Malabar Exercise: जापान में आयोजित मालाबार युद्धाभ्यास का 26वां संस्करण संपन्न, भारतीय नौसेना ने दिखाया दम
इस युद्धाभ्यास में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व पूर्वी बेड़े के जंगी जहाजों शिवालिक और कमोर्ता द्वारा किया गया। इनका नेतृत्व भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग कमांडिंग ऑफिसर रियर एडमिरल संजय भल्ला ने किया।
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जापान के योकोसूका में नौ नवंबर से चल रहे चार देशों का युद्धाभ्यास मंगलवार को संपन्न हो गया। भारतीय नौसेना के पूर्वी कमान ने बताया कि बहुराष्ट्रीय समुद्री अभ्यास मालाबार 22 का 26वां संस्करण 15 नवंबर को जापान के समुद्र में समाप्त हुआ। यह युद्धाभ्यास जापान मैरीटाइम सेल्फ डिफेंस फोर्स (जेएमएसडीएफ) द्वारा आयोजित किया गया। इस संस्करण ने अभ्यास की 30वीं वर्षगांठ को भी चिह्नित किया। इस युद्धाभ्यास में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया। ये चारों देश चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) यानी क्वाड (QUAD) का भी हिस्सा हैं।
1992 में शुरू हुआ था मालाबार युद्धाभ्यास
इस युद्धाभ्यास में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व पूर्वी बेड़े के जंगी जहाजों शिवालिक और कमोर्ता द्वारा किया गया। इनका नेतृत्व भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े के फ्लैग कमांडिंग ऑफिसर रियर एडमिरल संजय भल्ला ने किया। मालाबार अभ्यास 1992 में भारत और अमेरिका की नौसेनाओं के बीच द्विपक्षीय अभ्यास के रूप में शुरू हुआ था और ऑस्ट्रेलियाई और जापानी नौसेनाओं के शामिल होने से इसे लोकप्रियता प्राप्त हुई। जापान मालाबार युद्धाभ्यास का हिस्सा 2015 में बना जबकि 2020 में ऑस्ट्रेलिया ने पहली बार इस युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।
दक्षिण व पूर्वी चीन सागर में चीन के बढ़ते सैन्य दखल से उत्पन्न वैश्विक चिंताओं के बीच चारों देशों ने यह युद्धाभ्यास किया। अभ्यास में कई डोमेन के साथ-साथ जटिल सतह, उप-सतह और वायु संचालन में ‘उच्च गति’ अभ्यास देखा गया, जिसमें लाइव फायरिंग ड्रिल भी शामिल है।
भारत के दोनों जंगी जहाजों की खासियत
आईएनएस शिवालिक ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों से लैस है। इसके साथ ही यह पानी की गहराई में भी दुश्मनों को खोज निकालने और उन्हें तबाह करने में सक्षम है। आईएनएस शिवालिक करीब 50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार में पानी पर दौड़ता है। वहीं आईएनएस कमोर्ता को रडार में पकड़ पाना बेहद ही मुश्किल है। इसकी रेंज करीब 6500 किमी है। यह 200 किमी तक मौजूद सभी पनडुब्बियों तक की जानकारी देता है। यह परमाणु, जैविक और रासायनिक युद्ध लड़ने में सक्षम है। आईएनएस कमोर्ता को नेवी के प्रोजेक्ट-28 के तहत बनाया गया है। जिसका 90 फीसदी हिस्सा भारत में ही विकसित किया गया है।