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'द प्राइस ऑफ अवर साइलेंस' तीन दोस्तों की कहानी और स्वदेशी का सन्देश
amarujala.com-written by-संदीप भ्ाट्ट
Updated Fri, 31 Mar 2017 03:29 AM IST
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प्रतिभा हो और साथ में हौसला भी तो आप को मंजिल पर पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता। आप की राह आसान होती चली जाती है। ऐसी ही एक कहानी है हनादी फाल्की की हाल ही में लॉन्च हुई किताब 'द प्राइस ऑफ अवर साइलेंस' की।
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दिल्ली के कनॉट प्लेस में मौजूद ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर में किताब का विमोचन किया गया। लेखिका हनादी फाल्की ने अपनी किताब 'द प्राइस ऑफ अवर साइलेंस' के बाारे में बताते हुए कहा कि इस पुस्तक में तीन युवा दोस्तों की कहानी के माध्यम से आज की युवा पीढ़ी के मूद्दों मसलन कैरियर का चुनाव, नौकरी की भागदौड़, अरेंज मेरिज, लिव इन रिलेशन, अबार्शन और उनके प्रति उनकी प्रतिक्रिया को खूबसूरती से शब्दबद्ध किया गया है।
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इसके अलावा यह सन्देश देने की भी कोशिश की गई है की जितनी मेहनत हम हॉलीवुड के लिए कर रहे हैं उतनी अपनी फिल्म इंडस्ट्री के लिए करें तो उसे कई गुना अधिक समृद्ध कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को प्रतिष्ठित प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है।
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बता दें कि यूपी के अलीगढ के साधारण परिवार में जन्मी हनादी ने अलीगढ मुस्लिम विश्व विद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक की उपाधि ली। बाद में वे आगे की पढाई के लिए न्यूजीलैंड चली गईं। यहां उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री ली।
हनादी ने कुछ समय हॉलीवुड फिल्मों को 3D स्टीरियो में परिवर्तित करने वाली इंडस्ट्री में काम भी किया। गौरतलब है कि इस इंडस्ट्री में भारतीय तकनीशियन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं लेकिन उनको वो हक नहीं मिल पाता जिसके वो हकदार हैं। लेकिन वे इसके खिलाफ कुछ करने के बजाय, चुप रहना अधिक पसंद करते हैं। इसी को लेकर लेखिका हनादी फाल्की ने युवा पीढ़ी के उन तमाम मसलों को अपनी किताब 'द प्राइस ऑफ अवर साइलेंस' में बयां करने का प्रयास किया है।