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Maharashtra: 'तीन से अधिक बच्चों को पैदा करने की जरूरत', मोहन भागवत के बयान पर मचा घमासान; विपक्ष ने उठाए सवाल
Sun, 01 Dec 2024 06:38 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: श्वेता महतो
Updated Sun, 01 Dec 2024 06:38 PM IST
सार
Mohan Bagwat: मोहन भागवत ने कहा कि, प्रजनन दर 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए। हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी। किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए।
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मोहन भागवत
- फोटो : PTI
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने जनसंख्या में गिरावट को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आधुनिक जनसंख्या विज्ञान का हवाला देते हुए बताया कि जब किसी समाज की जनसंख्या (प्रजनन दर) 2.1 से नीचे चला जाता है तो वह समाज धीरे-धीरे पृथ्वी से लुप्त होने की कगार पर होता है। भागवत ने आगे कहा कि दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने की आवश्यकता है। हालांकि, उनके इस बयान पर विपक्ष ने प्रतिक्रिया दी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता तारिक अनर ने कहा कि भागवत का बयान दिखाता है कि आरएसएस दिग्भ्रमित हो गया है।
जनसंख्या कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि...
तारिक अनवर ने कहा, 'एक तरफ बीजेपी नेता आरोप लगाते हैं कि मुसलमान ज़्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं, उनकी आबादी बढ़ रही है, इसे रोका जाना चाहिए और 2 से ज़्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए। दूसरी तरफ मोहन भागवत कह रहे हैं कि जनसंख्या कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह हमारी सभ्यता और विरासत के लिए हानिकारक है।' कांग्रेस नेता ने इस बयान को हैरानी भरा करार दिया।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "जनसंख्या में गिरावट चिंता का विषय है। आधुनिक जनसंख्या विज्ञान कहता है कि जब किसी समाज की जनसंख्या (प्रजनन दर) 2.1 से नीचे चली जाती है तो वह समाज पृथ्वी से लुप्त हो जाता है। संकट न होने पर भी वह समाज नष्ट हो जाता है। इस तरह अनेक भाषाएं और समाज नष्ट हो गए। जनसंख्या 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए। हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी। इसमें यह भी कहा गया है कि किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए। जनसंख्या विज्ञान का कहना है कि हमें दो या तीन से अधिक बच्चे पैदा करने की आवश्यकता है। समाज को जीवित रखने के लिए संख्या महत्वपूर्ण है।"
भागवत के बयान पर विपक्ष ने दी प्रतिक्रिया
मोहन भागवत के बयान पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद नने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से मोहन भागवत जो कुछ कहते हैं, उससे भाजपा को असहज हो जाती है। पिछली बार भी जब मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में मंदिर क्यों ढूंढना, तब भी भाजपा के पास कोई जवाब नहीं था। भाजपा पूरे देश की जनसंख्या को लेकर राजनीति कर रही है।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघर ने भी मोहन भागवत के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जो पहले से हैं उनको तो नौकरियां दिलवा दो, नौकरियां है नहीं, फसल की जमीन कम हो रही हैं। मोहन भागवत चाहते हैं कि दो से ज्यादा बच्चे हों। देश में बेरोजगारी बढ़ रही हैआज के युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रही फसल की जमीने कम होती जा रही है जबकि जनसंख्या बढ़ती जा रही है। मोहन भागवत चीन से सीख नहीं ले पा रहे और वो जनसंख्या के मामले में देश को शक्तिशाली बनाना चाहते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा सुझाव है कि मोहन भागवत, पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शुरुआत करनी चाहिए। इन्हें जनसंख्या की इतनी चिंता है तो शुरुआत भी इन्हीं से होनी चाहिए।"
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "भागवत जी कहते हैं कि जनसंख्या बढ़ानी चाहिए, लेकिन क्या वह यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चों को कुछ फायदा मिले? क्या वह गरीब परिवारों को हर महीने 1500 रुपये देंगे?" मोहन भागवत के बयान पर देशभर में बहस तेज हो गई।
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#WATCH | Delhi: On RSS Chief Mohan Bhagwat's statement, Congress leader Tariq Anwar says, "The Sangh family seems confused. On one hand, the BJP leaders allege that Muslims are reproducing more children, their population is increasing, it should be stopped and there should not be… pic.twitter.com/NRVvCPuMDJ
— ANI (@ANI) December 1, 2024
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जनसंख्या कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि...
तारिक अनवर ने कहा, 'एक तरफ बीजेपी नेता आरोप लगाते हैं कि मुसलमान ज़्यादा बच्चे पैदा कर रहे हैं, उनकी आबादी बढ़ रही है, इसे रोका जाना चाहिए और 2 से ज़्यादा बच्चे नहीं होने चाहिए। दूसरी तरफ मोहन भागवत कह रहे हैं कि जनसंख्या कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि यह हमारी सभ्यता और विरासत के लिए हानिकारक है।' कांग्रेस नेता ने इस बयान को हैरानी भरा करार दिया।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, "जनसंख्या में गिरावट चिंता का विषय है। आधुनिक जनसंख्या विज्ञान कहता है कि जब किसी समाज की जनसंख्या (प्रजनन दर) 2.1 से नीचे चली जाती है तो वह समाज पृथ्वी से लुप्त हो जाता है। संकट न होने पर भी वह समाज नष्ट हो जाता है। इस तरह अनेक भाषाएं और समाज नष्ट हो गए। जनसंख्या 2.1 से नीचे नहीं जानी चाहिए। हमारे देश की जनसंख्या नीति 1998 या 2002 में तय की गई थी। इसमें यह भी कहा गया है कि किसी समाज की जनसंख्या 2.1 से कम नहीं होनी चाहिए। जनसंख्या विज्ञान का कहना है कि हमें दो या तीन से अधिक बच्चे पैदा करने की आवश्यकता है। समाज को जीवित रखने के लिए संख्या महत्वपूर्ण है।"
भागवत के बयान पर विपक्ष ने दी प्रतिक्रिया
मोहन भागवत के बयान पर समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद नने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ समय से मोहन भागवत जो कुछ कहते हैं, उससे भाजपा को असहज हो जाती है। पिछली बार भी जब मोहन भागवत ने कहा था कि हर मस्जिद में मंदिर क्यों ढूंढना, तब भी भाजपा के पास कोई जवाब नहीं था। भाजपा पूरे देश की जनसंख्या को लेकर राजनीति कर रही है।
कांग्रेस नेता उमंग सिंघर ने भी मोहन भागवत के बयान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "जो पहले से हैं उनको तो नौकरियां दिलवा दो, नौकरियां है नहीं, फसल की जमीन कम हो रही हैं। मोहन भागवत चाहते हैं कि दो से ज्यादा बच्चे हों। देश में बेरोजगारी बढ़ रही हैआज के युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रही फसल की जमीने कम होती जा रही है जबकि जनसंख्या बढ़ती जा रही है। मोहन भागवत चीन से सीख नहीं ले पा रहे और वो जनसंख्या के मामले में देश को शक्तिशाली बनाना चाहते हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मेरा सुझाव है कि मोहन भागवत, पीएम मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शुरुआत करनी चाहिए। इन्हें जनसंख्या की इतनी चिंता है तो शुरुआत भी इन्हीं से होनी चाहिए।"
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "भागवत जी कहते हैं कि जनसंख्या बढ़ानी चाहिए, लेकिन क्या वह यह सुनिश्चित करेंगे कि बच्चों को कुछ फायदा मिले? क्या वह गरीब परिवारों को हर महीने 1500 रुपये देंगे?" मोहन भागवत के बयान पर देशभर में बहस तेज हो गई।