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Budget Session Of Parliament: जम्मू-कश्मीर का बजट संसद में पेश क्यों, किन क्षेत्रों पर है फोकस?
Mon, 14 Mar 2022 01:35 PM IST
प्रतिभा ज्योति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: प्रतिभा ज्योति
Updated Mon, 14 Mar 2022 01:35 PM IST
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सार
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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो :
PTI
विस्तार
संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत हो गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में वित्त वर्ष 2022-23 के लिए केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर का बजट पेश कर दिया है। उन्होंने लोकसभा में अनुदान के लिए पूरक मांग, अनुदान की मांग और जम्मू और कश्मीर के लिए अतिरिक्त अनुदान की मांग भी प्रस्तुत कीं।बताया जा रहा है कि बजट के केंद्र में कई विकास परियोजनाएं हैं और ग्रामीण विकास, उद्योग, कृषि क्षेत्र और पर्यटन पर भी फोकस है। यह केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का तीसरा बजट है, जो संसद में पेश किया गया।
केंद्र सरकार 2022-23 के लिए अपने आम बजट में जम्मू कश्मीर के लिए 35,581.44 करोड़ रुपये की घोषणा पहले ही कर चुकी है। जम्मू और श्रीनगर में प्रस्तावित मेट्रोलाइट रेल परियोजना के अलावा बठिंडा, जम्मू व श्रीनगर गैस पाइपलाइन, कीरू व कवार पन बिजली परियोजनाएं और शाहपुर कंडी और उज्ज परियोजनाएं मुख्य श्रेणी में शामिल हैं।
जम्मू-कश्मीर का बजट को संसद में क्यों पेश किया जा रहा है?
क्योंकि इस केंद्र शासित प्रदेश में कोई निर्वाचित सरकार नहीं है और इस समय विधानसभा नहीं है। इसकी अनुपस्थिति में जम्मू-कश्मीर विधानसभा की विधायी शक्तियां केंद्र सरकार के हाथों में निहित हैं।
राजपथ पर जम्मू कश्मीर की झांकी (फाइल फोटो)
- फोटो :
पीटीआई
कब-कब पेश हो चुका है जम्मू-कश्मीर का बजट?
जम्मू कश्मीर 31 अक्टूबर 2019 को औपचारिक रूप से संघ शसित प्रदेश बन गया था।
केन्द्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर के लिए वर्ष 2020- 21 के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट हुआ।
जम्मू कश्मीर के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 1,0,8261 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था।
उससे पहले अविभाजित जम्मू कश्मीर के एक अप्रैल से लेकर 30 अक्ट्रबर 2019 की सात महीने की अवधि के लिए भी पूरक बजट पेश किया गया था।
कब से निर्वाचित सरकार नहीं है?
जम्मू और कश्मीर जून 2018 से निर्वाचित सरकार के बिना है। जब भाजपा ने राज्य में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का हवाला देते हुए महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत 31 अक्टूबर 2019 को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित हो चुका है।
जम्मू कश्मीर 31 अक्टूबर 2019 को औपचारिक रूप से संघ शसित प्रदेश बन गया था।
केन्द्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर के लिए वर्ष 2020- 21 के लिए एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट हुआ।
जम्मू कश्मीर के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 1,0,8261 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था।
उससे पहले अविभाजित जम्मू कश्मीर के एक अप्रैल से लेकर 30 अक्ट्रबर 2019 की सात महीने की अवधि के लिए भी पूरक बजट पेश किया गया था।
कब से निर्वाचित सरकार नहीं है?
जम्मू और कश्मीर जून 2018 से निर्वाचित सरकार के बिना है। जब भाजपा ने राज्य में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति का हवाला देते हुए महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त कर दिया गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत 31 अक्टूबर 2019 को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में पुनर्गठित हो चुका है।
जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा
- फोटो :
अमर उजाला
कब हो सकता है चुनाव?
भाजपा को छोड़ अन्य सभी राजनीतिक दल जम्मू कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराए जाने की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है क जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।
राज्य के बंटवारे के बाद नए सिरे से परिसीमीन का काम पूरा कर लिया गया है, जिसमें सात नई सीटें शामिल की गई हैं। अब तक जम्मू कश्मीर में 83 विधानसभा सीटें थी जो अब बढ़कर 90 हो गई है।
यहां आखरी बार चुनाव कब हुए थे?
जम्मू कश्मीर राज्य में आखरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। जून, 2018 में तत्कालीन पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार भंग हो गई थी और फिर 31 अक्टूबर, 2019 तक जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन रहा। इसके बाद से उपराज्यपाल ही इस केंद्र शासित प्रदेश के शासन की कमान संभाले हुए हैं।
भाजपा को छोड़ अन्य सभी राजनीतिक दल जम्मू कश्मीर में जल्द विधानसभा चुनाव कराए जाने की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है क जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं।
राज्य के बंटवारे के बाद नए सिरे से परिसीमीन का काम पूरा कर लिया गया है, जिसमें सात नई सीटें शामिल की गई हैं। अब तक जम्मू कश्मीर में 83 विधानसभा सीटें थी जो अब बढ़कर 90 हो गई है।
यहां आखरी बार चुनाव कब हुए थे?
जम्मू कश्मीर राज्य में आखरी बार 2014 में विधानसभा चुनाव हुए थे। जून, 2018 में तत्कालीन पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार भंग हो गई थी और फिर 31 अक्टूबर, 2019 तक जम्मू कश्मीर में राज्यपाल शासन रहा। इसके बाद से उपराज्यपाल ही इस केंद्र शासित प्रदेश के शासन की कमान संभाले हुए हैं।