फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   The High Court stop imposes a copy of the advice of JAG

हाईकोर्ट ने जेएजी की सलाह की प्रति मुहैया करवाने वाले आदेश पर लगाई रोक

Tue, 02 Apr 2019 12:13 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 02 Apr 2019 12:13 AM IST
विज्ञापन
The High Court stop imposes a copy of the advice of JAG
सांकेतिक तस्वीर
हाईकोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है जिसमें मई 2012 में लद्दाख में तैनात 226 फील्ड रेजीमेंट के करीब 100 सैनिकों व सैन्य अधिकारियों के विवाद पर जज एडवोकट जनरल (जेएजी) की सलाह को आरटीआई में आवेदक को देने का निर्देश दिया गया था। इस मामले में आवेदक को दोषी ठहराते हुए कोर्ट मार्शल कर दस साल कैद की सजा सुनाई थी। 
विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति एजे भंभानी की खंडपीठ ने रक्षा मंत्रालय की पुनर्विचार याचिका पर आरटीआई आवेदक बिक्रमजीत सिंह व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई के लिए 13 अगस्त की तारीख तय की है। 
विज्ञापन


खंडपीठ ने यह नोटिस केंद्र सरकार के स्थाई अधिवक्ता राहुल शर्मा व अधिवक्ता सीके भट के जरिए रक्षा मंत्रालय की ओर से दायर याचिका पर जारी किया गया है। इस याचिका में उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें सीआईसी ने केंद्र सरकार को गनर बिक्रमजीत सिंह को आरटीआई में सूचना उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


रक्षा मंत्रालय ने सीआईसी के आदेश को सिंगल जज के समक्ष चुनौती दी थी। सिंगल जज ने विलंब से दायर किए जाने का हवाला देते हुए इसे मई 2018 में खारिज कर दिया था। सिंगल जज के आदेश को सरकार ने खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी है। 

पेश पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि सीआईसी ने जेएजी की सलाह की प्रमाणित प्रति मुहैया करवाने का गलत आदेश दिया है क्योंकि यह सूचना पूरी तरह से गोपनीय है और आरटीआई एक्ट के दायरे से बाहर है। 

याचिका के मुताबिक यह मामला 11 मई 2012 की रात जम्मू कश्मीर के लेह का है। एक सैन्य अधिकारी की पत्नी से छेड़छाड़ के बाद तीन सैन्य अधिकारियों द्वारा एक सैनिक की बुरी तरह पिटाई और उससे उसकी मौत की अफवाह के बाद सैनिकों ने हंगामा किया था। 


याचिका में कहा गया है कि करीब 100 सैनिकों ने अधिकारी मैस कर कई अधिकारियों को जख्मी कर दिया था और उनकी पत्नियों से दुव्र्यवहार किया था। इस मामले में बिक्रमजीत सिंह को दोषी ठहराते हुए 2015 में कोर्ट मार्शल कर उसे 10 साल कैद की सजा सुनाई गई थी। उसने दिसंबर 2015 में उसके मामले में जेएजी की सलाह की प्रति आरटीआई में मांगी थी। वह फिलहाल होशियारपुर केंद्रीय कारागार में सजा काट रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed