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बिजली गिरने से झुलसी बालिका का शरीर रेत में दबाया

Sun, 22 May 2016 04:28 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, पीलीभीत
ब्यूरो/ अमर उजाला, पीलीभीत Updated Sun, 22 May 2016 04:28 AM IST
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The girl's body scorched in desert after hit by thunder
बिजली से झुलसी नेहा को रेत में दबा दिया - फोटो : ब्यूरो/ पीलीभीत

 घर के आंगन में परिवारीजनों के साथ खेल रही दस साल की बालिका अचानक बिजली गिरने से झुलस गई। लड़की को इलाज के लिए डाक्टर के पास न ले जाकर घर वालों ने उसे रेत में दबाकर रखा। साथ ही उसकी हालत में सुधार होने के भी दावे किए जा रहे हैं।

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गांव नवदिया सुखदासपुर के रहने वाले नन्हे लाल खेती कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। शुक्रवार की रात लगभग साढे़ दस बजे वह पत्नी राजवती और तीन बच्चों के साथ घर के आंगन में बैठे थे। वहीं दस वर्षीय बेटी नेहा खेल रही थी तभी अचानक उसके ऊपर बिजली गिरी और वह गंभीर रूप से झुलस गई। कुछ ही देर में हादसे का पता लगते ही गांव के लोग मौके पर एकजुट हो गए, लेकिन उसे डाक्टर के पास नहीं ले गए।
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बालिका को जमीन पर लिटाकर गर्दन के ऊपर का भाग खुला रखा और पूरा शरीर रेत में दबा दिया। दूसरे दिन शनिवार को भी बच्ची को रेत से बाहर नहीं निकाला है। जबकि गांव से आठ किलोमीटर दूर पीएचसी है।

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रेत में दबाना इलाज नहीं

The girl's body scorched in desert after hit by thunder
बिजली - फोटो : self

घरवालों का मानना है कि ऐसा करने से उनकी बेटी ठीक हो जाएगी। उन्होंने बताया कि यह देशी इलाज गांव में पहले से होता आ रहा है। इससे पहले भी एक महिला और एक बच्चा इसी तरह ठीक हो चुके हैं। शनिवार को घरवालों ने दावा किया कि बच्ची की हालत में सुधार हो रहा है। उधर, पुलिस पूरे मामले से अंजान बनी हुई है। 

बिजली से झुलसे व्यक्ति का रेत में दबा कर इलाज कराना बिल्कुल ठीक नहीं है। यह तंत्र-मंत्र तो कहला सकता है पर यह इलाज नहीं है। ऐसे में मरीज को तुरंत निकट के अस्पताल ले जाकर डाक्टर को दिखाना चाहिए। चिकित्सक मरीज की दशा देख उचित इलाज व सलाह दे सकता है। बिजली गिरने से दो तरह के मर्ज होते हैं एक बर्न दूसरा शॉक। कई बार मामूली चोट लग कर ही मरीज ठीक हो जाता है। परिवार वालों को चाहिए कि वह बिना समय गंवाए बालिका को निकट के अस्पताल ले जाकर दिखाएं।
- डा. आरसी शर्मा, सीएमएस

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