संसद में निलंबन का मुद्दा हावी : कृषि कानून वापसी पर असहजता से बचने के लिए सरकार की रणनीति कामयाब
सरकार की रणनीति के अनुरूप ही संसद के शीतकालीन सत्र में कृषि कानूनों की वापसी का मुद्दा पीछे छूट गया है और राज्यसभा से विपक्ष के एक दर्जन सांसदों के निलंबन का मुद्दा हावी हो गया है। राज्यसभा के सभापति ने कहा कि सांसदों ने अपनी हरकत पर अफसोस नहीं जताया, उल्टे न्यायोचित ठहराया है।
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सरकार की रणनीति के अनुरूप ही संसद के शीतकालीन सत्र में कृषि कानूनों की वापसी का मुद्दा पीछे छूट गया है और राज्यसभा से विपक्ष के एक दर्जन सांसदों के निलंबन का मुद्दा हावी हो गया है। इससे सरकार कृषि कानूनों की वापसी पर चर्चा की असहज स्थिति से बच गई। सत्र के दूसरे दिन भी निलंबन पर हंगामा हुआ।
उल्लेखनीय है कि सत्र से पहले विपक्ष ने सरकार को कृषि कानूनों की वापसी के मुद्दे पर घेरने की रणनीति बनाई थी, लेकिन सत्र के पहले ही दिन दोनों सदनों से कृषि कानूनों को निरस्त करने वाला बिल पारित होने और इसके तत्काल बाद विपक्षी सदस्यों के निलंबन के बाद स्थिति बदल गई।
मंगलवार को राज्यसभा में विपक्ष द्वारा बहिष्कार और लोकसभा में हंगामे के बीच किसी ने कृषि कानूनों का मुद्दा नहीं उठाया। अब सरकार ने विपक्ष को माफी की शर्त के साथ निलंबन वापसी का प्रस्ताव दिया है। विपक्ष के यह शर्त मानने की उम्मीद बेहद कम है। ऐसे में यह विवाद लंबा खिंच सकता है।
मानसून सत्र में भी ऐसे ही बदला था नजारा
संसद के मानसून सत्र में भी अचानक नजारा बदल गया था। विपक्ष सरकार को किसान आंदोलन, महंगाई पर घेरना चाहता था, लेकिन ऐन मौके पर पेगासस जासूसी कांड के खुलासे के बाद अचानक सब कुछ बदल गया। विपक्ष ने इसे मुख्य मुद्दा बनाया और न सिर्फ सत्र को समय से पहले खत्म करना पड़ा, बल्कि पूरे सत्र में जबर्दस्त हंगामे के कारण कामकाज नहीं हो पाया।
जिस तरह से सत्र में सांसदों के निलंबन का मुद्दा गरमाया है, उससे कई तरह के सवाल भी उठ रहे हैं।
- सवाल है कि क्या रणनीति के तहत ठीक उसी दिन सांसदों के निलंबन की घोषणा की गई जिस दिन कृषि कानूनों को वापस लिया गया।
- यदि कानून वापसी पर चर्चा होती तो सरकार को कई सवाल असहज कर सकते थे और उनका जवाब देना सरकार के लिए आसान नहीं होता।
सभापति का साफ इनकार, निलंबन वापसी पर विचार नहीं
राज्यसभा के सभापति नायडू ने साफ कर दिया कि वह 12 सांसदों के निलंबन की वापसी के अनुरोध पर विचार नहीं कर सकते क्योंकि निलंबित सांसदों ने अपनी हरकत पर अफसोस नहीं जताया, बल्कि उसे उचित बताने की कोशिश की है।
नायडू बोले, आपने सदन को गुमराह किया, सदन को अशांत किया, टेबल तोड़े, आसन पर कागज फेंके, टेबल पर चढ़ बैठे और फिर आप मुझे सिखाने की कोशिश कर रहे हैं। ये कोई तरीका नहीं है। मुझे नहीं लगता नेता प्रतिपक्ष का अनुरोध मानने योग्य है। मैं इसपर बिलकुल विचार नहीं करूंगा। उन्होंने कहा, किसी पर भी ऐसी कार्रवाई से मुझे खुशी नहीं होती, लेकिन साथ ही मुझ पर सदन को चलाने की जिम्मेदारी भी है।
निलंबन सत्ता पक्ष के सांसदों का हो : डेरेक
तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन ने सदन में कहा, विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के 80 सदस्यों को निलंबित किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने सदन के पिछले सत्र में कुछ मुद्दों पर बहस को रोका था।
16 विपक्षी नेता मिले नायडू से
मंगलवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले 16 विपक्षी दलों के नेताओं ने एम वेंकैया नायडू से उनके निवास पर भेंट कर इन सांसदों का निलंबन वापस लेने का आग्रह किया।
सरकार ने कहा माफी मांगें सांसद
सरकार ने साफ कर दिया कि अगर संबंधित सदस्य सदन में माफी मांग लेते हैं तो सरकार पुनर्विचार को तैयार है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि गलती किसी से भी हो सकती है। उन्हें इसका अहसास है तो क्षमा मांग लें।
हरगिज माफी नहीं मांगेंगे : राहुल गांधी
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी सांसद हरगिज माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने ट्वीट किया, माफी क्यों? लोगों के मुद्दों को संसद में उठाने के लिए?
गोयल ने कहा, लेडी मार्शल पर हमला तक किया
पीयूष गोयल ने बताया, मानसून सत्र के आखिरी दिन 11 अगस्त को विपक्ष ने सदन में कुछ मांग रखी जिसके नहीं माने जाने पर हंगामा शुरू हुआ। हंगामे के दौरान लेडी मार्शल पर हमला हुआ। कुछ सदस्य मेल मार्शल को गले से पकड़ पीछे को खींच रहे थे। कुछ सभापति के आसन पर स्क्रीन तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
उच्च सदन की गरिमा तार-तार की गई। सरकार के कुछ मंत्री जब बाहर आ रहे थे उनसे धक्का मुक्की और आसन पर फाइल फेंकी गई। विपक्ष के दो सदस्यों ने इस घिनौनी घटना का वीडियो बनाया और उसे यू ट्यूब पर अपलोड कर दिया।
देशभर में एनआरसी पर अभी फैसला नहीं : गृह राज्यमंत्री
देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने को लेकर केंद्र सरकार ने अभी कोई फैसला नहीं किया है। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कांग्रेस सांसद हिबी ईडन के सवाल पर यह जानकारी दी। राय ने बताया कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) 12 दिसंबर 2019 को अधिसूचित किया गया था, जो 10 जनवरी 2020 को लागू हुआ। सीएए के तहत आने वाले लोग नियम अधिसूचित होने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बांध बिल विपक्ष की मौजूदगी में ही आएगा
सरकार ने कहा है कि वह बांध सुरक्षा बिल विपक्ष की मौजूदगी में ही राज्यसभा में बुधवार को पेश करेगी। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, सभापति की मंशा भी है कि सरकार विपक्ष से बात कर समाधान निकाले। उन्होंने कहा कि डैम सेफ्टी बिल बेहद महत्वपूर्ण है और हम भी बिना विपक्ष के इसे सदन में पेश नहीं करना चाहते हैं। मानसून सत्र में भी हमारा मकसद नहीं था कि बिना विपक्ष के सदन चले।
बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र पर पंजाब और पश्चिम बंगाल की आशंका बेबुनियाद
केंद्र ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का अधिकार क्षेत्र बढ़ाने पर पश्चिम बंगाल और पंजाब सरकारों की आशंकाओं को बेबुनियाद करार दिया है। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कहा, बीएसएफ के क्षेत्रीय अधिकार का विस्तार करने से राज्य पुलिस के साथ मिलकर सीमा पार अपराधों पर ज्यादा बेहतर और प्रभावी नियंत्रण होगा।