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जम्मू कश्मीर में नई सरकार जल्द गठित होने के आसार

Fri, 18 Mar 2016 11:02 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र / अमर उजाला, नई दिल्ली
राघवेंद्र नारायण मिश्र / अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 18 Mar 2016 11:02 AM IST
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The new government will be set up in Jammu and Kashmir

जम्मू कश्मीर में नई सरकार के गठन की संभावना के बीच पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात तो हुई, लेकिन सरकार के गठन की तारीख तय नहीं हो पाई। जम्मू कश्मीर में विश्वास के माहौल की बहाली के लिए महबूबा केंद्र सरकार की ओर से कुछ ठोस एलान चाहती हैं, जिस पर अभी बात नहीं बन पाई है।

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नई सरकार के गठन में अब भी कुछ पेंच फंसे हैं। एनएचपीसी के दो प्रोजेक्टों को जम्मू कश्मीर को वापस करने के मुद्दे पर महबूबा अड़ी हुई हैं। केंद्र सरकार के समक्ष इन प्रोजेक्टों की वापसी पर कई तकनीकी दिक्कतें हैं।
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इस वजह से महबूबा के साथ आधे घंटे की मुलाकात के दौरान अमित शाह कोई ठोस वादा नहीं कर पाए। गतिरोध अभी बना हुआ है, लेकिन इनको सुलझाने के लिए भाजपा महासचिव राम माधव और पीडीपी के डॉ हसीब द्राबू के बीच बातचीत में सरकार गठन के गतिरोध को समाप्त करने का फॉर्मूला तय किया जाएगा।
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इसके बाद महबूबा मुफ्ती की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी। महबूबा ने जोर दिया है कि सरकार गठन के पहले मोदी से मुलाकात जरूरी है। इस पर शाह ने हामी भर दी है। 

महबूबा की रविशंकर और अमित शाह से मुलाकात
इस दो दिन में मुलाकात होगी। दोनों दल चुनाव टालना चाहते हैं, इसलिए दोनों के बीच निकटता बढ़ी है। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने महबूबा से कहा है कि वह सरकार गठन से पहले किसी शर्त पर जोर नहीं दें। पहले सरकार गठित हो जाए, उसके बाद समन्वय समिति की बैठकों में एक-एक मुद्दों पर विस्तार से बातचीत संभव है।

इसके पहले विश्वास बहाली के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पहल की है। जेटली ने जम्मू कश्मीर को अतिरिक्त सहायता का वादा किया है और गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को एडवाइजरी जारी कर कश्मीरी छात्रों के मुद्दे पर संयम के साथ कदम उठाने की सलाह दी है।

देश के कई हिस्सों में कश्मीरी छात्रों के खिलाफ मामले दर्ज हुए हैं और जेएनयू प्रकरण में कश्मीरी छात्रों से पूछताछ हो रही है। कुछ राज्यों में कश्मीरी छात्रों की गिरफ्तारी भी हुई है। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा ने कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा पर जोर दिया था। इसी मांग के तहत गृहमंत्रालय ने एडवाइजरी जारी की है।

पाकिस्तान से संबंधों में सुधार और बातचीत भी पीडीपी की शर्तों में शुमार है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और सरताज अजीज की नेपाल में मुलाकात के बाद पीडीपी की यह शर्त भी पूरी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ की वाशिंगटन में संभावित मुलाकात को भी पीडीपी दोनों देशों के बीच बेहतर संबंधों के लिए पहल मानते हुए इसका स्वागत किया है।

लिहाजा अब पीडीपी सरकार गठन की ओर कदम बढ़ा रही है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार गठन से पहले बहुत सारी शर्तें पूरी नहीं हो सकतीं और इससे गतिरोध बढ़ेगा। पुराने एजेंडे पर प्रतिबद्धता जताते हुए पहले सरकार का गठन हो और बाद में एक-एक मुद्दे पर समन्वय समिति की बैठकों में चर्चा की जाए।

भाजपा और पीडीपी दोनों को सरकार गठन की जल्दी

The new government will be set up in Jammu and Kashmir

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती इस बार संसद के बजट सत्र के आखिरी दिनों में दिल्ली आईं। इस क्रम में उनकी मुलाकात केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से हुई है। महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद से रविशंकर प्रसाद के अच्छे रिश्ते थे।

सरकार गठन के लिए पीडीपी की ओर से डॉ. हसीब द्राबू की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और महासचिव राम माधव के साथ पहले बातचीत हो चुकी है। महबूबा के दिल्ली आने के समय राम माधव पुणे में थे। इस कारण सरकार गठन के लिए दोनों दलों में औपचारिक बातचीत का दौर शुरू नहीं हो पाया था।

सूत्रों के मुताबिक भाजपा के जम्मू कश्मीर के प्रमुख नेताओं को 19 मार्च को दिल्ली बुलाया गया है। नई सरकार का गठन कानूनी कारणों से भी जरूरी हो गया है। जम्मू कश्मीर से संविधान में विधानसभा की छह माह तक कोई बैठक नहीं होने पर उसे भंग किए जाने का प्रावधान है।

विधानसभा की पिछली बैठक 10 अक्टूबर को श्रीनगर में हुई थी। इस हिसाब से नौ अप्रैल की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि कुछ कानूनी विशेषज्ञ राज्यपाल शासन लागू होने से छह माह की अवधि को वैध मानते हैं।

राज्यपाल शासन आठ जनवरी को लागू हुआ था। जम्मू कश्मीर का बजट भी अभी पारित नहीं हुआ है। इसे भी 31 मार्च तक पारित किया जाना है। नतीजतन सरकार गठन की जल्दी अब भाजपा और पीडीपी दोनों को है। 

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