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ONOE: 'चुनाव आयोग को अधिक शक्ति देने से पूरा नहीं होगा बिल का उद्देश्य', एक देश एक चुनाव पर बोले पूर्व सीजेआई

Tue, 19 Aug 2025 09:18 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Tue, 19 Aug 2025 09:18 PM IST
सार

एक देश एक चुनाव विधेयक की समीक्षा कर रही समिति से पूर्व सीजेआई ने कहा कि आयोग को अधिक शक्ति देने से चुनावों की आवृत्ति कम करने का प्रस्तावित कानून का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता है। विधेयक में धारा 82ए(5) के तहत प्रावधान के दुरुपयोग के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए।

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'The purpose of the bill will not be fulfilled by giving more power to the EC', former CJI said on onoe
भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजीव खन्ना - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने एक देश एक चुनाव को लेकर प्रस्तावित विधेयक में चुनाव आयोग को अनियंत्रित और अधिक शक्ति देने पर सवाल उठाए। एक देश एक चुनाव विधेयक की समीक्षा कर रही समिति से पूर्व सीजेआई ने कहा कि आयोग को अधिक शक्ति देने से चुनावों की आवृत्ति कम करने का प्रस्तावित कानून का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता है।
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भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संसद की संयुक्त समिति को पूर्व सीजेआई खन्ना ने सुझाव दिया कि विधेयक में धारा 82ए(5) के तहत प्रावधान के दुरुपयोग के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा उपाय होने चाहिए। इस प्रावधान के तहत अगर किसी अप्रत्याशित कारण से यह चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ नहीं हो सकता है तो चुनाव आयोग को राज्य विधानसभा चुनाव स्थगित करने का अधिकार दिया गया है। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा कि यह सवाल उठाया गया कि क्या यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे के विरुद्ध है। यह व्यापक रूप से स्वीकार किया गया कि यह विधेयक मूल ढांचे के विरुद्ध नहीं है।
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वहीं पूर्व सीजेआई खन्ना ने प्रस्तावित विधेयक के बारे में अपना आकलन संतुलित रखा और सदस्यों के प्रश्नों के उत्तर में कई कानूनी बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि विधेयक का घोषित उद्देश्य चुनावों की आवृत्ति को कम करना है, लेकिन जब विधानमंडलों को उनके पूर्ण कार्यकाल से पहले ही भंग कर दिया जाता है, तो यह हमेशा साकार नहीं हो पाता। मध्यावधि चुनाव दुर्लभ हैं, जो बढ़ती राजनीतिक स्थिरता और संस्थागत लचीलेपन का प्रतिबिंब है।
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उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विधेयक के क्रियान्वयन की एक निश्चित तिथि होनी चाहिए, न कि वर्तमान प्रस्ताव के अनुसार जो इसे संसद में पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्वारा प्रस्तावित कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद नई लोकसभा की पहली बैठक से जोड़ता है। बैठक में भाजपा के रविशंकर प्रसाद, अनुराग ठाकुर, संजय जायसवाल और संबित पात्रा, कांग्रेस की प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष तिवारी और मुकुल वासनिक, टीडीपी के जीएम हरीश बालयोगी, डीएमके के पी विल्सन और वाईएसआर कांग्रेस के वाईवी सुब्बा रेड्डी शामिल थे।


इससे पहले अपने लिखित नोट में पूर्व सीजेआई ने कहा था कि किसी प्रस्ताव की सांविधानिक वैधता किसी भी तरह से उसके प्रावधानों की वांछनीयता या आवश्यकता पर घोषणा नहीं है। संविधान संशोधन विधेयक के बारे में देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने से संबंधित तर्क उठाए जा सकते हैं, क्योंकि उन्होंने इस अवधारणा का समर्थन और आलोचना करने वाले विभिन्न दावों को सूचीबद्ध किया था।

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