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ड्यूटी पर मारे गए CAPF जवानों के परिजन हैं बेहाल, अनुकंपा के आधार पर भी नहीं मिल रहीं सरकारी नौकरियां

Wed, 16 Sep 2020 05:57 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 16 Sep 2020 05:57 PM IST
सार

केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि मौजूदा समय में अनुकंपा आधार पर नौकरी देने के कई मामले लंबित हैं। सीआरपीएफ में ऐसे मामलों की संख्या 37, बीएसएफ में 24, आईटीबीपी में 155 और सीआईएसएफ में 75 हैं...

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The families of CAPF jawans killed on duty are suffering, they are not getting government jobs even on compassionate grounds
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान। - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

ड्यूटी के दौरान मारे गए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों के परिजनों को सरकारी नौकरी के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। पिछले तीन साल के दौरान विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में महज पचास फीसदी आवेदकों को ही सरकारी नौकरी मिल सकी है। 2017 में 1176 आवेदन आए थे, जिनमें से 580 परिजनों को नौकरी पर रखा गया। 2018 में 1291 आवेदन जमा हुए थे। इनमें से 630 आवेदकों को सरकारी नौकरी के लिए बुला लिया गया। गत वर्ष 1209 आवेदकों ने सरकारी नौकरी के लिए फार्म भरा, जिनमें 390 लोगों को नौकरी मिल गई। 2019 के दौरान छत्तीसगढ़ में छह आवेदकों ने फार्म जमा कराया था, लेकिन किसी को भी सरकारी नौकरी नहीं मिल सकी।

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केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बुधवार को लोकसभा में बताया कि मौजूदा समय में अनुकंपा आधार पर नौकरी देने के कई मामले लंबित हैं। सीआरपीएफ में ऐसे मामलों की संख्या 37, बीएसएफ में 24, आईटीबीपी में 155 और सीआईएसएफ में 75 हैं। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के दिशानिर्देशों के अनुसार, 'समूह ग' के पदों में सीधी भर्ती कोटा के अंतर्गत आने वाली रिक्तियों की अधिकतम सीमा पांच फीसदी तक ही अनुकंपा आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं।
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यह एक निरंतर जारी रहने वाली प्रक्रिया है। पूर्व अर्धसैनिक बल कल्याण संघ (कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन) के महासचिव रणबीर सिंह का कहना है कि देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले कर्मियों के परिजनों को नौकरी के लिए चक्कर काटने पड़ रहे हैं। केंद्र सरकार ने कर्मियों की पेंशन तो पहले से ही बंद कर रखी है। अर्धसैनिक बलों के कल्याण की कई योजनाएं अधर में लटकी हैं। सरकार को चाहिए कि अनुकंपा आधारित नौकरी देने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की जाए। घर में जब एक कमाने वाला हो और वही शहीद हो जाए तो उस परिवार पर किस तरह से संकटों का पहाड़ टूटता है, इसका अंदाजा हर कोई नहीं लगा सकता।

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ड्यूटी के दौरान मारे गए कर्मियों की संख्या 

 

न राज्यों में मिली सबसे कम नौकरियां

2019 के दौरान छत्तीसगढ़ में छह आवेदकों ने फार्म जमा कराया था, लेकिन किसी को भी नौकरी नहीं मिल सकी। मिजोरम, सिक्किम और तेलंगाना में तीन-तीन आवेदक सामने आए थे, मगर इनमें से एक को नौकरी दी गई। केरल में 23 आवेदन आए थे, जिनमें से तीन को सरकारी नौकरी मिली थी। यानी केवल 13 फीसदी आवेदकों को सरकारी नौकरी पर रखा गया। 

इन राज्यों को मिले  अनुकंपा आधारित नौकरी के लिए आए ज्यादा आवेदन

यूपी में 204 आवेदन आए, जिनमें 85 आवेदकों यानी 41.66 फीसदी को नौकरियां मिलीं। उत्तराखंड में 147 में से 53 आवेदकों (36.05 फीसदी) को सरकारी नौकरियां दी गईं। बिहार में 112 आवेदन आए, जिनमें से 37 को यानी 33.03 फीसदी को नौकरी मिल सकी है। असम में 110 में से 17 आवेदकों को (15.45 फीसदी) नौकरी पर रखा गया। हरियाणा में 86 में 34 आवेदकों यानी 39.53 फीसदी को नौकरी मिल पाई है।

किस राज्य में मिली कितने आवेदकों को नौकरी...

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