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कोयला खनन पर आमने-सामने गहलोत और बघेल: राजस्थान में ब्लैकआउट के आशंका के चलते पीएम दरबार पहुंचा मामला

Wed, 15 Dec 2021 06:42 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Wed, 15 Dec 2021 06:42 PM IST
सार

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर कहा कि 12 दिसंबर की रैली में राजस्थान के मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने मंच साझा किया। भाषणबाजी की। कोयले की बात तब क्यों नहीं की? पत्राचार की ड्रामेबाजी अर्थहीन है...

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The Congress government of Rajasthan and Chhattisgarh disputed over the issue of coal mining
ashok gehlot and bhupesh baghel - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

कोयला खनन के मुद्दे पर राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार आमने-सामने हो गई हैं। कोयला संकट के चलते राजस्थान में बिजली उत्पादन पर असर पड़ रहा है। दोनों ही प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार है, लेकिन संकट के इस दौरान में दोनों एक-दूसरे की मदद को तैयार नहीं हैं। जिसकी वजह से राजस्थान के कई जिलों को ब्लैकआउट का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ते संकट को देखते हुए राजस्थान की सरकार ने केंद्र सरकार से भी मदद की गुहार लगाई हैं। प्रदेश सरकार कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार दो कोल ब्लॉक शुरू करने और दो अन्य खदानों में उत्पादन बढ़ाने की योजना को रोक रही है। इधर, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री और राजस्थान के वरिष्ठ भाजपा नेता गजेंद्र सिंह शेखावत ने राजस्थान में बढ़ते कोयला संकट पर सीएम गहलोत को आड़े हाथों लिया है। शेखावत ने कहा कि जयपुर रैली में दोनों मुख्यमंत्रियों ने मंच साझा करने के दौरान कोयले की बात क्यों नहीं की। राजस्थान को संकट नहीं समाधान चाहिए।

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दरअसल, राजस्थान सरकार को छत्तीसगढ़ में आवंटित पारसा कोल ब्लॉक खान में खनन के लिए छत्तीसगढ़ सरकार मंजूरी नहीं दे रही है। जिससे प्रदेश में कोयला संकट गहराता जा रहा हैं। कोयला संकट के दौर में राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उच्चस्तरीय चर्चा कर दो नवंबर को कोयला मंत्रालय से इस खनन के लिए क्लीयरेंस जारी करवाई थी। जबकि इसके पहले प्रदेश सरकार को वन, पर्यावरण और जलवायु मंत्रालय अपने स्तर पर खनने के लिए अपनी मंजूरी प्रदान कर चुका था। दो संबंधित अहम मंत्रालयों से राजस्थान सरकार को मंजूरी मिलने के बाद भी छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने अपने स्तर से क्लीयरेंस की फाइल को अटका दिया है। इसके बाद से ही दोनों सरकारों के बीच तनाव बढ़ गया है।

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केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से कोई एक्शन नहीं होता देख राजस्थान की सरकार ने इस मामले में केंद्र सरकार के दरवाजे खटखटाए हैं। राजस्थान ने केंद्र सरकार से कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार दो कोल ब्लॉक शुरू करने और दो अन्य खदानों में उत्पादन बढ़ाने की योजना को रोक रही है। प्रदेश सरकार की तरफ से छत्तीसगढ़ वन विभाग से क्लीयरेंस को लेकर कई बार अनुरोध किया, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। राजस्थान के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने कोल और पावर सेक्रेटरी अनिल जैन और आलोक कुमार को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। जैन और कुमार को अलग-अलग लिखे गए पत्रों में, अग्रवाल ने राजस्थान की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने किए खदानों में उत्पादन शुरू करने और बढ़ाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।

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राजस्थान के कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में परसा, परसा पूर्व, कांता बसन और कांटे एक्सटेंशन में हैं। इनमें से तीन ब्लॉक 2015 में राजस्थान को 4,340 मेगावाट उत्पादन क्षमता को बढ़ावा देने के लिए आवंटित किए गए थे। हसदेव अरंड वन क्षेत्र में स्थित ब्लॉक और खदान आदिवासियों के विरोध में रहे हैं, जिन्होंने इसी साल अक्तूबर में क्षेत्र में खनन का विरोध किया था।

सीएम गहलोत भी लिख चुके हैं पत्र

कोयला संकट को देखते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी छत्तीसगढ़ के सीएम बघेल को पत्र लिखकर जरूरी स्वीकृति जारी करने का आग्रह भी कर चुके हैं। लेकिन अभी तक इस मुद्दे पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है। इसके अलावा राजस्थान सरकार के उर्जा विभाग के अफसर लगातार छत्तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों से जल्द स्वीकृति करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक खनन से जुड़ी कोई स्वीकृति जारी नहीं हुई है।

छत्तीसगढ़ सरकार ने लटका रखा है मामला

इधर, राजस्थान को छत्तीसगढ़ में आवंटित परसा कोल ब्लॉक में अब तक हुए खनन से कोयला खत्म होने के कगार पर है। खान में मौजूद कोयला दिसंबर माह के लिए काफी हो सकता हैं। परसा कोल ब्लॉक से खनन की मंजूरी केंद्रीय कोयला और वन मंत्रालय ने तो दी है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने मामले को लटका दिया है। ऐसे में राजस्थान कोयला नहीं निकाल पा रहा है। दरअसल, कोल ब्लॉक की जमीन छत्तीसगढ़ के वन विभाग क्षेत्र में आती है। आदिवासी क्षेत्र में कुछ नेता और स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। आदिवासी वोट बैंक को देखते हुए बघेल सरकार इसकी मंजूरी देने से बचते हुए दिखाई दे रही है।

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने साधा निशाना

इधर, कोयला संकट पर भाजपा ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत को आड़े हाथों लिया है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ट्वीट कर कहा कि 12 दिसंबर की रैली में राजस्थान के मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने मंच साझा किया, भाषणबाजी की। कोयले की बात तब क्यों नहीं की? पत्राचार की ड्रामेबाजी अर्थहीन है। सामने मिलकर बात बना नहीं पाए तो चिट्ठियां लिखकर क्या बिजली बनाओगे जादूगर जी? राजस्थान को संकट नहीं समाधान चाहिए। वैसे संकट का एक मतलब कांग्रेस भी होता है।



इस कोल ब्लॉक से राजस्थान को रोजाना 12 हजार टन यानी करीब तीन रैक कोयला मिलेगा। मोटे अनुमान के अनुसार यहां से पांच मिलियन टन कोयला हर साल निकाला जा सकेगा। इस नए ब्लॉक से सालाना एक हजार रैक से ज्यादा कोयला मिलने की संभावना है। अगले 30 साल के लिए 150 मिलियन टन कोयले का भंडार है। इससे राजस्थान केंद्र की कोल इंडिया और सब्सिडियरी कंपनियों पर कम निर्भर रहेगा।

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