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बाॅम्बे हाईकोर्ट के जज ने कहा, मुझे पता है कि 'वार एंड पीस' एक उत्कृष्ट कृति है

Thu, 29 Aug 2019 08:45 PM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Trainee Trainee Updated Thu, 29 Aug 2019 08:45 PM IST
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The judge of Bombay High Court said that I know the book War and Peaceis a masterpiece
वार एण्ड पीस - फोटो : Twitter

बंबई उच्च न्यायालय ने गुरुवार को कहा कि वह जानता है कि लियो तोलस्तोय की किताब ‘वार एंड पीस’ एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति है और उसके कहने का मतलब यह नहीं था कि एल्गार परिषद-कोरेगांव भीमा मामले में पुणे पुलिस द्वारा जब्त की गईं सभी किताबें आपत्तिजनक हैं।

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न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल की यह टिप्पणी तब आई जब एक दिन पहले मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि उन्होंने आरोपी वेरनोन गोंजाल्विस से यह बताने को कहा कि उन्होंने ‘वार एंड पीस’ की प्रति जैसी आपत्तिजनक सामग्री अपने घर पर क्यों रखी।
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वहीं, एक सह-आरोपी के वकील ने अदालत से कहा कि ‘वार एंड पीस’ जिसका बुधवार को अदालत ने जिक्र किया था, वह विश्वजीत रॉय द्वारा संपादित निबंधों का संग्रह है और उसका शीर्षक ‘वार एंड पीस इन जंगलमहल: पीपुल, स्टेट एंड माओइस्ट’ है।
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न्यायाधीश की कथित टिप्पणी पर टि्वटर पर हजारों प्रतिक्रियाएं आईं। दिनभर हैशटैग # वार एंड पीस सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा। गुरुवार को अदालत की ताजा टिप्पणी तब आई जब गोंजाल्विस के वकील ने सूचित किया कि पिछले साल कार्यकर्ता के घर से जब्त की गईं किताबों में से किसी को भी भारत सरकार ने सीआरपीसी के प्रावधानों के अनुरूप प्रतिबंधित नहीं किया है।

न्यायमूर्ति कोतवाल ने कहा, मुझे पता है कि तोलस्तोय की ‘वार एंड पीस’ एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति है। मैं आरोप पत्र के साथ संलग्न पंचनामा से समूची सूची को पढ़ रहा था। यह बहुत ही खराब लिखावट में लिखी गई थी। मैं ‘वार एंड पीस’ के बारे में जानता हूं। और मैं यह सवाल कर रहा था कि गोंजाल्विस ने इन किताबों की प्रति क्यों रखी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि सबकुछ आपत्तिजनक है।


सह-आरोपी सुधा भारद्वाज के वकील युग चौधरी ने कहा कि बुधवार को अदालत रॉय द्वारा लिखी गई किताब का जिक्र कर रही थी, न कि तोलस्तोय द्वारा लिखी गई किताब का। न्यायाधीश ने तब कहा, युद्ध तथा अन्य शीर्षकों से संबंधित बहुत से संदर्भ हैं। मैंने ‘वार एंड पीस’ का जिक्र करने से पहले ‘राज्य दमन’ (एक अन्य किताब) का जिक्र किया। क्या कोई न्यायाधीश अदालत में सवाल नहीं पूछ सकता?

गोंजाल्विस ने अदालत से कहा कि उसके पास 2,000 किताब हैं और न तो इन किताबों में से एक भी तथा न ही उनके घर से जब्त की गई किताब प्रतिबंधित है। 

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