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ब्रिक्स सम्मेलन : रूस के साथ हो सकते हैं पांच समझौते, पढ़ें क्या रहेगा खास
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 15 Oct 2016 08:48 AM IST
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ब्रिक्स
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आतंकवाद के मुद्दे पर भारत द्वारा पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कूटनीति शनिवार से शुरू हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में भी जारी रहेगी। इस दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ब्राजील व दक्षिण अफ्रीका समेत पांच देशों के नेता भी शामिल होंगे। भारत की कोशिश होगी कि आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने में चीन का भी उसे साथ मिले। सम्मेलन में आतंकवाद और इसे पनाह देने वाले देशों के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। आतंकवाद के खिलाफ संभवतया पीएम मोदी मोर्चा संभाल सकते हैं।
15 और 16 अक्टूबर को ब्रिक्स समूह के देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं का आठवां शिखर सम्मेलन होगा। इस दो दिनी सम्मेलन में आर्थिक और व्यापारिक विषयों के अलावा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के सवाल पर भी चर्चा होगी। इसके केंद्र में पाक प्रायोजित आतंकवाद होगा। भारत ने इस सम्मेलन से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की तैयारी कर ली है। भारत चाहता है कि पाक को अलग-थलग करने के लिए गोवा घोषणा पत्र पर चीन के हस्ताक्षर भी हों।
रूस के साथ हो सकते हैं पांच समझौते
1. कुडनकुलम पर बड़ा परमाणु समझौता
नई दिल्ली। परमाणु उर्जा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाते हुए भारत और रूस ने कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में पांचवीं और छठी इकाइयों को स्थापित करने के लिए एक समझौते और क्रेडिट प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया। करार और क्रेडिट प्रोटोकॉल की औपचारिक घोषणा कल गोवा में ब्रिक्स शिखर-सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता के बाद हो सकती है।
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2. एस-400 ट्राइअम्फ समझौता
लंबी रेंज की क्षमता वाले एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 ट्राइअम्फ की खरीद के लिए दोनों देशों के बीच कई अरब डॉलर के समझौते पर दस्तखत होंगे। भारत 3 तरह की मिसाइलों पर निशाना साधने में सक्षम पांच रक्षा प्रणाली हासिल करने में दिलचस्पी रखता है।
3. कामोव हेलीकाप्टर समझौता
हल्के सैन्य चॉपरों की नई श्रंखला के लिए भारत के एचएएल और रूसी कामोव के बीच नए संयुक्त उपक्रम को स्वीकृति मिलेगी। 1 अरब डॉलर की लागत वाले इस समझौते को अंतिम रूप देंगे। ये सेना के चीता व चेतक हेलीकाप्टरों का स्थान लेंगे।
4. ब्रह्मोस का नया वर्जन
भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल का नया वर्जन विकसित करने जा रहे हैं जो नियंत्रण रेखा पर दुश्मन की गोलाबारी का तुरंत जवाब दे सकेंगे। इसका इस्तेमाल टेरर लांच पैड अथवा आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को नष्ट करने में किया जा सकता है।
5. कूटनीतिक संबंधों पर जोर
मोदी और पुतिन की चर्चा के बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। यह वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने की दिशा में उनके साझा प्रयासों को बताएगा। दोनों देश कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 70 साल पूरे होने पर भविष्य का खाका भी पेश करेंगे।
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15 और 16 अक्टूबर को ब्रिक्स समूह के देश ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं का आठवां शिखर सम्मेलन होगा। इस दो दिनी सम्मेलन में आर्थिक और व्यापारिक विषयों के अलावा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के सवाल पर भी चर्चा होगी। इसके केंद्र में पाक प्रायोजित आतंकवाद होगा। भारत ने इस सम्मेलन से पाकिस्तान को कड़ा संदेश देने की तैयारी कर ली है। भारत चाहता है कि पाक को अलग-थलग करने के लिए गोवा घोषणा पत्र पर चीन के हस्ताक्षर भी हों।
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रूस के साथ हो सकते हैं पांच समझौते
1. कुडनकुलम पर बड़ा परमाणु समझौता
नई दिल्ली। परमाणु उर्जा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाते हुए भारत और रूस ने कुडनकुलम परमाणु संयंत्र में पांचवीं और छठी इकाइयों को स्थापित करने के लिए एक समझौते और क्रेडिट प्रोटोकॉल को अंतिम रूप दिया। करार और क्रेडिट प्रोटोकॉल की औपचारिक घोषणा कल गोवा में ब्रिक्स शिखर-सम्मेलन से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता के बाद हो सकती है।
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2. एस-400 ट्राइअम्फ समझौता
लंबी रेंज की क्षमता वाले एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 ट्राइअम्फ की खरीद के लिए दोनों देशों के बीच कई अरब डॉलर के समझौते पर दस्तखत होंगे। भारत 3 तरह की मिसाइलों पर निशाना साधने में सक्षम पांच रक्षा प्रणाली हासिल करने में दिलचस्पी रखता है।
3. कामोव हेलीकाप्टर समझौता
हल्के सैन्य चॉपरों की नई श्रंखला के लिए भारत के एचएएल और रूसी कामोव के बीच नए संयुक्त उपक्रम को स्वीकृति मिलेगी। 1 अरब डॉलर की लागत वाले इस समझौते को अंतिम रूप देंगे। ये सेना के चीता व चेतक हेलीकाप्टरों का स्थान लेंगे।
4. ब्रह्मोस का नया वर्जन
भारत और रूस मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल का नया वर्जन विकसित करने जा रहे हैं जो नियंत्रण रेखा पर दुश्मन की गोलाबारी का तुरंत जवाब दे सकेंगे। इसका इस्तेमाल टेरर लांच पैड अथवा आतंकी प्रशिक्षण केंद्रों को नष्ट करने में किया जा सकता है।
5. कूटनीतिक संबंधों पर जोर
मोदी और पुतिन की चर्चा के बाद संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। यह वैश्विक व क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाने की दिशा में उनके साझा प्रयासों को बताएगा। दोनों देश कूटनीतिक संबंधों की स्थापना के 70 साल पूरे होने पर भविष्य का खाका भी पेश करेंगे।
भारत-चीन संबंधों पर निगाह
ब्रिक्स सम्मेलन
- फोटो : Getty
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर पूरी दुनिया की निगाह रहेगी। चीन के राष्ट्रपति बांग्लादेश को 24 अरब डॉलर की आर्थिक मदद देने के बाद भारत आ रहे हैं। इससे पहले एनएसजी और जैश-ए-मोहम्मद के संस्थापक मसूद अजहर को आतंकी घोषित कराने में रोड़ा बने चीन के रुख इस सम्मेलन का मुख्य आकर्षण होगा। चीन के राष्ट्रपति की यह भारत यात्रा ऐसे वक्त में हो रही है जब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व स्वदेशी जागरण मंच चीनी माल का बहिष्कार कर रहे हैं। ऐसे में चीन द्वारा पाक से दोस्ती कायम रखते हुए भारत के साथ व्यापारिक रिश्तों के संतुलन पर दुनिया की निगाह होगी। सम्मेलन के अंत में आतंकवाद के खात्मे के पक्ष में संयुक्त घोषणा पत्र पर चीन आपत्ति भी ले सकता है।
मोदी के लिए चुनौती
PM NARENDRA MODI
दो दिनी ब्रिक्स सम्मेलन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। यदि कुछ ठोस आर्थिक प्रस्तावों पर सहमति निकल जाती है तो उसे मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि माना जाएगा। जबकि ऐसा नहीं होने की स्थिति में यह सम्मेलन बहुत अधिक मायने नहीं रखेगा। क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग पर बड़े फैसले नहीं लिए जाने से पहले ही सार्क शिखर सम्मेलन पटरी से उतर चुका है।
ऐसे में मोदी के सामने यह चुनौती भी होगी कि ब्रिक्स सम्मेलन कुछ अलग करेगा। सार्क में भारत का चिर शत्रु पाकिस्तान है तो ब्रिक्स में चीन भी उसका विरोधी है। ऐसे में मोदी को शी जिनपिंग के साथ बराबरी के आर्थिक संबंध बनाने होंगे। ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध के मंसूबों को नाकाम करना भी भारत की चुनौती होगी।
ऐसे में मोदी के सामने यह चुनौती भी होगी कि ब्रिक्स सम्मेलन कुछ अलग करेगा। सार्क में भारत का चिर शत्रु पाकिस्तान है तो ब्रिक्स में चीन भी उसका विरोधी है। ऐसे में मोदी को शी जिनपिंग के साथ बराबरी के आर्थिक संबंध बनाने होंगे। ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध के मंसूबों को नाकाम करना भी भारत की चुनौती होगी।