{"_id":"5c1ffa53bdec2256b86d6b1c","slug":"the-maximum-number-of-236-cases-of-police-atrocities-case-registered-in-up-between-2014-and-2016","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूपी में पुलिस ज्यादतियों के सबसे ज्यादा मामले दर्ज, दूसरे नंबर पर रही दिल्ली","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
यूपी में पुलिस ज्यादतियों के सबसे ज्यादा मामले दर्ज, दूसरे नंबर पर रही दिल्ली
Mon, 24 Dec 2018 02:42 AM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Mon, 24 Dec 2018 02:42 AM IST
विज्ञापन
यूपी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देश में वर्ष 2014 से 16 के दौरान पुलिस अत्याचार के सबसे ज्यादा 236 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज हुए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उस दौरान देश में ऐसे कुल 411 मामले दर्ज किए गए। यूपी के बाद पुलिस ज्यादतियों के मामले में दिल्ली दूसरे नंबर पर रही, जहां उसी अवधि में 63 मामले दर्ज किए गए। हालांकि उस दौरान दर्ज हुए मामलों में से सजा की दर न के बराबर रही।
विज्ञापन
सितंबर में लखनऊ में 38 वर्षीय एपल एक्सक्यूटिव विवेक तिवारी को कथित रूप से रुकने से इनकार करने पर पुलिस ने उसे एसयूवी में गोली मार दी थी। उस मामले में प्रदेश के विशेष पुलिस जांच दल ने पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट में बताया कि कांस्टेबल प्रशांत चौधरी ने बिना उकसावे के उस पर गोली चलाई थी। तिवारी की मौत हो गई थी।
विज्ञापन
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक दो सालों के दौरान देश में ऐसे कुल 411 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 57.4 फीसदी अकेले उत्तर प्रदेश के थे। उस दौरान सजा की दर बेहद निराशाजनक रही और केवल तीन लोगों को सजा मिली। इसके अलावा यूपी में वर्ष 2014 में पुलिसकर्मियों द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के 46 मामले सामने आए, जिनमें जांच के दौरान 39 मामलों को झूठा पाया गया।
विज्ञापन
वहीं वर्ष 2015 में प्रदेश में पुलिस ज्यादतियों के 34 मामले दर्ज किए गए, जिनमें एक मामला झूठा निकला। हालांकि अगले साल 2016 में पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई और 156 केस दर्ज किए गए। लेकिन जांच में 69 मामले झूठे निकले। 39 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए गए।
मानवाधिकार उल्लंघन के मामले
पुलिस द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन में लोगों के गायब होने, अवैध हिरासत या गिरफ्तारी, फर्जी मुठभेड़, फिरौती और महिलाओं पर हमले के मामले आते हैं।