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महामारी के खिलाफ लड़ाई जीतने के करीब हैं, बशर्ते 'क्वारंटीन सेंटर' पर लापरवाही न हो

Mon, 25 May 2020 04:02 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 25 May 2020 04:02 PM IST
सार

बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, यूपी, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र व दूसरे कई ऐसे राज्य हैं, जहां पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन या ट्रांसपोर्ट का कोई दूसरा साधन शुरू होने के बाद एकाएक संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।

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The fight against the epidemic is close to winning, unless there is negligence at the 'Quarantine Center'
क्वारंटीन सेंटर में नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी। - फोटो : अमर उजाला (सांकेतिक)

विस्तार

देश में संक्रमण का पहला केस 30 जनवरी को सामने आया था। अब यह संख्या एक लाख 39 हजार के पार पहुंच गई है। कोरोना संक्रमित देशों की टॉप-10 सूची में भारत शामिल हो गया है। इस सूची में टॉप पर अमेरिका है, जबकि अन्य देशों में ब्राजील, रूस, स्पेन, ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी और तुर्की हैं।
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छावला आईटीबीपी परिसर में स्थित देश के सबसे बड़े क्वारंटीन सेंटर के डॉक्टर राजकुमार के अनुसार, भले ही हमारे यहां कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़ रहे हैं, इसके बावजूद हम जीत के करीब हैं।

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क्वारंटीन सेंटरों पर हो रही लापरवाही को रोकने में हम सफल हो जाते हैं, तो उतनी ही तेजी से कोरोना को मात दी सकती है। श्रमिक स्पेशन ट्रेनों में रोजाना लोग अपने घरों को जा रहे हैं।
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उन्हें जिन क्वारंटीन सेंटरों में ठहराया जाता है, वहां सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और पीपीई किट पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा। केवल बुखार चेक कर लोगों को आगे भेज दिया जाता है। इसी गलती के कारण ग्रामीण अंचल में कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़ने लगे हैं।
 

डॉ. राजकुमार बताते हैं कि कोरोना काल में जो कोई भी व्यक्ति बाहर से आता है, उसे जांच के बाद स्वयं क्वारंटीन में चले जाना चाहिए। दिल्ली जैसे शहरों में तो बहुत से लोग खुद को घर में क्वारंटीन रख कर ठीक भी होते जा रहे हैं।

चिंता की बात उन राज्यों के लिए है, जहां टेस्ट की गति अभी सुस्त है और क्वारंटीन सेंटर पर पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं हैं।

बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, यूपी, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र व दूसरे कई ऐसे राज्य हैं, जहां पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन या ट्रांसपोर्ट का कोई दूसरा साधन शुरू होने के बाद एकाएक संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।

जिला प्रशासन अपने अनुसार इन लोगों को क्वारंटीन में रखता है और उसके बाद उन्हें घर भेज देता है। हैरानी की बात यह है कि इसके बाद भी उनमें से अनेक लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। यहीं पर उस लापरवाही का पता चलता है। वह व्यक्ति जिस जगह से आया है, कहीं न कहीं बीच में सुरक्षा की चेन टूटी है।

सफर में या क्वारंटीन सेंटर में ठीक से जांच नहीं हुई, जिसका खामियाजा बाद में संबंधित व्यक्ति के अलावा उसके परिजनों को भी भुगतना पड़ता है।

टेस्ट कम हो रहे हैं, तो ज्यादा पता नहीं लग रहा

हमारे देश में कोरोना जांच उतने बड़े स्तर पर नहीं हो रही, जैसा कि विकसित राष्ट्रों में देखने को मिल रहा है। बिहार जैसे राज्य की जनसंख्या 12 करोड़ है, मगर वहां एक दिन में पांच हजार लोगों का टेस्ट करने की सुविधा है।

अब कोरोना का एक छिपा हुआ रूप सामने आ रहा है, जिसमें कोई लक्षण नहीं दिखाई देता। श्रमिक स्पेशल ट्रेन, क्वारंटीन सेंटर या किसी एक जगह पर रह रहे लोग कोरोना की चपेट में आ रहे हैं, जबकि उनमें कोई ऐसा लक्षण नहीं दिखाई पड़ा।

किसी का बुखार चेक करते हैं तो वह सामान्य होता है। हैरानी वाली बात ये है कि वही व्यक्ति जब टेस्ट कराता है तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। इससे बचाव का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि खुद को सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क के सुरक्षा चक्र में बांधे रखें।

सादे कपड़े का मास्क बना सकते हैं। उसे साबुन से धो सकते हैं। जरूरी नहीं है कि फर्श या कपड़े धोने के लिए सैनिटाइजर और केमिकल सोल्यूशन ही जरूरी है।

यहां पर साबुन का इस्तेमाल किया जा सकता है। क्वारंटीन सेंटर में सोशल डिस्टेंसिंग और नियमित जांच बहुत जरूरी है। यहां से जाने के बाद लोगों को कम से कम दो सप्ताह तक खुद को दूसरे लोगों के संपर्क में आने से बचाना चाहिए।

क्वारंटीन सेंटर चर्चा में हैं, क्योंकि यहां पर ये सब होता है... 

17 मई को छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले में बने क्वारंटीन सेंटर पर एक मजदूर की मौत हो गई थी। योगेश वर्मा नाम का वह मजदूर पुणे से लौटा था। सेंटर पर उसे सांप ने काट लिया था।1 9 मई को बलरामपुर के सेंटर पर एक शिक्षक की मौत हो गई।

बांसवाड़ा जिले के कूपड़ा के चित्रा डूंगरी स्थित जवाहर नवोदय आवासीय स्कूल में क्वारंटीन सेंटर बना था। रविवार शाम प्रशासनिक अधिकारियों की टीम वहां पहुंची। ग्रामीणों ने पथराव कर दिया। क्वारंटीन सेंटर के भीतर अफरातफरी मच गई।

सोशल डिस्टेंसिंग टूट गई। बिहार के इसुआपुर थाना क्षेत्र के टेढ़ा गांव में प्रवासी मजदूर 52 वर्षीय तारकेश्वर महतो की मौत हो गई। वह दिल्ली से आया था और उसे मध्य विद्यालय टेढ़ा क्वारंटीन सेंटर में रखा गया था।

सलेमपुर क्वारंटीन सेंटर पर अव्यवस्था को लेकर प्रवासी मजदूरों ने रोड जाम कर दिया। मजदूरों का आरोप था कि उन्हें रात का भोजन नही दिया गया। बिजली सप्लाई काट दी गई।



समस्तीपुर जिले में विभूतीपुर प्रखंड के देशरी कर्रख पंचायत क्वारंटीन सेंटर का नजारा ही कुछ अलग था। वहां डांस के लिए बार-बालाओं को बुला लिया गया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।

बिधौली स्थित क्वारंटीन सेंटर में रह रहे लोग साफ पानी के लिए तरस गए।

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