फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   the problem in Atal Tunnel which took 1400 days to solve

अटल टनल की वह बाधा, जिसे दूर करने में लगे 1400 दिन, विशेषज्ञों की लेनी पड़ी मदद

Fri, 02 Oct 2020 05:38 PM IST
गौरव पाण्डेय जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Fri, 02 Oct 2020 05:38 PM IST
विज्ञापन
the problem in Atal Tunnel which took 1400 days to solve
अटल सुंरग रोहतांग - फोटो : अमर उजाला

समुद्र तल से करीब दस हजार फुट की ऊंचाई पर बनी अटल टनल (रोहतांग टनल) को छह साल में पूरा होना था, मगर इसे तैयार होने में दस साल लग गए। टनल निर्माण की राह में आई उस बाधा को दूर करने के लिए दुनिया के शीर्ष विशेषज्ञों और सर्वश्रेष्ठ तकनीक का सहारा लेना पड़ा। बीआरओ के मार्गदर्शन में वह बाधा तो दूर हो गई, साथ ही साथ टनल पूरा होने का लक्ष्य भी 1400 दिन आगे बढ़ गया। पहाड़ी के अंदर से जब टनल की राह निकाली जा रही थी तो वहां एक छोटे से सुराख के जरिए पानी का तेज बहाव मिला। टनल पर लगे इंजीनियर उसे बंद करने का प्रयास करते, मगर उसका मुंह चौड़ा होता चला गया। एक बार तो ऐसा लगा जैसे सब कुछ बह जाएगा। लेकिन, बीआरओ भी हिम्मत कहां हारने वाला था। भले ही चार साल लगे, खर्च बढ़ा, लेकिन अटल टनल तैयार हो गई। तीन अक्तूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया की सबसे लंबी इस हाइवे टनल का उद्घाटन करेंगे।

विज्ञापन

 
कर्नल सूरजपाल सिंह सांगवान, जो कि अब जम्मू-कश्मीर में एनएचआईडीसीएल पीएमयू अखनूर के प्रोजेक्ट पर बतौर जीएम (पी) काम कर रहे हैं, वे अटल टनल की साइट पर 2012 से 2015 के बीच कार्यरत रहे थे। उन्होंने बताया, बीआरओ ने इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू किया था। काम आगे बढ़ रहा था कि बीच में पहाड़ी के अंदर एक वाटर चैनल निकल आया। हालांकि शुरू में वह तो एक छोटे से छेद की भांति था, लेकिन बाद में वहां से पानी ने ऐसी तेजी पकड़ी कि उसे रोक पाना मुश्किल हो गया। साइट पर जितने भी इंजीनियर थे, सब हैरान रह गए। हर एक इसी चिंता में डूबा था कि पानी का बहाव कैसे बंद हो। विश्व के कई देशों से तकनीकी एक्सपर्ट बुलाए गए। उपकरण और केमिकल भी लाना पड़ा।
विज्ञापन

 

बतौर सांगवान, पानी का बहाव इतना तेज हो चुका था कि उस पर लगाई गई हर सील टूट रही थी। बांध साइट पर जिस केमिकल और सीमेंट का इस्तेमाल किया जाता है, उसकी मदद से छेद बंद करने की कोशिश की गई, लेकिन वह तरीका भी कामयाब नहीं हो सका। हाई तकनीक की मदद से चैनलाइज का काम शुरू हुआ। विदेशों से लाए गए केमिकल का इस्तेमाल करने से पहले वहां पानी के नीचे वेल्डिंग तकनीक के जरिए छेद बंद करने की मुहिम शुरू हुई। इसमें कामयाबी मिल गई। पानी का तेज बहाव बंद हो गया। कुछ दिन तक देखा गया कि वहां पानी का रिसाव या नमी जैसा कोई लक्षण नहीं दिख रहा है, इसके बाद इंजीनियरों ने आगे बढ़ना शुरू किया। यही वजह थी, जिसके चलते टनल का निर्माण कार्य चार साल आगे सरक गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन अक्तूबर को अटल टनल का उद्घाटन करेंगे। इस टनल पर सर्विलांस के कई हाईटेक उपकरण लगाए गए हैं। वाहनों के गुजरने से लेकर और किसी भी आपात स्थिति में हर तरह का अलर्ट तकनीकी टीम के पास पहुंचेगा। अटल टनल दुनिया की सबसे लंबी हाइवे टनल है। इसकी निर्माण लागत करीब 3200 करोड़ रुपये बताई गई है। यह टनल देखने में घोड़े की नाल की आकार की लगती है। करीब 9.02 किलोमीटर लंबी इस टनल की मदद से मनाली सालभर लाहौल-स्पीति घाटी से जुड़ा रहेगा। मौजूदा समय में यही घाटी भारी बर्फबारी के चलते लगभग छह महीने तक अलग-थलग रहती है। इसके जरिए मनाली से लेह तक की दूरी तय करने में पांच घंटे कम लगेंगे। टनल चालू होने के बाद सड़क की दूरी भी करीब 46 किलोमीटर कम हो जाएगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed