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आतंकवाद, उग्रवाद, हाईजैकर्स का एक इलाज, अजीत डोभाल

Tue, 04 Jun 2019 04:59 AM IST
Avdhesh Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Tue, 04 Jun 2019 04:59 AM IST
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Terrorism, extremism, a cure of hijackers, Ajit Doval
ajit doval
50 के दशक में मिजो मूल के भारतीय सेना के एक हवलदार लालडेंगा को केंद्र सरकार की नीतियां अपने क्षेत्र के लिए अनुचित लगीं। नतीजतन उसने सेना की नौकरी छोड़ी, बागी होकर मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) बनाया और मिजोरम को भारत से पृथक एक संप्रभु राष्ट्र बनाने के लिए हिंसक आंदोलन छेड़ दिया। मिजो जिला उस समय असम का हिस्सा था। एमएनएफ ने सरकारी कार्यालयों और सुरक्षाबालों पर हमले शुरू कर दिए। इस आंदोलन से सेना तो निपट ही रही थी, केरल काडर के एक युवा आईपीएस अधिकारी अजीत डोभाल को पृथकतावादियों से वार्ता में लगाया गया।
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डोभाल ने वार्ता के दौरान इस आंदोलन के नेताओं का दृष्टिकोण न केवल भारत के साथ रहने के लिए बदला बल्कि अंतत: खुद लालडेंगा ने भी शांति प्रस्ताव को स्वीकार किया। इन वार्ताओं की सफलता ने अजित डोभाल को अपने सेवाकाल के मात्र छठवें वर्ष में पुलिस सेवा मेडल दिलवाया, यह सम्मान पाने वाले वे सबसे युवा पुलिस अधिकारी बने। यह एक घटना इंटेलीजेंस और राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अजित डोभाल की भूमिका को केवल समझाने के लिए काफी है। 
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डोभाल ने अपने करीब 37 वर्ष के कॅरिअर में सिक्कम के भारत में विलय, आईएसआई समर्थित खालिस्तानी आतंकवाद, रोमानियाई राजदूत लिवियू राडु की पंजाब में अपहरण के बाद रिहाई, स्वर्ण मंदिर को आतंकियों के कब्जे से छुड़ाने के लिए चले ऑपरेशन ब्लैक थंडर, इस्लामाबाद में सात वर्ष हाईकमीशन में सेवा और 90 के दशक में कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों के खिलाफ इख्वान उल मुस्लेमून संगठन स्थापित करने जैसे कारनामे अंजाम दिए। इनके लिए उन्हें विशेष रूप से पहचाना जाता है।
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बचपन, स्कूल और आईपीएस : कीर्ति चक्र पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी

वर्ष 1945 में अजित का जन्म पौड़ी गढ़वाल के घिरी बनेलसियुन गांव में हुआ। अजित डोभाल के पिता जीएन डोभाल सेना में मेजर थे। अजित की स्कूली शिक्षा अजमेर के राष्ट्रीय मिलिट्री स्कूल में हुई जिसे भारतीय सेना चलाती है। यहां वे 1955-56 बैच के विद्यार्थी के रूप में जाने जाते हैं। अजित ने आगरा यूनिवर्सिटी से 1967 में अर्थशास्त्र में मास्टर्स किया और अगले ही वर्ष प्रतिष्ठित आईपीएस के केरल काडर में चुने गए। वे 1988 में भारतीय सेना का प्रतिष्ठित कीर्ति चक्र पाने वाले पहले पुलिस अधिकारी भी बने।

15 विमान हाईजैकिंग, सभी में वार्ताकार

वर्ष 1971 से 1999 के दौरान देश में हुई 15 विमान हाईजैकिंग के दौरान अजित डोभाल हर बार अपहर्ताओं से वार्ताकारों में शामिल रहे। इंटेलीजेंस ब्यूरो के साथ साथ वे मल्टी एजेंसी सेंटर और जॉइंट टास्क फोर्स ऑन इंटेलीजेंसी के संस्थापक अध्यक्ष भी बने। 2005 में आईपीएस से रिटायर होने के बाद आईबी के निदेशक बनाए गए और 2014 में उन्हें पहली दफा सुरक्षा सलाहकार बनाया गया।
 
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