरकार से एनओसी ले चुका है।

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टीले से जुड़ी खास बातें

the secrets of mahabharata will come out after the rain

विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग ने एएसआई से टीले की खुदाई का लाइसेंस मांगा था। विभाग के अध्यक्ष प्रो. श्यामबिहारी लाल ने बताया कि एएसआई से लाइसेंस मिल चुका है लेकिन अभी टीले की खुदाई बारिश की वजह से नहीं कराई जा सकती। बारिश के बाद खुदाई कराई जाएगी। उत्खनन का खर्च एएसआई और विश्वविद्यालय उठाएगा। विश्वविद्यालय के प्राचीन इतिहास विभाग की टीम अपने निर्देशन में खुदाई कराएगी और बरामद वस्तुओं का अध्ययन करेगी।

- टीले का क्षेत्रफल : 30 हजार वर्ग मीटर।
- ऊंचाई : 30 से 40 फिट।
- अनुमानित प्राचीनता : पांच हजार वर्ष पुराना।
- निकट में बहती है : बरसाती दुजेरा नदी।
- उत्खनन पर प्रारंभिक अनुमानित खर्च : 10 लाख रुपये।
- उत्खनन का प्रारंभिक चरण : एक पखवाड़ा।

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