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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा, कुछ लोगों के पास लाखों रुपये के नए नोट कहां से आ रहे हैं?

Fri, 16 Dec 2016 04:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 16 Dec 2016 04:58 AM IST
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The SC asked the government, after all, how are some people getting lakhs in new currency?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि आखिर कुछ लोगों के पास लाखों रुपये के नए नोट पाए जा रहे हैं और आम जनता को 24 हजार रुपये तक नहीं मिल पा रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि सरकार के नोटबंदी के फैसले से बहुत सारे लोग प्रभावित हैं जबकि कुछ लोग इससे अप्रभावित हैं। 
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वहीं सरकार ने बताया कि वह जिला सहकारी समितियों को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को जमा लेने की इजाजत दे सकती है, लेकिन इन नोटों को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया में जमा कराना होगा। साथ ही इसके लिए ग्राहकों को केवाईसी (नो योर कस्टमर) फॉर्म भरना होगा।
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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बुधवार को यह सवाल उठाया कि नोटबंदी के बाद आम लोगों को परेशानी से जूझना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ लोगों के पास लाखों रुपये के नए नोट मिल रहे हैं। जबकि निकासी की सीमा निर्धारित है। पीठ ने सरकार की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। 
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जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि बैंक के कुछ अधिकारी गैरकानूनी तरीके से पुराने नोटों को बदलने में शामिल पाए गए हैं। सरकार ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बैंकों पर नजर रख रही है। साथ ही अटॉर्नी जनरल ने कहा कि पुराने नोटों के बदलने में कुछ गड़बडिय़ां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि लोगों की समस्या को दूर करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।

सरकारी अस्पतालों में पुराने नोटों को स्वीकार क्यों नहीं किया जाना चाहिए

The SC asked the government, after all, how are some people getting lakhs in new currency?
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि नोटबंदी को लेकर आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार की ओर से हर हफ्ते अधिकतम एक खाते से अधिकतम 24 हजार रुपये निकालने की इजाजत दी गई है, लेकिन लोगों को यह रकम भी नहीं मिल पा रही है।
 
शीर्ष अदालत ने यह भी जानना चाहा कि आखिर सरकारी अस्पतालों में पुराने नोटों को स्वीकार क्यों नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि इससे तो मरीजों को इलाज कराने में परेशानी हो सकती है। जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि करीब पांच लाख करोड़ रुपये के नए नोट मार्केट में हैं। वहीं 100, 50, 20 और 10 के पुराने नोट पहले से ही बाजार में हैं। ऐसे में नोटों की कमी नहीं है। 

उन्होंने कहा कि पुराने नोटों को स्वीकार करने को लेकर कुछ समस्याएं आई हैं। पेट्रोल पंप मालिक सिर्फ 500 और 1000 रुपये की पुराने नोट ही जमा करा रहे हैं।  सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने पीठ से कहा कि सिर्फ 5000 रुपये तक के लेन-देन को ही नकदी के तौर पर स्वीकार किया जाना चाहिए। पीठ ने याचिकाकर्ता को अपनी सलाह अटॉर्नी जनरल तक पहुंचाने के लिए कहा है। 

वहीं सुनवाई के दौरान एक वकील ने बताया कि दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की ओर से 500 और 1000 रुपये के लाखों पुराने नोट जमा कराए गए। जबकि डीटीसी बसों में टिकट पांच, 10, 15, 20 और 25 रुपये के हैं। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट कहा से आएं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वह पहलुओं पर गौर करेंगे और लोगों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए जरूरी हुआ तो निर्देश जारी किए जाएंगे।
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