{"_id":"58d9aba14f1c1bda3763db72","slug":"the-attempt-of-suicide-of-psychiatric-patients-is-no-crime","type":"story","status":"publish","title_hn":"खुदकुशी की कोशिश अब अपराध नहीं, संसद में विधेयक पास","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
खुदकुशी की कोशिश अब अपराध नहीं, संसद में विधेयक पास
amarujala.com- presented by: संदीप भ्ाट्ट
Updated Tue, 28 Mar 2017 08:12 AM IST
विज्ञापन
एजेंसी/नई दिल्ली। मानसिक रोगियों की ओर से किए गए खुदकुशी के प्रयास को अब अपराध नहीं माना जाएगा। संसद ने सोमवार को मानसिक रोगियों की ओर से आत्महत्या की कोशिश को अपराध की श्रेणी से हटाने वाला विधेयक पास कर दिया। साथ ही मानसिक रोग से ग्रस्त मरीजों को बेहतर उपचार का भी अधिकार मिलेगा। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने लोकसभा में बिल पास होने से ठीक पहले कहा कि मेंटल हेल्थकेयर बिल में मानसिक रूप से बीमार लोगों के लिए संपत्ति के अधिकार को बहाल करने का भी प्रावधान किया गया है।
यह विधेयक सदन में वॉइस वोट से पास हो गया। विपक्ष द्वारा पेश किए गए संशोधन को खारिज कर दिया गया। इस बिल को 134 संशोधनों के साथ राज्यसभा ने पिछले साल अगस्त में ही पास कर दिया था। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक मानसिक रूप से बीमार लोगों द्वारा आत्महत्या के प्रयास को आईपीसी की धारा में गैर दंडनीय किया गया है। बिल में मनोरोगी को देखभाल, उपचार और पुनर्वास सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उनके अधिकारों और प्रतिष्ठा में कोई दखल नहीं देगा। यह विधेयक सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाया गया।
बिल के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान :
महत्वपूर्ण तथ्य :
मानसिक रोगियों के लिए अभी महज 4500 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, जबकि ऐसे प्रति एक लाख रोगियों के लिए 12,500 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 3000 नर्सों की जरूरत है। मानसिक रूप से बीमार लोगों पर शोध के लिए एक भी पीएचडी की सीट नहीं है। चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि मानसिक रोगियों के लिए पर्याप्त फंड की व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
यह विधेयक सदन में वॉइस वोट से पास हो गया। विपक्ष द्वारा पेश किए गए संशोधन को खारिज कर दिया गया। इस बिल को 134 संशोधनों के साथ राज्यसभा ने पिछले साल अगस्त में ही पास कर दिया था। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक मानसिक रूप से बीमार लोगों द्वारा आत्महत्या के प्रयास को आईपीसी की धारा में गैर दंडनीय किया गया है। बिल में मनोरोगी को देखभाल, उपचार और पुनर्वास सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई है। उनके अधिकारों और प्रतिष्ठा में कोई दखल नहीं देगा। यह विधेयक सभी हितधारकों से व्यापक विचार-विमर्श के बाद लाया गया।
विज्ञापन
बिल के अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान :
- महिलाओं को सामुदायिक आधार पर ही विशेष उपचार का प्रावधान किया गया है।
- मानसिक रोग से ग्रस्त लोगों को संपत्ति का अधिकार भी बहाल होगा।
- बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति की नसबंदी या नलबंदी नहीं की जाएगी, जरूरत पड़ने पर निमहांस का विस्तार किया जाएगा।
महत्वपूर्ण तथ्य :
मानसिक रोगियों के लिए अभी महज 4500 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, जबकि ऐसे प्रति एक लाख रोगियों के लिए 12,500 विशेषज्ञ डॉक्टरों और 3000 नर्सों की जरूरत है। मानसिक रूप से बीमार लोगों पर शोध के लिए एक भी पीएचडी की सीट नहीं है। चर्चा के दौरान सदस्यों ने कहा कि मानसिक रोगियों के लिए पर्याप्त फंड की व्यवस्था नहीं की गई है।
विज्ञापन