लॉकडाउन के नुकसान में अपना फायदा तलाश रहे आतंकी और नक्सली, निशाने पर हैं बेरोजगार युवा

जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 22 Apr 2020 12:26 PM IST

सार

  • कश्मीर में जैश, हिजबुल और लश्कर-ए-तैयबा अपनी जड़ें मजबूत करने की फिराक में
  • छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा जैसे राज्यों में नई भर्ती के लिए नक्सलियों ने गांवों में संपर्क बढ़ाया
श्रीनगर में सुरक्षाबल
श्रीनगर में सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला (फाइल)
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विस्तार

कोरोना के कारण लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर का आतंकी संगठन और नक्सली भी फायदा उठाने में जुट गए हैं। सुरक्षा एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार नक्सलियों से लेकर आतंकी संगठनों तक ने इसके लिए अपने स्लीपर सेल को सक्रिय करना शुरू कर दिया है।
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इन संगठनों का मानना है कि लॉकडाउन के बाद बेरोजगार हुए युवाओं को भर्ती कर सकेंगे। खुफिया एजेंसी से मिल रही इस तरह की रिपोर्ट ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। सूचना है कि कश्मीर में जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा अपनी जड़ें मजबूत करने की फिराक में हैं।

अन्य राज्यों में बढ़ी हलचल.....नक्सली भी सक्रिय

उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, केरल, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल व महाराष्ट्र में से भी नक्सलियों की इसी तरह की सक्रियता के इनपुट आ रहे हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड, उड़ीसा जैसे राज्यों में नई भर्ती के लिए नक्सलियों ने गांवों में संपर्क बढ़ा दिया है।

सीआरपीएफ की इन सभी घटनाक्रमों पर बारीकी से नजर है। सुरक्षाबल के डीआईजी इंटेलीजेंस एम. दिनाकरण कहते हैं, वहां पर सुरक्षा बलों ने अपनी ठोस पकड़ बना ली है। लगातार ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की कमर अब टूटने लगी है।

फिर भी, नए हालात में वे नई भर्ती का प्रयास कर रहे हैं। पिछले दो साल से सुरक्षा बलों की सख्ती के कारण नक्सल क्षेत्र में नए नक्सलियों की भर्ती करीब-करीब ठप सी थी। 

कश्मीर में भी हो रही है कोशिश

कश्मीर में पिछले साल अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद जो लॉकडाउन हुआ था, उससे आतंकियों की भर्ती प्रक्रिया ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह का कहना है कि आतंकी अब नए सदस्यों की भर्ती करने के लिए कोशिश कर रहे हैं।

दो-तीन वर्षों के दौरान सुरक्षा बलों ने आतंकियों के खिलाफ कई बड़े ऑपरेशन किए हैं। आतंकियों ने स्थानीय स्तर पर अनेक युवाओं को गुमराह कर उन्हें अपने संगठन में शामिल भी किया था।

सुरक्षा बलों ने जब 160 आतंकवादियों को मौत के घाट उतारा, तो उन्होंने स्थानीय स्तर पर नई भर्ती के लिए हाथ-पांव मारने शुरू किए थे। करीब 140 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे। इनमें से भी कई युवा वापस लौट आए, तो बहुत से मारे भी गए।

अब ये आतंकी कोरोना के लॉकडाउन का फायदा उठाने का प्रयास कर रहे हैं।
 

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