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फर्जी कॉल सेंटर: अमेरिकियों को ठग हर साल कमाते थे 400 करोड़, 772 गिरफ्तार
सुरेंद्र मिश्र/ मुंबई
Updated Thu, 06 Oct 2016 02:19 AM IST
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मुंबई से सटे ठाणे जिले के मीरा रोड इलाके में पुलिस ने अमेरिकियों को ठगने वाले नौ कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। जहां, अमेरिकन खासकर अप्रवासी भारतीयों से टैक्स रिवीजन के नाम पर ठगी की जाती थी और 300 से 400 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार होता था, जिसकी खबर खुफिया एजेंसियों को भी नहीं थी। देश के किसी भी कॉल सेंटर में संगठित गिरोह के तौर पर ठगी करने का यह पहला मामला सामने आया है।
ठाणे के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को देर रात कॉल सेंटर पर छापेमारी शुरू की जो बुधवार की सुबह पांच बजे तक चली। इस छापेमारी में कुल 772 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसमें से 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 72 ट्रेनी और 630 कर्मचारियों को जांच में सहयोग की हिदायत देकर छोड़ा गया है।
इस कॉल सेंटर में उन युवाओं को नौकरी पर रखा जाता था जो अमेरिकियों की तरह अंग्रेजी बोलते थे। इसकी उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती थी। कर्मचारियों को 30 से 60 हजार रुपये सैलरी और ज्यादा चूना लगाने वाले को प्रोत्साहन राशि भी दिया जाता था। पकड़े गए लोगों में कॉल सेंटर के मालिक, कॉल सेंटर के अधिकारी और कई महिलाएं भी शामिल हैं। छापेमारी के दौरान एक करोड़ रुपये से ज्यादा का सामान जब्त किया गया है जिसमें कंप्यूटरों के 800 हार्ड डिस्क शामिल हैं। पुलिस को कई कॉल रिकॉर्ड भी मिले हैं जिससे पता चलता है कि आरोपी किस तरह ठगी करते थे।
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पुलिस आयुक्त सिंह ने बताया कि क्राइम ब्रांच को मीरा रोड के हरिओम आईटी पार्क में युनिवर्सल आउट सोर्सिंग सर्विसेस, ओसवाल हाउस और शिवार गार्डन नाम के कॉल सेंटर से विदेशियों को धमकियां मिल रही थी और उनसे 10 हजार डॉलर की मांग की जा रही थी। इसकी पुख्ता जानकारी मिलने के बाद करीब 40 पुलिस अधिकारियों और 120 पुलिस की टीम ने डेल्टा टॉवर की सातवीं मंजिल पर छापेमारी की जहां से ठगी का यह धंधा चलाया जा रहा था। आरोपियों के खिलाफ नया नगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
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ठाणे के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह ने इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को देर रात कॉल सेंटर पर छापेमारी शुरू की जो बुधवार की सुबह पांच बजे तक चली। इस छापेमारी में कुल 772 लोगों को हिरासत में लिया गया था। इसमें से 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 72 ट्रेनी और 630 कर्मचारियों को जांच में सहयोग की हिदायत देकर छोड़ा गया है।
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इस कॉल सेंटर में उन युवाओं को नौकरी पर रखा जाता था जो अमेरिकियों की तरह अंग्रेजी बोलते थे। इसकी उन्हें ट्रेनिंग भी दी जाती थी। कर्मचारियों को 30 से 60 हजार रुपये सैलरी और ज्यादा चूना लगाने वाले को प्रोत्साहन राशि भी दिया जाता था। पकड़े गए लोगों में कॉल सेंटर के मालिक, कॉल सेंटर के अधिकारी और कई महिलाएं भी शामिल हैं। छापेमारी के दौरान एक करोड़ रुपये से ज्यादा का सामान जब्त किया गया है जिसमें कंप्यूटरों के 800 हार्ड डिस्क शामिल हैं। पुलिस को कई कॉल रिकॉर्ड भी मिले हैं जिससे पता चलता है कि आरोपी किस तरह ठगी करते थे।
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पुलिस आयुक्त सिंह ने बताया कि क्राइम ब्रांच को मीरा रोड के हरिओम आईटी पार्क में युनिवर्सल आउट सोर्सिंग सर्विसेस, ओसवाल हाउस और शिवार गार्डन नाम के कॉल सेंटर से विदेशियों को धमकियां मिल रही थी और उनसे 10 हजार डॉलर की मांग की जा रही थी। इसकी पुख्ता जानकारी मिलने के बाद करीब 40 पुलिस अधिकारियों और 120 पुलिस की टीम ने डेल्टा टॉवर की सातवीं मंजिल पर छापेमारी की जहां से ठगी का यह धंधा चलाया जा रहा था। आरोपियों के खिलाफ नया नगर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
कैसे करते थे ठगी
कॉल सेंटर में वीओआईपी के जरिए फोन किया जाता था जिसमें ऐसी तकनीक बनाई गई थी कि जिस शख्स को फोन किया जाता था उसे अमेरिकन इंटरनल रेवेन्यू सर्विसेस (आईआरएस) का नंबर दिखाई देता था। कॉल सेंटर के ठगों ने अमेरिकी अधिकारियों के नाम और बैच नंबर भी हासिल कर रखे थे। वे खुद को अधिकारी बताकर अमेरिकी नागरिकों को फोन करते थे। अमेरिकी नागरिकों को बताया जाता था कि उन्होंने सही टैक्स नहीं अदा किया है।
आईआरएस कुछ ही देर में उनके खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई शुरू करेगी और कार्रवाई के बाद उन्हें तीन महीने जेल में रहना होगा, सिक्योरिटी नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा, गाड़ी का लाइसेंस रद्द हो जाएगा, नौकरी भी चली जाएगी। अगर इससे बचना चाहते हैं तो 10 हजार डॉलर तुरंत बताए गये खाते में जमा करा दें। इसके बाद उनसे मोलभाव किया जाता था और कम से कम दो से तीन हजार डॉलर वसूल किए जाते थे। इसमें से 30 प्रतिशत हिस्सा रैकेट में शामिल अमेरिकी को मिलता था जबकि 70 प्रतिशत रकम भारत में काम करने वालों को मिलती थी। इस ठगी के नौ मास्टर माइंड हैं।
करोड़ों की ठगी अमेरिकियों को नहीं पता
पुलिस कमिश्नर सिंह ने बताया कि कॉल सेंटर के जरिए ठगी के मामले में अमेरिका से कोई शिकायत नहीं मिली है। हम वहां के अधिकारियों से जल्द ही संपर्क करेंगे। जांच में पता चला है कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों को रोजाना एक-डेढ़ करोड़ का चूना लगा रहे थे। पुलिस को शक है कि आरोपी अब तक 3500 अमेरिकी नागरिकों को ठगा है और 36 हजार मिलियन डॉलर से ज्यादा का फ्रॉड किया गया है। पुलिस इस मामले में अमेरिकी जांच एजेंसियों से भी सहयोग लेने पर विचार कर रही है।
आईआरएस कुछ ही देर में उनके खिलाफ छापेमारी की कार्रवाई शुरू करेगी और कार्रवाई के बाद उन्हें तीन महीने जेल में रहना होगा, सिक्योरिटी नंबर ब्लॉक कर दिया जाएगा, गाड़ी का लाइसेंस रद्द हो जाएगा, नौकरी भी चली जाएगी। अगर इससे बचना चाहते हैं तो 10 हजार डॉलर तुरंत बताए गये खाते में जमा करा दें। इसके बाद उनसे मोलभाव किया जाता था और कम से कम दो से तीन हजार डॉलर वसूल किए जाते थे। इसमें से 30 प्रतिशत हिस्सा रैकेट में शामिल अमेरिकी को मिलता था जबकि 70 प्रतिशत रकम भारत में काम करने वालों को मिलती थी। इस ठगी के नौ मास्टर माइंड हैं।
करोड़ों की ठगी अमेरिकियों को नहीं पता
पुलिस कमिश्नर सिंह ने बताया कि कॉल सेंटर के जरिए ठगी के मामले में अमेरिका से कोई शिकायत नहीं मिली है। हम वहां के अधिकारियों से जल्द ही संपर्क करेंगे। जांच में पता चला है कि आरोपी अमेरिकी नागरिकों को रोजाना एक-डेढ़ करोड़ का चूना लगा रहे थे। पुलिस को शक है कि आरोपी अब तक 3500 अमेरिकी नागरिकों को ठगा है और 36 हजार मिलियन डॉलर से ज्यादा का फ्रॉड किया गया है। पुलिस इस मामले में अमेरिकी जांच एजेंसियों से भी सहयोग लेने पर विचार कर रही है।