CRPF के इस जांबाज को मिला बहादुरी का 7वां पदक, घाटी में 50 से ज्यादा आतंकियों को ठिकाने लगा चुका है उनका दस्ता
सहायक कमांडेंट नरेश कुमार को इस साल 26 जनवरी को भी बहादुरी का पदक मिला था। वे 2016 से लेकर 2019 तक कश्मीर में तैनात वेली क्यूएटी के सदस्य रहे हैं। चूंकि नरेश कुमार ने एनएसजी एवं ऐसे ही दूसरे संस्थानों से प्रशिक्षण लिया है...
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देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' जो नक्सल प्रभावित क्षेत्र, उत्तर पूर्व और कश्मीर में अपनी बहादुरी का लोहा मनवा चुका है, 74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर इस बल के 55 बहादुरों को 'पीएमजी' से नवाजा गया है। पुलिस मेडल फॉर गैलेंट्री की इस सूची में एक नाम ऐसा भी है, जिसने 7वीं बार यह मेडल हासिल कर एक रिकॉर्ड बनाया है।
मोहाली 'पंजाब' के रहने वाले सीआरपीएफ के सहायक कमांडेंट नरेश कुमार को जनवरी 2018 को छोड़कर लगभग हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर बहादुरी का मेडल मिला है। मेडल मिलने का यह सिलसिला 2017 से शुरू हुआ था।
कश्मीर में वैली क्यूएटी कमांडर रहते हुए उनकी टीम ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर श्रीनगर एवं उसके आसपास के शहरी इलाकों में 50 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था।
सहायक कमांडेंट नरेश कुमार को इस साल 26 जनवरी को भी बहादुरी का पदक मिला था। वे 2016 से लेकर 2019 तक कश्मीर में तैनात वैली क्यूएटी के सदस्य रहे हैं। चूंकि नरेश कुमार ने एनएसजी एवं ऐसे ही दूसरे संस्थानों से प्रशिक्षण लिया है, इसलिए उन्होंने लंबे समय तक वैली क्यूएटी का नेतृत्व किया है।
इस बार उन्हें बहादुरी का जो पदक मिला है, वह तीन अक्तूबर 2017 की घटना से जुड़ा है। जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों ने श्रीनगर एयरपोर्ट या उसके आसपास किसी सुरक्षा बल के कैंप पर फिदायीन हमला करने की योजना बनाई थी।
इस बाबत खुफिया अलर्ट भी मिला था। नरेश की टीम रोजाना वहां का दौरा कर रही थी। वैली क्यूएटी का घेरा इतना मजबूत था कि आतंकियों को अपना टारगेट बदलना पड़ा। उन्होंने तड़के तीन बजे एयरपोर्ट के साथ लगते सुरक्षा बल के एक कैंप पर हमला कर दिया। वेली क्यूएटी तुरंत वहां पहुंची। चारों तरफ से मोर्चाबंदी कर ली गई।
यह ऑपरेशन करीब 12 घंटे चला था। इसमें स्थानीय पुलिस भी साथ रही। अंदर से हैवी फायरिंग हो रही थी।
सीआरपीएफ की वर्दी पहने आतंकी क्यूएटी में शामिल हो गया था
ऑपरेशन के दौरान टीयर गैस और हैंड ग्रेनेड का इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा आतंकियों के पास दूसरे बड़े हथियार भी थे। क्यूएटी ने जब एक के बाद एक टीयर गैस के दर्जनों गोले अंदर फेंके तो आतंकियों को सामने आना पड़ा। खास बात यह रही कि आतंकियों ने सीआरपीएफ की वर्दी पहन रखी थी।
जब धुआं खत्म हुआ तो मालूम चला कि एक आतंकी हमारी टीम के साथ बैठा हुआ था। हमारे जवानों को उसकी ड्रेस और पाउच पर कुछ शक हुआ। इससे पहले कि उसे पकड़ पाते, दूसरी ओर से आरएल फायर हो गया। चारों तरफ धुआं फैल गया। आतंकियों ने फायरिंग भी शुरू कर दी थी।
इसका फायदा उठाकर वह अपने साथियों से जा मिला। बाद में तीनों आतंकवादी मारे गए। उस मुठभेड़ में बीएसएफ का एक हवलदार घायल हो गया था। सीआरपीएफ क्यूएटी ने ही उसे सुरक्षित बाहर निकाला था। 15 अगस्त 2018 को नरेश कुमार को बहादुरी के दो पदक प्रदान किए गए।
जनवरी 2019 और अगस्त 2019 में भी एक एक पदक मिला। नरेश कुमार को अर्बन टेरेरिज्म से निपटने में खासी महारत हासिल है।