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मजदूरों के खाते खुलवाने की जिम्मेदारी उसके मालिक की होगी

Tue, 29 Nov 2016 04:05 AM IST
राजीव कुमार/ नई दिल्ली
राजीव कुमार/ नई दिल्ली Updated Tue, 29 Nov 2016 04:05 AM IST
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The owner will be responsible for opening the worker' bank account 
- फोटो : अमर उजाला
देश की अर्थव्यवस्था को नकद रहित करने की दिशा में सरकार की तरफ से एक और पहल की गई है। अब औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले सभी श्रमिकों के बैंक में अपने-अपने खाते होंगे और उन खातों को खुलवाने की जिम्मेदारी उनके मालिकों की होगी। यह नियम छोटी-बड़ी सभी प्रकार की औद्योगिक इकाइयों पर लागू होगा। सरकार के निर्देश पर इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया गया है। वर्तमान में छोटी इकाइयों में काम करने वाले अधिकतर श्रमिकों को नकद में भुगतान किया जाता है। जल्द ही बड़े शो-रूम या दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों के खाते खुलवाने का काम भी शुरू किया जाएगा।
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खाते में वेतन भुगतान से श्रमिकों को भी फायदा
दिल्ली के बवाना औद्योगिक इलाके में मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट संचालित करने वाले उद्यमियों ने बताया कि श्रम मंत्रालय के निर्देश पर उन्हें अपने सभी कर्मचारियों के खाते खुलवाने के लिए कहा गया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (फिस्मे) के महासचिव अनिल भारद्वाज ने बताया कि सरकार के इस फैसले से सभी छोटी-छोटी यूनिटें संगठित हो जाएंगी और बैंक के माध्यम से वेतन मिलने से श्रमिकों को भी कई फायदे होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी आशंका जाहिर की कि कर्मचारियों को बैंक के माध्यम से वेतन देने के डर से कई लघु यूनिट बंद भी हो सकती हैं या फिर वे अपने कर्मचारियों में कमी कर सकती हैं। 
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उद्यमी लें श्रमिकों की जिम्मेदारी
भारद्वाज ने बताया कि देश के कई शहरों के औद्योगिक इलाकों में कर्मचारियों के बैंक खाते खोलने के लिए कैंप का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी यूनिटें तो अपने परिसर में ही इस प्रकार के कैंप लगवा रही हैं। इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्माता जयदीप जुनेजा ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों में काम करने वाले अधिकतर श्रमिक दूसरे प्रदेश के होते हैं। उनके पास कोई स्थानीय पहचान-पत्र नहीं होता है। इसलिए सरकार की तरफ से यह निर्देश दिया गया है कि उद्यमी अपने श्रमिकों की जिम्मेदारी लें और वे बैंकों को यह लिखकर दें कि फलां श्रमिक उनके यहां काम करता है ताकि उनका खाता खुल सके। 
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